Jamshedpur News: पोटका प्रखंड के नरवा-पहाड़ल क्षेत्र से जुड़े झारखंड आंदोलनकारी एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता जितराई मुर्मू के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। झारखंड आंदोलन के दौर से लेकर वर्तमान समय तक सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने वाले जितराई मुर्मू को एक समर्पित कार्यकर्ता, जुझारू नेता और समाजसेवी के रूप में जाना जाता था। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र के राजनीतिक, सामाजिक और आम लोगों में गहरा दुःख व्याप्त हो गया। गुरुवार को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ताओं, स्थानीय लोगों और शुभचिंतकों ने उपस्थित होकर उन्हें अंतिम विदाई दी।

विधायक संजीव सरदार ने पहुंचकर दी श्रद्धांजलि

स्वर्गीय जितराई मुर्मू के निधन की सूचना मिलने के बाद पोटका विधायक संजीव सरदार उनके आवास पहुंचे और दिवंगत नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी तथा इस कठिन समय में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। विधायक ने परिवार के सदस्यों से बातचीत करते हुए कहा कि दुःख की इस घड़ी में पूरा क्षेत्र और झामुमो परिवार उनके साथ खड़ा है। उन्होंने दिवंगत नेता के योगदान को याद करते हुए कहा कि जितराई मुर्मू ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा समाज और आंदोलन के लिए समर्पित किया था। उनका जाना केवल एक परिवार की क्षति नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र और संगठन के लिए अपूरणीय नुकसान है।

छात्र जीवन से ही आंदोलन और संगठन के लिए रहे सक्रिय

विधायक संजीव सरदार ने श्रद्धांजलि सभा के दौरान कहा कि स्वर्गीय जितराई मुर्मू छात्र जीवन से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे थे। झारखंड आंदोलन के कठिन दौर में उन्होंने आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने हमेशा आदिवासी, मूलवासी और वंचित वर्गों के अधिकारों की आवाज बुलंद की। सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय पहचान और झारखंडी अस्मिता के मुद्दों पर वे लगातार संघर्षरत रहे। संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण के कारण वे कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय थे। उनकी पहचान केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में नहीं थी, बल्कि वे समाज के हर वर्ग के लोगों की समस्याओं को सुनने और समाधान के लिए प्रयास करने वाले जननेता के रूप में भी जाने जाते थे।

नरवा-पहाड़ल क्षेत्र में झामुमो को मजबूत बनाने में निभाई बड़ी भूमिका

झारखंड मुक्ति मोर्चा को नरवा-पहाड़ल और आसपास के क्षेत्रों में मजबूत आधार दिलाने में जितराई मुर्मू की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत करने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और पार्टी की विचारधारा को लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया। उनकी मेहनत और सक्रियता का परिणाम था कि क्षेत्र में झामुमो की मजबूत पहचान बनी। स्थानीय मुद्दों को लेकर वे हमेशा मुखर रहे और आम जनता की समस्याओं को संगठन एवं प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य करते रहे। इस अवसर पर झामुमो के पूर्वी सिंहभूम जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी स्वर्गीय मुर्मू को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया और कहा कि संगठन उनके समर्पण और संघर्ष को कभी नहीं भूल पाएगा।

स्पष्ट विचारधारा और निर्भीक व्यक्तित्व के लिए थे प्रसिद्ध

जितराई मुर्मू अपने स्पष्ट विचारों और निर्भीक व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। वे हमेशा समाज और क्षेत्र के हितों को सर्वोपरि रखते थे। चाहे सामाजिक अन्याय का मुद्दा हो या आदिवासी-मूलवासी अधिकारों का प्रश्न, उन्होंने हमेशा मजबूती के साथ अपनी बात रखी। राजनीतिक जीवन में भी उन्होंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। यही कारण था कि संगठन के वरिष्ठ नेताओं से लेकर युवा कार्यकर्ताओं तक सभी उनके प्रति सम्मान की भावना रखते थे। वे समाज में जागरूकता फैलाने और युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति प्रेरित करने का कार्य भी लगातार करते रहे। उनके निधन से झारखंड आंदोलन से जुड़े पुराने कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों में भी शोक का माहौल है। कई लोगों ने उन्हें झारखंडी अस्मिता की लड़ाई का सच्चा सिपाही बताया।

अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब, परिवार को छोड़ गए भरा-पूरा संसार

शुक्रवार को उनके अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। झारखंड मुक्ति मोर्चा के ध्वज के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। वातावरण भावुक हो गया जब कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी। स्वर्गीय जितराई मुर्मू अपने पीछे धर्मपत्नी, एक पुत्री, दो पुत्र तथा वृद्ध माता सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। क्षेत्र के लोगों ने परिवार को सांत्वना देते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और सामाजिक सरोकारों का प्रतीक रहा। झारखंड आंदोलन, आदिवासी समाज और झामुमो संगठन में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनका निधन एक ऐसे कर्मठ जननेता की विदाई है, जिसने अपने पूरे जीवन को समाज और आंदोलन की सेवा में समर्पित कर दिया।