Jamshedpur News: जसकनडीह ग्रामप्रधान से अभद्रता का आरोप, पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग

जसकनडीह ग्रामप्रधान से अभद्रता का आरोप, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

Jamshedpur News: जमशेदपुर के परसुडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत जसकनडीह गांव में पारंपरिक ग्रामप्रधान के साथ कथित अभद्रता और धमकी का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है। इस घटना को लेकर ग्रामसभा ने जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करते हुए दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति के सम्मान का नहीं, बल्कि ग्रामसभा और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के सम्मान से भी जुड़ा हुआ है। बुधवार को पारंपरिक ग्रामप्रधान जगन्नाथ देवगम के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त (डीसी) और वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को लिखित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में घटना की निष्पक्ष जांच कराने तथा संबंधित पुलिसकर्मी पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

13 जुलाई की घटना का किया गया उल्लेख, पुलिसकर्मी पर गंभीर आरोप

ग्रामसभा द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, यह घटना 13 जुलाई की शाम लगभग चार बजे की है। आरोप है कि परसुडीह थाना में पदस्थापित पुलिसकर्मी मुकेश दुबे और उनके एक साथी ने ग्रामप्रधान जगन्नाथ देवगम को बुलनगोड़ा गांव के समीप बुलाया। वहां उनके साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया और गाली-गलौज करते हुए धमकियां दी गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिसकर्मी ने विवादित जमीन पर ग्रामसभा की ओर से लगाए गए बोर्ड को तत्काल हटाने का दबाव बनाया। इतना ही नहीं, उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि वे ग्रामसभा या पेसा कानून को नहीं मानते, क्योंकि पुलिस के पास असीमित अधिकार हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि बोर्ड नहीं हटाया गया तो ग्रामसभा के सदस्यों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराने की धमकी दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की भाषा और व्यवहार से न केवल ग्रामप्रधान का अपमान हुआ है, बल्कि पूरे गांव की भावनाएं भी आहत हुई हैं।

ग्रामप्रधान बोले- भूमि विवाद का समाधान प्रशासन करे, पुलिस नहीं

पारंपरिक ग्रामप्रधान जगन्नाथ देवगम ने कहा कि ग्रामसभा के सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और किसी एक व्यक्ति की इच्छा से कोई फैसला नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि को लेकर कई गंभीर विसंगतियां सामने आने के बाद ग्रामसभा ने वहां अपना बोर्ड लगाया था।
उन्होंने कहा कि भूमि विवाद पूरी तरह से जमशेदपुर अंचल कार्यालय के अधिकार क्षेत्र का विषय है। ऐसे मामलों का समाधान प्रशासनिक स्तर पर होना चाहिए, न कि पुलिस के दबाव या धमकी के माध्यम से। ग्रामप्रधान का कहना है कि यदि किसी पक्ष को आपत्ति है तो उसका समाधान विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित पुलिसकर्मी किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अपनी वर्दी का प्रभाव दिखा रहे हैं। हालांकि ग्रामसभा किसी भी प्रकार के दबाव में आने वाली नहीं है और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी।

पेसा कानून और ग्रामसभा के अधिकारों का उठाया गया मुद्दा

इस पूरे विवाद में ग्रामीणों ने पेसा कानून और ग्रामसभा के संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा को कई महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं और इन अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा ग्रामसभा के अधिकारों की अनदेखी की जाती है या पारंपरिक प्रतिनिधियों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है, तो इससे ग्रामीण समाज में असंतोष बढ़ता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि प्रशासन को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

20 जुलाई को अंचल कार्यालय के समक्ष धरना देने की चेतावनी

जसकनडीह ग्रामसभा ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि रविवार तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो 20 जुलाई को जमशेदपुर अंचल कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होगा, लेकिन अपनी मांगों से वे पीछे नहीं हटेंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में पारंपरिक ग्रामप्रधान जगन्नाथ देवगम के अलावा खुदीराम हांसदा, सुनील देवगम, डेमका सोय तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल थे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि ग्रामीणों का प्रशासन और कानून व्यवस्था पर विश्वास कायम रह सके। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए समय पर उचित कदम उठाएगा और ग्रामसभा तथा प्रशासन के बीच विश्वास और संवाद की परंपरा को मजबूत करेगा।

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