परसुडीह-गोविंदपुर सड़क निर्माण में देरी से ग्रामीणों का आक्रोश। लोगों को आनेजाने में हो रही परेशानी।

KHASMAHAL-GOVINDPUR ROAD: जमशेदपुर के गोविंदपुर मुख्य मार्ग पर स्थित राहरगोड़ा से गदड़ा के बीच अधूरे पड़े सड़क निर्माण कार्य को लेकर सोमवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। वर्षों से सड़क निर्माण कार्य अधूरा रहने और बरसात के दिनों में जलजमाव की गंभीर समस्या से परेशान ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह करीब आठ बजे शुरू हुआ सड़क जाम दोपहर लगभग 1:30 बजे तक जारी रहा, जिससे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। सड़क जाम के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

18 करोड़ की परियोजना, फिर भी सड़क की हालत बदहाल

ग्रामीणों का आरोप है कि गोलपहाड़ी से गोविंदपुर फाटक तक लगभग साढ़े सात किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए करीब 18 करोड़ 41 लाख रुपये की योजना स्वीकृत की गई थी। परियोजना का शिलान्यास भी किया गया, लेकिन राहरगोड़ा से गदड़ा के बीच सड़क निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। परिणामस्वरूप सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है और बरसात के दौरान यहां जलजमाव की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर चलना तक मुश्किल हो गया है, जबकि रोजाना हजारों लोग इसी मार्ग से आवागमन करते हैं।


महिलाओं ने संभाला आंदोलन का मोर्चा

सड़क की बदहाली से सबसे अधिक प्रभावित महिलाओं ने आंदोलन की अगुवाई की। सोमवार सुबह बड़ी संख्या में महिलाएं सड़क पर बैठ गईं और बसों समेत सभी प्रकार के वाहनों का परिचालन रोक दिया। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने क्षेत्रीय विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सड़क निर्माण कार्य में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं की गई। महिलाओं ने स्पष्ट कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई तीखी नोकझोंक

सड़क जाम की सूचना मिलने के बाद परसुडीह थाना प्रभारी अविनाश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और सड़क खाली कराने का प्रयास किया, लेकिन महिलाएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शन कर रही महिलाओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें हटाने के दौरान पुलिस की ओर से धक्का-मुक्की की गई, जिसमें अंजू देवी समेत दो महिलाओं को चोट लगी। कुछ महिलाओं की चूड़ियां भी टूट गईं। इस घटना के बाद प्रदर्शनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया और उन्होंने पुलिस प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।


स्कूली बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों को हो रही परेशानी

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की जर्जर स्थिति का सबसे अधिक असर महिलाओं, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ रहा है। बारिश के दौरान सड़क पर पानी भर जाने से लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत होती है, जबकि बच्चों को स्कूल जाने में भारी परेशानी उठानी पड़ती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास योजनाओं की घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन उनका लाभ आम जनता तक समय पर नहीं पहुंच पाता। सड़क निर्माण कार्य अधूरा रहने से पूरे क्षेत्र के लोग वर्षों से परेशान हैं।

लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हुआ आंदोलन

करीब पांच घंटे तक चले सड़क जाम और प्रदर्शन के बाद संबंधित विभाग के कार्यपालक अभियंता मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की और सड़क निर्माण कार्य तथा अन्य समस्याओं के समाधान को लेकर लिखित आश्वासन दिया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त कर सड़क जाम हटा लिया। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया और समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो भविष्य में इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे केवल वादों पर भरोसा नहीं करेंगे, बल्कि निर्माण कार्य शुरू होने तक लगातार निगरानी रखेंगे।