JHARKHAND NEWS : देश के करोड़ों आदिवासियों की धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक अस्तित्व को बनाए रखने की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए आदिवासी जन परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यसभा सांसद संजय सिंह से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपकर भारत की आगामी जनगणना 2027 के प्रपत्र (Form) में धर्म के कॉलम के अंतर्गत ‘आदिवासी धर्म’ का अलग विकल्प/कॉलम शामिल करने की पुरजोर वकालत की। प्रतिनिधिमंडल ने सांसद से संसद के आगामी सत्र में इस संवेदनशील और ऐतिहासिक मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की अपील की, ताकि केंद्र सरकार तक आदिवासी समुदाय की चिरलंबित मांग मजबूती से पहुंच सके।
प्रकृति आधारित आस्था और पृथक धार्मिक पहचान का तर्क
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपते हुए सांसद के समक्ष तर्क रखा कि आदिवासी समाज की अपनी एक विशिष्ट और स्वतंत्र धार्मिक परंपरा है। उनकी पूजा-पद्धति, पारंपरिक मान्यताएं और जीवन शैली पूरी तरह से प्रकृति पर आधारित हैं। आदिवासी समुदाय न तो किसी स्थापित मूर्ति पूजा का पालन करता है और न ही उनका दर्शन अन्य संगठित धर्मों से मेल खाता है। ऐसे में जनगणना के दौरान किसी अन्य धर्म के कॉलम में खुद को दर्ज कराना उनकी मूल पहचान के साथ समझौता करने जैसा है। इसलिए जनगणना 2027 में 'आदिवासी धर्म' का अलग कॉलम दिया जाना उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक विशिष्टता को संवैधानिक मान्यता देने के लिए बेहद जरूरी है।
संसद में आवाज उठाने का सांसद संजय सिंह ने दिया आश्वासन
राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और ज्ञापन स्वीकार करते हुए उन्हें पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया। सांसद ने आश्वासन दिया कि वे देश के करोड़ों आदिवासियों की भावना, जल-जंगल-जमीन से जुड़ी आस्था और इस जायज मांग को संसद के पटल पर अवश्य उठाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत की विविध सांस्कृतिक संरचना में हर समुदाय की पहचान का सम्मान होना चाहिए और वे इस विषय को लेकर केंद्र सरकार एवं संबंधित मंत्रालय का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करेंगे।
देशव्यापी आंदोलन और आदिवासी अस्तित्व की रक्षा का संकल्प
आदिवासी जन परिषद के नेताओं ने स्पष्ट किया कि 'आदिवासी धर्म' कोड की मांग केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश के करीब 10 करोड़ से अधिक आदिवासियों के अस्तित्व, अधिकारों और स्वदेशी पहचान की रक्षा का विषय है। यदि जनगणना में अलग कोड या कॉलम मिलता है, तो इससे आदिवासी समाज की वास्तविक जनसंख्या के आंकड़े सामने आ सकेंगे, जिससे उनके लिए कल्याणकारी नीतियां और संवैधानिक योजनाएं तैयार करने में आसानी होगी। नेताओं ने कहा कि जब तक इस मांग को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक लोकतांत्रिक माध्यमों से यह प्रयास जारी रहेगा।
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प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय अध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ नेता रहे शामिल
सांसद संजय सिंह को ज्ञापन सौंपने पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल में आदिवासी समाज और संगठनों के कई प्रमुख चेहरा शामिल थे। इसमें मुख्य रूप से आदिवासी जन परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष प्रेम शाही मुंडा, केंद्रीय सचिव विष्णु मुंडा तथा आदिवासी बचाओ संघर्ष समिति के प्रतिनिधि आशुतोष चेरो मौजूद थे। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि पूरे देश का आदिवासी समाज अपनी प्राकृतिक धार्मिक पहचान को लेकर एकजुट है और उम्मीद करता है कि केंद्र सरकार जनगणना 2027 के प्रपत्र में इस मांग पर सकारात्मक कदम उठाएगी।
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