Forest Rights Act 2006: पूर्वी सिंहभूम, घाटशिला, धालभूमगढ़, वन अधिकार समिति, विश्व आदिवासी दिवस, माझी परगाना माहाल, वन अधिकार दावा, झारखंड समाचार
पूर्वी सिंहभूम जिले में वन अधिकार अधिनियम के तहत पात्र लाभुकों को वन पट्टा नहीं मिलने का मामला अब आंदोलन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। पूर्वी सिंहभूम माझी परगाना माहाल घाटशिला ने उपायुक्त सह जिला स्तरीय वन अधिकार समिति के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर 27 पात्र दावेदारों को शीघ्र वन पट्टा प्रदान करने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि दावा आवेदन जमा किए एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यदि 9 अगस्त, विश्व आदिवासी दिवस तक वन पट्टा नहीं दिया गया तो 5 अगस्त को घाटशिला अनुमंडल कार्यालय के समक्ष पारंपरिक टामाक-तुमदाः के साथ एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
धालभूमगढ़ प्रखंड के 27 पात्र दावेदारों को वन पट्टा देने की मांग
माझी परगाना माहाल द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि धालभूमगढ़ प्रखंड के रूवाशोल सिलपहाड़ी, हरिनधुकड़ी और बांगरकोला गांवों के 23 वन अधिकार दावों के अलावा पलासबनी, काढ़ूवाकाटा और पानिजिया गांवों के चार अन्य पात्र दावेदारों सहित कुल 27 लोगों के आवेदन लंबित हैं। इन सभी दावेदारों ने अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत वन अधिकार प्राप्त करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करते हुए आवेदन जमा किया था। संगठन का कहना है कि सभी दावेदार पात्र हैं और नियमानुसार उन्हें वन पट्टा मिलना चाहिए, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक विलंब किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है।
एक वर्ष बाद भी नहीं मिली स्वीकृति, कारण भी नहीं बताया
ज्ञापन में कहा गया है कि दावा आवेदन जमा किए हुए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो वन पट्टा जारी किया गया और न ही लंबित रखने का कोई स्पष्ट कारण बताया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। माझी परगाना माहाल ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने से वन अधिकार कानून के उद्देश्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि पात्र आदिवासी और परम्परागत वन निवासी वर्षों से अपने अधिकार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
लगातार ज्ञापन देने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
संगठन ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर 27 जुलाई, 30 जुलाई और 1 अगस्त 2026 को भी संबंधित अधिकारियों को अलग-अलग ज्ञापन सौंपे गए थे। इसके बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई।
ज्ञापन में जिला प्रशासन से आग्रह किया गया है कि मामले की तत्काल समीक्षा कर सभी लंबित दावों का निपटारा किया जाए। संगठन का मानना है कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो ग्रामीणों का भरोसा प्रशासनिक व्यवस्था से उठ सकता है।
विश्व आदिवासी दिवस पर वन पट्टा देने की मांग
माझी परगाना माहाल ने मांग की है कि 9 अगस्त 2026 को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सभी 27 पात्र दावेदारों को वन पट्टा प्रदान किया जाए। संगठन का कहना है कि यह दिन आदिवासी समुदाय के अधिकारों और सम्मान का प्रतीक है, इसलिए इस अवसर पर वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित मामलों का समाधान किया जाना चाहिए।
संगठन का यह भी कहना है कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 का उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासियों को उनके वैधानिक अधिकार प्रदान करना है। ऐसे में पात्र लोगों को समय पर पट्टा उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
मांग पूरी नहीं हुई तो होगा धरना-प्रदर्शन
पूर्वी सिंहभूम माझी परगाना माहाल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 9 अगस्त तक वन पट्टा वितरण की दिशा में ठोस पहल नहीं होती है, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। इसकी शुरुआत घाटशिला अनुमंडल कार्यालय के समक्ष पारंपरिक टामाक-तुमदाः के साथ एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन से होगी।
संगठन का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा, जिसका उद्देश्य प्रशासन का ध्यान लंबित वन अधिकार दावों की ओर आकर्षित करना है। इस दौरान बहादुर सोरेन, सुधीर कुमार सोरेन, शंकर टुडू, श्यामपदो सोरेन, मोचीराम बास्के, निताई मुर्मू, किशुन मार्डी सहित कई ग्रामीण और संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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