करनडीह से शुरू होकर शहर का भ्रमण करेगी बाइक रैली
आयोजकों के अनुसार बाइक रैली करनडीह स्थित आदिवासी कल्याण छात्रावास परिसर से प्रारंभ होगी। इसके बाद रैली सुंदरनगर, खुकड़ाडीह, हलुदबनी, परसुडीह, खासमहल, टाटानगर स्टेशन, जुगसलाई और बिष्टुपुर होते हुए साकची पहुंचेगी। रैली के दौरान विभिन्न स्थानों पर स्वतंत्रता सेनानियों और आदिवासी महापुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। साकची में भगवान बिरसा मुंडा की विशाल प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद रैली बिरसानगर संडे मार्केट स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा तक पहुंचेगी। वहां भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद रैली टिनप्लेट, बर्मामाइंस और स्टेशन क्षेत्र से होते हुए पुनः करनडीह लौटेगी। इस पूरे मार्ग में आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।
Also Read : महिला विश्वविद्यालय में स्नातक नामांकन 2026 शुरू: 22 जून तक करें ऑनलाइन आवेदन, जानें पूरी प्रक्रिया
एक हजार से अधिक युवाओं की भागीदारी की उम्मीद
संजीव कुमार मुर्मू ने बताया कि इस बाइक रैली में एक हजार से अधिक युवाओं के शामिल होने की संभावना है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं से संपर्क कर उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने का आमंत्रण दिया जा रहा है। आयोजन को सफल बनाने के लिए कई समितियां गठित की गई हैं, जो अलग-अलग जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की भागीदारी किसी भी समाज के भविष्य का संकेत होती है। हूल दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी यह संदेश देगी कि नई पीढ़ी अपने इतिहास, संस्कृति और समाज के प्रति सजग है। कार्यक्रम में आदिवासी स्वशासन व्यवस्था से जुड़े प्रमुख लोगों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
मांदर, ढोल और नगाड़ों के साथ दिखेगी आदिवासी संस्कृति की झलक
बाइक रैली को पारंपरिक आदिवासी संस्कृति से जोड़ने के लिए विशेष तैयारी की गई है। रैली के दौरान मांदर, ढोल और नगाड़ों की गूंज पूरे मार्ग में सुनाई देगी। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ युवा आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन करेंगे। आयोजकों का कहना है कि आधुनिक दौर में भी अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखना आवश्यक है। इसलिए इस रैली को केवल वाहन जुलूस नहीं बल्कि सांस्कृतिक जागरूकता अभियान के रूप में भी देखा जा रहा है। पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से समाज की समृद्ध विरासत को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
Also Read : Jamshedpur Talent Roshan Patro Reaches Top 12 of India’s Best Dancer Season 5, Inspiring Thousands
समाज के 100 विशिष्ट लोगों को मिलेगा सम्मान
हूल दिवस समारोह के दौरान आदिवासी समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले 100 विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें समाजसेवी, साहित्यकार, कलाकार, रंगकर्मी, फिल्म अभिनेता, निर्माता-निर्देशक, युवा नेतृत्वकर्ता और स्वशासन व्यवस्था से जुड़े प्रमुख लोग शामिल होंगे। संजीव कुमार मुर्मू ने बताया कि समाज के विकास और उत्थान के लिए कई लोग अपने स्तर पर निरंतर कार्य कर रहे हैं। ऐसे लोगों का सम्मान कर उनके योगदान को सार्वजनिक पहचान दी जाएगी। इससे न केवल सम्मानित व्यक्तियों का उत्साह बढ़ेगा, बल्कि नई पीढ़ी को भी समाज और संस्कृति के लिए सकारात्मक कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। इन विशिष्ट लोगों के चयन के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। समिति द्वारा चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सम्मानित होने वाले 100 लोगों की सूची सार्वजनिक की जाएगी।
Also Read : आम महोत्सव 2026: किसानों को बाजार से जोड़ने की सफल पहल, 1074 किलो आम की बिक्री से बढ़ी आय
कोर कमेटी की बैठक में बनी कार्यक्रम की रूपरेखा
रविवार को झारखंड आदिवासी युवा संगठन की कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में हूल दिवस के कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई तथा मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों के नामों पर चर्चा की गई। साथ ही रैली के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था, स्वागत कार्यक्रम और सम्मान समारोह की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बैठक में सुकरा हो, संजय सोरेन, सालू मुर्मू, सिदो हांसदा, चैतन हेम्ब्रम, गोपाल सोय, सुरेश हेम्ब्रम, सनातन हेंब्रम, देव सोरेन, नरेंद्र मार्डी, मानस सरदार, प्रकाश हेंब्रम, गालू हांसदा, लाल बाबू मार्डी, जाकतु मार्डी और उदय हेंब्रम सहित कई सदस्य उपस्थित थे। सभी ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।
Social Plugin