कुड़मालि भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज, पहल नहीं हुई तो महाआंदोलन : अजीत महतो

चांडिल में आदिवासी कुड़मि समाज का केंद्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन

Jamshedpur News: चांडिल थाना क्षेत्र के हुचुकडीह डोबो स्थित टिड़ुआर ढ़िंड़ा (कुड़मि भवन) में रविवार को आदिवासी कुड़मि समाज के केंद्रीय और प्रदेश संगठन का एक दिवसीय महत्वपूर्ण प्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष शशांक शेखर महतो ने की। बैठक में समाज की सामाजिक एवं भाषाई पहचान, आगामी जनगणना और कुड़मि समाज की लंबित मांगों को लेकर विस्तार से चर्चा की गयी। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आगामी जनगणना में कुड़मि समाज की सही जातीय एवं भाषाई पहचान सुनिश्चित करना रहा। प्रतिनिधियों ने कहा कि जनगणना के दौरान समाज की पहचान और भाषा का सही तरीके से दर्ज होना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए सामाजिक संगठनों को एकजुट होकर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।

20 सितंबर को महासंग्राम दिवस के रूप में मनाया जाएगा

समाज के संयोजक मुलखुंटि मूलमानता अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि इस वर्ष ऐतिहासिक रेल-टेका और डहर-छेंका कार्यक्रम की स्मृति में 20 सितंबर को महासंग्राम दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इसी अवसर पर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बराहबाजार स्थित कड़ाडीह मैदान में ‘करमतिया करम महाजड़ुआहि’ का आयोजन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम समेत विभिन्न राज्यों से कुड़मि समाज के सामाजिक एवं संगठनात्मक प्रतिनिधि शामिल होंगे। महाजड़ुआहि के माध्यम से समाज की विभिन्न मांगों को लेकर व्यापक चर्चा की जाएगी। अजीत महतो ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि समाज की आगामी रणनीति और संघर्ष की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। इसमें सामाजिक पहचान, अधिकारों और लंबित मांगों को लेकर आगे की आंदोलनात्मक रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

तीन महीने में कुड़मालि भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि 12 सितंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के दौरान कुड़मि समाज की मांगों को लेकर महत्वपूर्ण आश्वासन प्राप्त हुआ है। उनके अनुसार, तीन महीने के भीतर कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में पहल करने का आश्वासन दिया गया है। इसके अलावा अलग से कुड़मि धर्म-कोड की मांग पर भी सकारात्मक कदम उठाने की बात कही गयी है। उन्होंने कहा कि समाज सरकार को तीन महीने का समय दे रहा है। हालांकि जरूरत पड़ने पर छह महीने तक इंतजार किया जा सकता है। इसके बाद भी यदि सरकार की ओर से मांगों को लेकर सकारात्मक पहल नहीं की गयी, तो कुड़मि समाज पुनः बड़े आंदोलन की घोषणा करेगा।अजीत महतो ने कहा कि समाज अपने अधिकारों और पहचान से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से आवाज उठाता रहा है। अब समय आ गया है कि सभी सामाजिक संगठन आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर साझा मुद्दों पर एकजुट हों।

सरकार से वादे पूरा करने की मांग, आंदोलन की चेतावनी

केंद्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता सुनील कुमार गुलिआर ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की ओर से सरकार बनने के बाद कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का आश्वासन दिया गया था।
उन्होंने कहा कि कुड़मि समाज ने समर्थन देकर सरकार बनाने में अपनी भूमिका निभायी है। अब समाज अपने अधिकारों और मांगों को लेकर अधिक समय तक इंतजार करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपने वादे को पूरा करने की मांग की। सुनील कुमार गुलिआर ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी भी समाज की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार होती है। इसलिए कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग समाज के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में जल्द ठोस पहल करने की अपील की।

सामाजिक संगठनों से 20 सितंबर के कार्यक्रम में शामिल होने का आह्वान

सम्मेलन में अजीत महतो ने कुड़मि समाज के सभी सामाजिक संगठनों और लोगों से 20 सितंबर को प्रस्तावित करमतिया करम महाजड़ुआहि में बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज के सामने मौजूद चुनौतियों का सामना सामूहिक एकजुटता से ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर समाज के व्यापक हित में सभी संगठनों को एक मंच पर आना चाहिए। सम्मेलन में जनगणना के दौरान सही जातीय एवं भाषाई पहचान दर्ज कराने को लेकर भी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय उपाध्यक्ष छोटेलाल मुतरुआर, सशधर काड़ुआर, केंद्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता सुनील कुमार गुलिआर, केंद्रीय महासचिव जगेश्वर नागवंशी केसरिआर, केंद्रीय सह-सचिव जयराम हिंदइआर, दीपक पुनअरिआर, पद्मलोचन महतो, केंद्रीय महिला संयोजिका डॉ. कोनिका माहातो, गुणधाम मुतरुआर और ध्रुव चरण महतो सहित कई प्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।