Jamshedpur News: पोटका प्रखंड मुख्यालय में मंगलवार को कोल्हान क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन हरिणा मेला की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पोटका विधायक Sanjeev Sardar ने की। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों तथा मेला समिति के सदस्यों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी रोजो संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाले हरिणा मेला को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना था। बैठक में मेला संचालन, सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधा, यातायात प्रबंधन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। विधायक ने सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करने और समय रहते सभी तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया।
ग्रामीणों की मांग पर शराब बिक्री और बूगी-बूगी डांस पर रोक
बैठक के दौरान हरिणा गांव के ग्रामीणों ने मेला परिसर में पूर्ण शराबबंदी लागू करने तथा बूगी-बूगी डांस कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाने की मांग रखी। ग्रामीणों का कहना था कि ऐसे आयोजनों के कारण कई बार विवाद और अशांति की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे धार्मिक माहौल प्रभावित होता है।
ग्रामीणों की मांग को गंभीरता से लेते हुए विधायक संजीव सरदार ने प्रशासन को मेला क्षेत्र में शराब बिक्री पर पूर्ण रोक लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने मेला समिति को यह जिम्मेदारी दी कि वे स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप सांस्कृतिक कार्यक्रमों का चयन करें, ताकि मेला का धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप बना रहे।
तीन राज्यों से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
हरिणा मेला केवल पूर्वी सिंहभूम या कोल्हान क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड, ओड़िशा और पश्चिम बंगाल के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। विधायक ने बताया कि 15 जून से शुरू होने वाले इस मेले में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मुक्तेश्वर धाम हरिणा पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हरिणा क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री Hemant Soren के नेतृत्व में यहां बुनियादी सुविधाओं के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। साथ ही हरिणा मेला को राजकीय मेला का दर्जा दिलाने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं, जिससे इसकी पहचान और व्यापक हो सके।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाया गया विशेष कार्ययोजना
बैठक में श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। विधायक ने निर्देश दिया कि मेला परिसर में पेयजल, स्वास्थ्य, बिजली और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि मेला अवधि के दौरान चिकित्सा टीम, एंबुलेंस और स्वास्थ्य केंद्र 24 घंटे सक्रिय रहें। इसके अलावा विद्युत विभाग को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा पेयजल विभाग को पर्याप्त जलापूर्ति की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। विधायक ने कहा कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए और सभी विभाग अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी गंभीरता से करें।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर दिए गए विशेष निर्देश
मेला में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विशेष चर्चा हुई। विधायक ने पुलिस प्रशासन को पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल तैनात करने का निर्देश दिया। उन्होंने बड़े वाहनों का परिचालन पांडरशोली से बुनूडीह होते हुए हरिणा गांव तक कराने तथा वाहन पार्किंग की व्यवस्था बड्डीह प्राथमिक विद्यालय परिसर में करने का सुझाव दिया। इसके अलावा आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए मेला मार्ग को कम से कम 20 फीट चौड़ा रखने, पाटभोक्ताओं के प्रवेश के लिए सभी गेट खुले रखने और भीड़ नियंत्रण के लिए प्रभावी व्यवस्था करने को कहा गया। विधायक ने बाइक स्टंट, रैश ड्राइविंग और असामाजिक गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने तथा मनचलों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए।
प्रशासन ने शांतिपूर्ण आयोजन का दिया भरोसा
बैठक के बाद मुसाबनी डीएसपी Rohit Kumar Rajwar ने कहा कि प्रशासन हरिणा मेला के शांतिपूर्ण और सफल आयोजन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पुलिस और प्रशासनिक टीम 24 घंटे मेला समिति के साथ समन्वय बनाकर कार्य करेगी। डीएसपी ने कहा कि ग्रामीणों की मांग के अनुरूप मेला में पूर्ण शराबबंदी लागू रहेगी और नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बाइक स्टंट और रैश ड्राइविंग के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि 4 जून को मेला स्थल पर एक और तैयारी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था और संचालन से जुड़ी अंतिम रणनीति तय की जाएगी। हरिणा मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। ऐसे में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयास से इस वर्ष भी मेला को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और भव्य बनाने की दिशा में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
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