तमाड़ / रांची/ जमशेदपुर : समाज में बदलाव और प्रगति की नींव तब और मजबूत हो जाती है, जब आधुनिक विचार हमारे पारंपरिक त्योहारों, कला और उत्सवों का हिस्सा बनने लगते हैं। झारखंड के रांची जिले के अंतर्गत कला जगत में अपनी खास पहचान रखने वाले चिरूडीह में एक ऐसा ही अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। मौका था झारखंड आंदोलन के प्रणेता स्वर्गीय अश्विनी महतो की पावन स्मृति में आयोजित और खेल का। इस महोत्सव ने न सिर्फ ग्रामीण प्रतिभाओं को एक मंच दिया, बल्कि लैंगिक को हुए खेल के मैदान से समानता का एक संदेश भी पूरे झारखंड को दिया। कला, संस्कृति, शिक्षा और खेल के इस खूबसूरत समागम ने पूरे क्षेत्र में एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है।
लैंगिक समानता की पिच पर सीता एकादश की जीत
इस पूरे महोत्सव का सबसे और अनोखा आकर्षण जेंडर क्रिकेट रही। आम तौर पर क्रिकेट के मैदान पर महिला और पुरुषों के अलग-अलग मुकाबले देखे जाते हैं, लेकिन चिरूडीह के खेल मैदान ने एक प्रगतिशील इतिहास रचा। पुरुषों और महिलाओं ने कंधे से कंधा मिलाकर एक ही टीम में मैच खेला। इस 3 मैचों की टी-20 (5-5 ओवर फॉर्मेट) में और आर्टिस्ट के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। गांव के पारंपरिक सोहराय, छऊ और चित्र कलाकारों से सजी इन दोनों टीमों के बीच रोमांच की कोई कमी नहीं थी। पहले दो मुकाबलों में सीता एकादश ने शानदार रणनीति और उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए लक्ष्य का पीछा किया और जीत दर्ज की। का तीसरा और अंतिम मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और टाई पर छूटा। इस तरह सीता एकादश ने इस ऐतिहासिक मिक्स जेंडर क्रिकेट को 2-0 से अपने नाम कर लिया।
प्लेयर ऑफ द सीरीज से खिताब से सीता कुमारी नवाजा गया
इस अनूठी क्रिकेट ने ग्रामीण इलाकों में छिपी खेल प्रतिभाओं को उजागर करने का काम किया। पूरे टूर्नामेंट में अपने हरफनमौला (All-round) प्रदर्शन से दर्शकों का दिल जीतने वाली सीता कुमारी को ऑफ द के खिताब से नवाजा गया। सीता कुमारी ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही क्षेत्रों में के समकक्ष बेहतरीन खेल दिखाया, जो यह साबित करता है कि अगर ग्रामीण परिवेश की बेटियों को सही अवसर और मंच मिले, तो वे खेल के मैदान में किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं। मैदान पर मौजूद ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने तालियों की के साथ इस महिला की प्रतिभा का हौसला बढ़ाया।
कैनवास पर जीवंत हुई झारखंड की समृद्ध संस्कृति
चिरूडीह को (कलाकारों का गांव) यूं ही नहीं कहा जाता। इस महोत्सव के दौरान गांव की मिट्टी की महक और यहां की पारंपरिक कला का प्रदर्शन पेंटिंग प्रतियोगिता के माध्यम से देखने को मिला। प्रतियोगिता में संख्या में स्थानीय बच्चों ने हिस्सा लिया। बच्चों ने अपनी कूची और पारंपरिक रंगों के माध्यम से कैनवास पर कला की खूबसूरत आकृतियां उकेरीं। प्रकृति, जीव-जंतुओं और जनजातीय जीवन दर्शन को दर्शाती इन कलाकृतियों को देखकर कार्यक्रम में आए अतिथि भी दंग रह गए। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, लोक कला और सांस्कृतिक विरासत से रखना है, जिसमें यह महोत्सव पूरी तरह सफल रहा।
पंचायत के 15 मैट्रिक टॉपर्स हुए सम्मानित
एक सजग और समृद्ध समाज के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे अहम होती है। महोत्सव के मंच से सिर्फ खेल और कला को ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को भी प्रोत्साहित किया गया। पंचायत के विभिन्न गांवों से इस वर्ष मैट्रिक की परीक्षा में 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करने वाले कुल 15 होनहार छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। ग्रामीण परिवेश की विपरीत परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के बावजूद इन बच्चों ने जो सफलता हासिल की है, वह सराहनीय है। मंच से इन बच्चों को सम्मानित होते देख अन्य छोटे बच्चों के दिलों में भी आगे बढ़ने और बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का संकल्प जगा।
माता-पिता के त्याग और समर्पण को किया सलाम
इस महोत्सव की एक और सबसे खूबसूरत और संवेदनशील थी-'बेहतर करने वाले का सम्मान। आमतौर पर पुरस्कारों के मंच पर सिर्फ बच्चों को सराहा जाता है, लेकिन इस आयोजन की सोच अलग थी। आयोजकों का मानना था कि बच्चों की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का संघर्ष, त्याग और अच्छे संस्कार होते हैं। इसलिए, बच्चों को सही दिशा दिखाने और उन्हें कला, शिक्षा व खेल में आगे बढ़ाने वाले ग्रामीण अभिभावकों को भी मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। यह कदम ग्रामीण समाज में पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने और बच्चों के सर्वांगीण विकास में अभिभावकों की भागीदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक अनूठी मिसाल है।
रोलिंग स्टोन एकेडमी ने बढ़ाई विजेताओं की शोभा
इस गरिमामयी कला और खेल महोत्सव को सफल बनाने में क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई। मौके पर के विधायक प्रतिनिधि हृषिकेश महतो, प्रख्यात आर्टिस्ट मनीष महतो, प्रबुद्ध शिक्षाविद् आकाश महतो और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही संस्था के संस्थापक तरुण कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने इस आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि स्वर्गीय अश्विनी महतो जैसे आंदोलकारियों की स्मृति को रखने का इससे खूबसूरत और सकारात्मक तरीका दूसरा नहीं हो सकता। कार्यक्रम के समापन पर मिक्स जेंडर क्रिकेट की विजेता व उपविजेता टीमों, मैट्रिक के मेधावी छात्र-छात्राओं, चित्रकला प्रतियोगिता के नन्हे विजेताओं और सम्मानित अभिभावकों को रोलिंग स्टोन एकेडमी, चक्रधरपुर के सौजन्य से आकर्षक चमचमाती और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
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