जमशेदपुर में डेंगू का पहला मामला: जीएनएम स्कूल की छात्रा संक्रमित, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

जिले में डेंगू की पहली पुष्टि, छात्रा का इलाज जारी

DENGU IN JAMSHEDPUR: जमशेदपुर जिले में इस वर्ष डेंगू का पहला मामला सामने आया है। इससे पहले जिले में मलेरिया के मामले बढ़ने की चर्चा थी, लेकिन अब डेंगू ने भी दस्तक दे दी है। डेंगू की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। संक्रमित छात्रा का इलाज एमजीएम अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों की निगरानी में उसकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। जानकारी के अनुसार, छात्रा साकची स्थित पुराने एमजीएम अस्पताल परिसर में संचालित जीएनएम स्कूल की छात्रा है। उसे पिछले दो दिनों से तेज बुखार और बदन दर्द की शिकायत थी। तबीयत अधिक खराब होने पर परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जांच के दौरान कार्ड टेस्ट में डेंगू पॉजिटिव पाया गया। अंतिम पुष्टि के लिए उसका रक्त नमूना एलाइजा जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया है।

बुखार और कमजोरी के बाद अस्पताल पहुंची छात्रा

परिजनों के अनुसार, छात्रा को पहले सामान्य बुखार समझकर दवा दी जा रही थी। लेकिन रविवार रात बुखार बढ़ गया और उसे काफी कमजोरी महसूस होने लगी। इसके बाद उसे एमजीएम अस्पताल लाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच की तो कार्ड टेस्ट में डेंगू की पुष्टि हुई। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार कार्ड टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद एलाइजा जांच की रिपोर्ट अलग भी हो सकती है। इसलिए अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह पुष्टि मानी जाएगी। फिलहाल छात्रा का इलाज जारी है और उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

स्कूल हॉस्टल के आसपास जलजमाव से बढ़ी चिंता

डेंगू का मामला सामने आने के बाद जीएनएम स्कूल के छात्रावास को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। स्कूल के हॉस्टल में करीब 120 छात्राएं रहती हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल परिसर के पास एमजीएम अस्पताल की नई इमारत का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण स्थल के आसपास कई जगह पानी जमा है। ऐसे स्थान मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माने जाते हैं। डेंगू की खबर मिलने के बाद छात्राओं और उनके अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने निर्माण स्थल पर जमा पानी हटाने और नियमित रूप से फॉगिंग कराने की मांग की है, ताकि मच्छरों का प्रकोप कम हो सके और बीमारी फैलने का खतरा घटे।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से बरतने को कहा सावधानी

डेंगू का पहला मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। अस्पतालों में डेंगू और मलेरिया के मरीजों के इलाज की तैयारी रखने को कहा गया है। इसके साथ ही घर-घर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपने घर और आसपास साफ-सफाई रखें। कहीं भी पानी जमा नहीं होने दें। कूलर, गमले, टायर और अन्य बर्तनों में जमा पानी समय-समय पर खाली करें। डॉक्टरों का कहना है कि तेज बुखार आने पर बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए। समय पर जांच और इलाज से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

क्या है डेंगू और इसके प्रमुख लक्षण

डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो एडीज मच्छर के काटने से फैलती है। यह मच्छर साफ पानी में पनपता है और दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है। डेंगू होने पर मरीज में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें तेज बुखार, सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, भूख कम लगना, उल्टी, पेट दर्द और त्वचा पर चकत्ते शामिल हैं। कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स भी कम हो सकते हैं। यदि तेज बुखार लगातार बना रहे या मरीज को अधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बिना सलाह के दवा लेने से बचना चाहिए।

डेंगू से बचाव के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

डेंगू से बचाव का सबसे आसान तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है। घर और आसपास कहीं भी पानी जमा नहीं होने दें। कूलर, बाल्टी, गमले और छत पर रखे बर्तनों का पानी नियमित रूप से बदलें। पूरी बांह के कपड़े पहनें और सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। खिड़की और दरवाजों पर जाली लगाने से भी मच्छरों को घर में आने से रोका जा सकता है। यदि घर या मोहल्ले में किसी को तेज बुखार हो तो उसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज कराएं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि लोगों की सतर्कता और साफ-सफाई से डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

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