Jamshedpur News: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन अधिकार समिति डालापानी की ओर से फुटबॉल मैदान में पर्यावरण संरक्षण संकल्प सभा सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले महिला एवं पुरुषों को सम्मानित करना था। समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण प्रेमी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने पर्यावरण की रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लिया और यह शपथ दोहराई कि वे जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए निरंतर अभियान चलाते रहेंगे। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस मनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे जनआंदोलन का रूप देना आवश्यक है।


पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वालों को किया गया सम्मानित

सम्मान समारोह के दौरान उन महिला और पुरुषों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। आयोजकों ने कहा कि ऐसे लोगों के प्रयास समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और नई पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने की सीख देते हैं। सम्मानित लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने, जल स्रोतों की रक्षा करने और प्रकृति के साथ संतुलित जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

ग्रीन मैन मदन मोहन सोरेन ने दिया महत्वपूर्ण संदेश

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित पर्यावरण प्रेमी और ‘ग्रीन मैन’ के नाम से चर्चित मदन मोहन सोरेन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं और अभियानों के सहारे संभव नहीं है। इसके लिए समाज को प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की जीवनशैली अपनानी होगी।
उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की परंपरा को पुनर्जीवित करना आवश्यक हो गया है। उन्होंने लोगों से दैनिक जीवन में पर्यावरण के अनुकूल आदतों को अपनाने की अपील की।

आदिवासी संस्कृति से सीखने की जरूरत

मदन मोहन सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की परंपरा का निर्वहन करता आया है। आदिवासी संस्कृति में प्रकृति को केवल संसाधन नहीं माना जाता, बल्कि उसे जीवनदाता और अस्तित्व का आधार समझा जाता है। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधों, नदियों, पहाड़ों और जंगलों के प्रति सम्मान की भावना आदिवासी जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यही कारण है कि आदिवासी समुदाय प्रकृति के संरक्षण को अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी मानता है। उन्होंने कहा कि यदि आधुनिक समाज आदिवासी परंपराओं और जीवन मूल्यों से सीख ले तो पर्यावरणीय संकटों से काफी हद तक निपटा जा सकता है।

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर जोर

सभा में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए सामुदायिक भागीदारी और जनजागरूकता अत्यंत आवश्यक है। लोगों को प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने, जैव विविधता की रक्षा करने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने यह भी कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण देने के लिए आज ही ठोस कदम उठाने होंगे। यदि वर्तमान पीढ़ी अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझेगी तो भविष्य में पर्यावरणीय संकट और गंभीर हो सकते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में योगदान देना चाहिए।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की रही सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में सुखलाल हांसदा, दुर्लभ बेसरा, किंकर महतो और बेको पंचायत की मुखिया चंपा माझी सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी ने पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए लोगों से सक्रिय भागीदारी की अपील की। इस अवसर पर किंकर महतो, सुखलाल हांसदा, दुर्लभ बेसरा, दामु प्रामाणिक, मधुसूदन दास, प्रभाकर महतो, सावित्री महतो, लीलावती महतो, मिनोति महतो, दुर्गी हांसदा, कविता महतो, सरस्वती महतो, टुसूमनी महतो, जगन्नाथ सोरेन, सुदर्शन सोरेन, नमिता महतो, भक्तिपद महतो और गुरु प्रसाद महतो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि समाज मिलकर प्रकृति की रक्षा के लिए प्रयास करेगा, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, स्वच्छ और हरित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकेगा।