बालीगुमा में कचरा पावर प्लांट का विरोध, सैकड़ों ग्रामीणों ने मानगो अंचल कार्यालय पर किया प्रदर्शन

Jamshedpur News : बालीगुमा मौजा स्थित गोड़गोड़ा धर्मबांधा टोला (गाजाडीह) में प्रस्तावित कचरा पावर प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। शुक्रवार को ग्रामसभा के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीण एकजुट हुए और मानगो अंचल कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन कर प्रस्तावित प्लांट के निर्माण का विरोध किया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि घनी आबादी के बीच किसी भी परिस्थिति में कचरा पावर प्लांट का निर्माण नहीं किया जाए।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि संबंधित क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग निवास करते हैं और आसपास का इलाका सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे स्थान पर कचरा आधारित पावर प्लांट स्थापित किए जाने से लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की गंभीरता को समझते हुए प्रस्तावित योजना पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि विकास योजनाओं का विरोध करना उनका उद्देश्य नहीं है, लेकिन ऐसी परियोजना को आबादी के बीच स्थापित करने से पहले उसके पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों का निष्पक्ष आकलन जरूरी है।

जहरीले धुएं और जल प्रदूषण की जताई आशंका

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे विजय सोय ने कहा कि जिस स्थान पर कचरा पावर प्लांट लगाने की योजना बनाई जा रही है, वह घनी आबादी से घिरा हुआ है। उनका आरोप है कि प्लांट शुरू होने के बाद जहरीला धुआं निकलने और पेयजल प्रदूषित होने की आशंका है। इससे आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि हवा और पानी किसी भी क्षेत्र के लोगों के जीवन का आधार हैं। यदि कचरा प्रसंस्करण या उससे बिजली उत्पादन की प्रक्रिया के कारण प्रदूषण बढ़ता है, तो उसका असर लंबे समय तक रह सकता है। ग्रामीणों ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई।

ग्रामीणों के अनुसार, प्रदूषित हवा और पानी के कारण विभिन्न बीमारियों के फैलने की आशंका बनी रहेगी। इसलिए प्रशासन को परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले स्थानीय लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत पर किसी भी विकास योजना को स्वीकार नहीं करेंगे।

प्लॉट संख्या 4168 को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रस्तावित प्लांट के लिए चिह्नित भूमि को लेकर भी सवाल उठाए। ग्रामीणों के अनुसार, जिस प्लॉट संख्या 4168 पर कचरा पावर प्लांट प्रस्तावित है, वह वर्षों से स्थानीय लोगों के सामाजिक और धार्मिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि उक्त स्थल का उपयोग स्थानीय समुदाय विभिन्न सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए करता रहा है। इसके अलावा यह बच्चों के खेल-कूद के लिए भी महत्वपूर्ण मैदान है। ऐसे में इस जमीन पर स्थायी परियोजना स्थापित होने से ग्रामीणों की सामाजिक गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका है।

ग्रामीणों का कहना है कि भूमि के वर्तमान उपयोग और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किसी भी निर्माण कार्य का निर्णय लिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि यदि उक्त स्थल पर प्लांट का निर्माण किया जाता है, तो स्थानीय समुदाय के लिए उपलब्ध महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थान समाप्त हो जाएगा।

हाईकोर्ट में भूमि विवाद का मामला विचाराधीन होने का दावा

ग्रामीणों ने प्रस्तावित प्लांट की भूमि को लेकर न्यायिक विवाद का भी हवाला दिया। विजय सोय ने बताया कि प्लॉट संख्या 4168 की भूमि को लेकर स्थानीय निवासी मोशो हांसदा का मामला झारखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भूमि से संबंधित मामला न्यायालय में लंबित है, तब वहां निर्माण कार्य शुरू करने की कोशिश चिंता का विषय है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि पहले भूमि विवाद की वास्तविक स्थिति और न्यायालय में लंबित मामले की जानकारी स्पष्ट की जाए। इसके बाद ही किसी तरह की निर्माण गतिविधि को आगे बढ़ाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि विवादित भूमि पर निर्माण को लेकर जल्दबाजी करने के बजाय प्रशासन को सभी कानूनी और राजस्व दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि प्रस्तावित परियोजना से संबंधित भूमि की प्रकृति, स्वामित्व, उपयोग और न्यायिक स्थिति की विस्तृत जांच कराई जाए। इसके साथ ही स्थानीय ग्रामसभा की राय को भी निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाए।

जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने मानगो अंचल कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन के दौरान प्रशासन से प्रस्तावित कचरा पावर प्लांट की योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की। उनका कहना है कि क्षेत्र में पहले से बड़ी आबादी निवास करती है और ऐसी स्थिति में कचरा आधारित पावर प्लांट स्थापित करना स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

ग्रामीणों ने कहा कि परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव, जनस्वास्थ्य, जल स्रोतों और आसपास की आबादी पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कराया जाना चाहिए। साथ ही ग्रामसभा और स्थानीय निवासियों की आपत्तियों को भी गंभीरता से लिया जाए।

विरोध प्रदर्शन के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रशासन को अपनी मांग स्पष्ट कर दी है कि प्रस्तावित स्थल पर कचरा पावर प्लांट का निर्माण नहीं किया जाए। ग्रामीणों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर उचित पहल नहीं की गई, तो वे ग्रामसभा के माध्यम से आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास नहीं होना चाहिए जिसकी कीमत स्थानीय लोगों को अपने स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामुदायिक जमीन के नुकसान के रूप में चुकानी पड़े।