Jamshedpur News : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के भवन निर्माण व्यवसाय और आम नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। जिले में लंबे समय से चली आ रही बालू की किल्लत अब समाप्त होने जा रही है। जिला खनन कार्यालय द्वारा विधिवत रूप से परिवहन चालान (Mining Transit Challan) जारी किए जाने के बाद, क्षेत्र में कानूनी और वैध तरीके से बालू के उठाव और परिवहन का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। इस कदम से न सिर्फ विकास योजनाओं को रफ्तार मिलेगी, बल्कि सरकार के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।


झारखंड प्रदूषण नियंत्रण परिषद से CTO मिलने के बाद प्रक्रिया पूरी

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पूर्वी सिंहभूम जिला के दो प्रमुख बालू घाटों को झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद की ओर से 'कंसेंट टू ऑपरेट' (CTO) यानी संचालन की अनुमति प्राप्त हुई। पर्यावरणीय स्वीकृतियों और सभी कानूनी मानकों को पूरा करने के बाद जिला खनन कार्यालय ने बिना किसी देरी के परिवहन चालान जारी करने की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी। इस मंजूरी के बाद अब इन घाटों से पर्यावरण के अनुकूल और नियमों के दायरे में रहकर ही बालू का खनन किया जा सकेगा, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

कोरिया मोहनपाल और स्वर्णरेखा बालू घाट से शुरू हुआ खनन

जिला प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जिन प्रमुख बालू घाटों के लिए संचालन और परिवहन की अनुमति निर्गत की गई है, वे काफी बड़े क्षेत्र में फैले हुए हैं। इनमें शामिल हैं:

  • कोरिया मोहनपाल बालू घाट: यह घाट लगभग 34.70 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत है।
  • कोरिया मोहनपाल एवं स्वर्णरेखा बालू घाट: इस संयुक्त क्लस्टर का कुल क्षेत्रफल लगभग 46.30 हेक्टेयर है।

इन दोनों विशाल बालू घाटों के चालू होने से जिले में बालू की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। पर्याप्त मात्रा में भंडारण होने के कारण निर्माण क्षेत्र की जरूरतें आसानी से पूरी होंगी।

राज्य सरकार को ₹20 करोड़ के खनन राजस्व की उम्मीद

इन दोनों बड़े घाटों से कमर्शियल और वैध तरीके से बालू का उठाव शुरू होने का सीधा सकारात्मक असर राज्य के खजाने पर पड़ने वाला है। जिला खनन कार्यालय के अनुमान के मुताबिक, इन घाटों के सुचारू संचालन से राज्य सरकार को लगभग 20 करोड़ रुपये का एक बड़ा खनन राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। यह राजस्व स्थानीय विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं में बेहद मददगार साबित होगा।

अवैध बालू खनन व ब्लैक मार्केटिंग पर लगेगा कड़ा अंकुश

विगत कुछ समय से वैध बालू की कमी के कारण क्षेत्र में अवैध बालू उठाव और माफियाओं के सक्रिय होने की शिकायतें मिल रही थीं। लेकिन अब, जिला प्रशासन द्वारा वैध चालान जारी करने के बाद इस अवैध कारोबार की कमर टूट जाएगी। वैध चालान के माध्यम से बालू की आपूर्ति सुचारू होने से बाजार में कालेबाजारी रुकेगी। इसके साथ ही, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को अवैध परिवहन और तस्करी की गतिविधियों पर प्रभावी रूप से नियंत्रण स्थापित करने में बड़ी मदद मिलेगी। अब केवल प्रमाणित वाहनों के जरिए ही बालू का परिवहन संभव हो पाएगा।

निर्माण कार्यों को मिलेगी भारी राहत

बालू की सहज उपलब्धता का सबसे बड़ा लाभ आम जनता और बुनियादी ढांचा क्षेत्र को मिलेगा।

प्रमुख लाभ:

    • सरकारी योजनाएं: जिले में चल रही प्रधानमंत्री आवास योजना, पुल-पुलिया, सड़कों और अन्य सरकारी एवं सामाजिक निर्माण कार्यों में आ रही बाधाएं अब दूर हो जाएंगी।
    • निजी निर्माण: आम नागरिकों को अपने निजी आवास, दुकान या अन्य निर्माण कार्यों के लिए उचित दाम पर और बिना किसी कानूनी अड़चन के बालू आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।
    • रोजगार: इस क्षेत्र के सक्रिय होने से स्थानीय स्तर पर परिवहन और मजदूरी के नए अवसर भी पैदा होंगे।