जमशेदपुुर:आदिवासी उरांव समाज पूर्वी सिंहभूम की ओर से सीतारामडेरा स्थित सरना भवन में रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया. संवाददाता सम्मेलन में राकेश उरांव ने बताया कि 22 सितंबर को झारखंड सहित जिले में भादो एकादशी करमा पूजा महोत्सव धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा. सीतारामडेरा, बिरसानगर, उलीडीह, शंकोसाई, बागबेड़ा, हुरलुंग और नूतनडीह समेत विभिन्न क्षेत्रों में पूजा की विशेष धूम रहेगी.
16 को नदी से बालू लाकर स्थापित किया जायेगा जावारानी
राकेश उरांव ने बताया कि 16 सितंबर को कुंवारे युवक-युवतियों का समूह सुवर्णरेखा नदी से बालू लाकर जावारानी की स्थापना करेगा. 16 से 22 सितंबर तक 7 दिनों तक सुबह-शाम धूप-धूणा दिखाकर पारंपरिक रीति से जावारानी माता की सेवा और पूजा की जायेगी. 21 सितंबर की शाम करम अखड़ा में कुंवारी युवतियां पारंपरिक करम गीत गाकर जावा जागरण करेंगी. संंवाददाता सम्मेलन में शालू लकड़ा, संतोष लकड़ा, लखींद्र लकड़ा, बुधु खलखो, बिरसा तिर्की, बुधराम खलखो, प्रकाश कोया, गोपाल टोप्पो, सुखराम लकड़ा आदि उपस्थित थे.
22 को करम डाली लाकर अखड़ा में स्थापित किया जायेगा
22 सितंबर की दोपहर अविवाहित युवक जंगल से पूजा-अर्चना के बाद करम डाली (करम राजा) लायेंगे. मांदर व नगाड़े की थाप पर नाचते-गाते हुए करम डाली को बस्ती में भ्रमण कराने के बाद अखड़ा में स्थापित किया जायेगा. शाम को पारंपरिक पाहन द्वारा विधिवत पूजा कर समाज के लोगों को करम राजा की कथा सुनायी जायेगी. इसके बाद व्रतधारी अपना उपवास तोड़ेंगे और रात भर विभिन्न अखड़ों में सामूहिक नृत्य का आयोजन होगा.
कब-कब कहां होगा जावा का उठाव
16 सितंबर-सीतारामडेरा, मानगो, शंकोसाई, उलीडीह, बागबेड़ा, मुखी
18 सितंबर-बिरसानगर
शोभायात्रा निकाल करम राजा को दी जायेगी विदाई
23 सितंबर को दोपहर सामूहिक शोभायात्रा निकाल कर करम राजा को नदी में विसर्जित किया जायेगा. विभिन्न बस्तियों के करम अखड़ा से मांदर व नगाड़े की थाप पर नाचते-गाते हुए समाज के लोग सामूहिक शोभा यात्रा निकालेंगे और करम राजा को विदाई देंगे. वहीं शाम को समाज के लोग एक-दूसरे के घर जाकर परना मंडी (भोजन) ग्रहण करेंगे और पर्व की शुभकामनाएं देंगे.
स्थानवार पाहन व कथावाचक की सूची
सीतारामडेरा: पाहन - बुधु मिंज, संचु खालखो, भोला कच्छप,| कथावाचक - सुखराम लकड़ा, सोमा कोया
बिरसानगर: पाहन - महावीर कुजूर , कथावाचक - गणेश कुजूर
उलीडीह: पाहन - पांडु कुजूर , कथावाचक - राजेश्वर किस्पोट्टा
शंकोसाई: पाहन - बासु लकड़ा , कथावाचक - आदिति तिर्की
बागबेड़ा: पाहन व कथावाचक - बुधराम टोप्पो
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