जमशेदपुर समेत पूर्वी सिंहभूम में सामान्य से कम बारिश का असर
East Singhbhum Rain News: पूर्वी सिंहभूम जिले में इस वर्ष कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के अधिकांश जिलों की तरह यहां भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर खरीफ फसलों, विशेषकर धान की खेती पर पड़ रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 5 अगस्त तक झारखंड में सामान्य से 27 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। वहीं पूर्वी सिंहभूम में भी सामान्य से करीब 16 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। जिले में अब तक लगभग 506.7 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 600.6 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। यानी जिले में करीब 94 मिलीमीटर बारिश की कमी है। लगातार कम वर्षा के कारण खेतों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाया है, जिससे धान की रोपनी प्रभावित हो रही है। किसान अच्छी बारिश की उम्मीद में आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
झारखंड के 23 जिले वर्षा घाटे की चपेट में
मौसम विभाग के अनुसार झारखंड में इस बार मानसून अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका है। राज्य में 1 जून से 5 अगस्त तक कुल 408 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य वर्षा 559.8 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। इस तरह राज्य में 27 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। स्थिति यह है कि राज्य के 24 में से 23 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। केवल पश्चिमी सिंहभूम ऐसा जिला है, जहां सामान्य से लगभग 9 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। बाकी सभी जिलों में वर्षा का स्तर सामान्य से नीचे बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगस्त के शेष दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो इसका असर पूरे खरीफ सीजन पर दिखाई देगा। धान के अलावा मक्का, दलहन और अन्य फसलों की पैदावार भी प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।
धान की रोपनी प्रभावित, आधे से कम क्षेत्र में हुआ आच्छादन
कृषि विभाग के अनुसार पूर्वी सिंहभूम में अब तक धान की रोपनी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। जिले में अभी तक केवल लगभग 50 प्रतिशत धान क्षेत्र का ही आच्छादन हो पाया है। सामान्य परिस्थितियों में जुलाई और अगस्त का पहला पखवाड़ा धान की रोपनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। लेकिन इस बार पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई गांवों के खेत सूखे पड़े हैं। जल स्रोतों में पानी की कमी के कारण किसान सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं कर पा रहे हैं। कई स्थानों पर किसान रोपनी शुरू करने के बाद भी उसे पूरा नहीं कर सके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान बताते हैं कि यदि अगले कुछ दिनों में लगातार बारिश नहीं हुई तो धान की खेती पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इससे उत्पादन में कमी आने के साथ-साथ खेती की लागत भी बढ़ जाएगी।
अगले कुछ दिन होंगे निर्णायक, अच्छी बारिश की उम्मीद
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ फसलों को बचाने के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि मानसून सक्रिय होकर अच्छी बारिश करता है तो धान की रोपनी में तेजी आएगी और फसलों को राहत मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त महीने में पर्याप्त वर्षा होने पर खेतों में जलभराव की स्थिति बनेगी, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर होगी। वहीं यदि बारिश की कमी बनी रही तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा और किसानों की आय घट सकती है।हालांकि पूर्वी सिंहभूम की स्थिति कई अन्य जिलों की तुलना में कुछ बेहतर मानी जा रही है, लेकिन सामान्य से 16 प्रतिशत कम वर्षा भी कृषि के लिए चिंता का विषय है। मौसम विभाग की आगामी भविष्यवाणियों पर किसानों की निगाहें टिकी हुई हैं।
किसानों की बढ़ी चिंता, प्रशासन और कृषि विभाग की नजर
कम बारिश के कारण किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। कृषि विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसानों को मौसम के अनुसार खेती संबंधी सलाह दी जा रही है। जरूरत पड़ने पर सिंचाई के वैकल्पिक उपाय अपनाने और कम पानी वाली तकनीकों का उपयोग करने की भी सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगस्त के दूसरे पखवाड़े में अच्छी वर्षा हो जाती है तो फसलों को काफी हद तक बचाया जा सकता है। लेकिन यदि बारिश का सिलसिला कमजोर ही रहा तो धान उत्पादन में गिरावट के साथ किसानों की आमदनी पर भी असर पड़ना तय है। पूर्वी सिंहभूम सहित पूरे झारखंड के किसान अब अच्छी बारिश की उम्मीद में हैं। आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता ही यह तय करेगी कि खरीफ सीजन किसानों के लिए राहत लेकर आएगा या फिर मुश्किलें और बढ़ेंगी।

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