Jamshedpur News: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के पावन अवसर पर दुमका जिले के जामा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ऊपरबहाल में शिक्षा और सामाजिक चेतना की एक नई अलख जगाई गई। 02 अक्टूबर 2026 को गाँव के आदिवासी कला संस्कृति सामुदायिक भवन परिसर में "सिदो कान्हू मुर्मू ग्राम सभा पुस्तकालय सह अध्ययन केंद्र" का भव्य उद्घाटन संपन्न हुआ। गाँव के विकास और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को समर्पित इस पुस्तकालय का उद्घाटन उप विकास आयुक्त (DDC) श्री अनिकेत सचान (IAS), गाँव की प्रधान श्रीमती लीलावती हांसदा, चिगलपहाड़ी पंचायत की मुखिया श्रीमती बिमला किस्कू तथा झारखंड के 'लाइब्रेरी मैन' संजय कच्छप सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से फीता काटकर किया गया। समारोह की शुरुआत महापुरुषों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित करने और अमर शहीद सिदू-कान्हू मुर्मू की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पौधारोपण के साथ हुई।
DDC अनिकेत सचान की अपील: "गाँव से भी निकलेंगे डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षक"
उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त (DDC) अनिकेत सचान ने कहा कि यह पुस्तकालय ग्रामीण बच्चों के जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में गाँव के बच्चे भी सही मार्गदर्शन पाकर डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और बड़े प्रशासनिक अधिकारी बन सकते हैं। DDC ने बताया कि दूरस्थ शिक्षा (Distance Education) के माध्यम से गाँव के छात्र अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे, जिसके लिए पुस्तकालय में इंटरनेट और कंप्यूटर जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने जिला प्रशासन की ओर से पुस्तकालय को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के साथ-साथ इस पुस्तकालय में भी पढ़ने अवश्य भेजें, ताकि उनमें स्वाध्याय की आदत विकसित हो सके।
'लाइब्रेरी मैन' संजय कच्छप ने कहा-नशामुक्त और अंधविश्वास-मुक्त समाज का निर्माण करें
झारखंड में पुस्तकालय क्रांति के जनक 'लाइब्रेरी मैन' संजय कच्छप ने बताया कि सामुदायिक पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को साकार करने का केंद्र हैं। इस पुस्तकालय के माध्यम से बच्चों और युवाओं के लिए समय-समय पर करियर काउंसलिंग और मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जब युवा पढ़ाई की ओर प्रवृत्त होंगे, तो गाँव नशामुक्त बनेगा और समाज से अंधविश्वास खत्म होगा। सही मार्गदर्शन मिलने से गाँव के होनहार छात्र देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में प्रवेश पा सकेंगे। उन्होंने राज्य के अन्य सफल सामुदायिक पुस्तकालयों के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे किताबों के सहयोग से आज ग्रामीण युवा देश और राज्य की सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं।
स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल
समारोह में विशिष्ट अतिथि डॉ. आनंद मोहन सोरेन ने ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ऐतिहासिक रूप से शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों मोर्चों पर पिछड़ा रहा है। यदि समाज को मुख्यधारा में आगे बढ़ना है, तो इन दोनों क्षेत्रों में विशेष सुधार करना होगा। वहीं, पंचायत की मुखिया श्रीमती बिमला किस्कू ने ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे हम अपने अधिकारों और लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। शिक्षा से ही महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण संभव है।
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ग्राम सभा के प्रयास से खुला पुस्तकालय
इस पुस्तकालय की सबसे खास बात यह है कि इसकी नींव पूरी तरह से आत्मनिर्भरता और जन-भागीदारी पर रखी गई है। पिछले दिनों ग्राम सभा के माध्यम से ग्रामीणों ने नवनिर्मित आदिवासी कला केंद्र में सामुदायिक पुस्तकालय खोलने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया था। ग्राम सभा ने स्वयं आर्थिक योगदान देकर पुस्तकालय के लिए अलमारी, टेबल और आवश्यक फर्नीचर की व्यवस्था की। इसके बाद डिजिटल लाइब्रेरी ग्रुप झारखंड के प्रेरणास्रोत संजय कच्छप से संपर्क साधकर इस परियोजना को मूर्त रूप दिया गया। गाँव के लोगों ने अपनी एकजुटता से यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति हो तो संसाधनों की कमी कभी रोड़ा नहीं बन सकती।
अधिकारियों और भामाशाहों का अनुकरणीय सहयोग
पुस्तकालय को समृद्ध बनाने में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अधिकारियों, पेशेवरों और प्रबुद्ध नागरिकों ने खुलकर सहयोग दिया।
- प्रमुख सहयोगी: अजय कच्छप (उप समाहर्ता, लातेहार), अमित खलखो (इंजीनियर, रांची), जयंत हेम्ब्रम (अधिकारी, IOCL गुजरात) और डॉ. यदुवंश प्रणय (प्रोफेसर, SP कॉलेज)।
- सामग्री योगदान: विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत पेशेवरों जैसे मंजीत कच्छप (पंचायत सचिव), विनय कच्छप व आशीष खलखो (CRPF), प्रकाश कच्छप (टाटा एरो), बाँधना कच्छप (रेलवे), संतोष उरांव (रेलवे कोलकाता), इंजीनियर राकेश सोरेन, सेवन मुर्मू, सूर्यदेव हेम्ब्रम, साइमन मुर्मू, संजय हांसदा और राजकिशोर मरांडी ने मिलकर कुर्सियां, टेबल, बुक रैक्स, खेल सामग्री और पठन सामग्री दान की।
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