लुपुगडीह के सबर टोला में बैठक, जमीन बचाने के लिए एकजुट हुआ समाज
Jamshedpur News: जमशेदपुर प्रखंड के हुरलुंग पंचायत अंतर्गत लुपुगडीह मौजा स्थित सबर टोला में सोमवार को आदिम जनजाति सबर समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य मुद्दा सबर परिवारों की रैयती जमीनों पर कथित अवैध कब्जे और उनसे जुड़े विवाद रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ दबंग और प्रभावशाली लोग उन्हें डरा-धमकाकर उनकी पुश्तैनी जमीनों से बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी आशंका और बढ़ती चिंता के बीच समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में बड़ी संख्या में सबर परिवारों के सदस्य शामिल हुए। उन्होंने एक स्वर में कहा कि यदि समय रहते इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में उनके सामने अपनी पुश्तैनी जमीन और अस्तित्व बचाने का संकट खड़ा हो सकता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप- धमकाकर छीनी जा रही है रैयती जमीन
बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिन जमीनों पर उनके परिवार पीढ़ियों से खेती करते आए हैं और जहां उनके घर बसे हैं, उन्हीं जमीनों पर अब कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि विरोध करने पर उन्हें डराया-धमकाया जाता है और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जाती है। ग्रामीणों ने कहा कि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर होने के कारण सबर परिवारों के लिए ऐसे दबाव का सामना करना आसान नहीं है। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के सामने उनकी आवाज कमजोर पड़ जाती है। यही कारण है कि अब उन्होंने सामूहिक रूप से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यह केवल भूमि का विवाद नहीं बल्कि उनके जीवन, आजीविका और भविष्य से जुड़ा सवाल है।
बैठक में उठे जमीन के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दे
बैठक के दौरान केवल भूमि विवाद ही नहीं, बल्कि सबर समाज की अन्य बुनियादी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, राशन, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ आज भी कई परिवारों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है। ग्रामीणों का कहना था कि आदिम जनजाति होने के बावजूद उन्हें कई सरकारी योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। बच्चों की शिक्षा, इलाज की सुविधा और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर बनी हुई है। उनका कहना है कि यदि जमीन भी चली गई तो उनके सामने जीवन-यापन का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
सबर समाज ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग की
बैठक में शामिल लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की कि भूमि विवाद की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार का अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे तत्काल हटाया जाए। ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि वे बिना किसी भय के अपनी बात प्रशासन के सामने रख सकें। सबर समाज का कहना है कि अनुसूचित जनजातियों की भूमि की सुरक्षा के लिए बने कानूनों का सख्ती से पालन होना चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले को संवेदनशीलता के साथ लेने की अपील की।
सुकलाल पहाड़िया ने कहा- भूमि विवाद आदिम जनजाति के अस्तित्व से जुड़ा मामला
बैठक में विशेष रूप से पहुंचे आदिम जनजाति समाज से जुड़े सुकलाल पहाड़िया ने ग्रामीणों की बातें सुनीं। उन्होंने कहा कि यदि किसी आदिम जनजाति परिवार की पुश्तैनी या रैयती जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश हो रही है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सबर समाज पहले से ही सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में यदि भूमि से भी उन्हें वंचित करने की कोशिश की जाती है तो इसका सीधा असर उनके जीवन और आजीविका पर पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर मामले का समाधान निकालने की मांग की। साथ ही कहा कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं होती है तो समाज लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने पर विचार करेगा।
ग्रामीण बोले- अब चुप नहीं रहेंगे, कानूनी तरीके से लड़ेंगे अपनी लड़ाई
बैठक में कई ग्रामीणों ने कहा कि अब तक वे विवादों से बचने के लिए चुप रहे, लेकिन लगातार बढ़ते दबाव के कारण अब उन्हें संगठित होना पड़ रहा है। उनका कहना है कि वे किसी तरह के टकराव के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि कानून और संविधान के दायरे में रहकर अपने अधिकारों की रक्षा चाहते हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि उनकी शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई होती है तो विवाद का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से निकल सकता है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि किसी भी निर्णय से पहले सभी पक्षों की बात सुनी जाए और राजस्व अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।
बैठक में बड़ी संख्या में सबर समाज के लोग रहे मौजूद
बैठक में गुरूदेव सबर, विराज सबर, गंगामुनी सबर, सावित्री सबर, संजय सबर, सुनील सबर, सुशील सबर, माधुरी सबर और छतर पहाड़िया सहित बड़ी संख्या में सबर समाज के लोग उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर प्रशासन से निष्पक्ष हस्तक्षेप की मांग दोहराई।
हालांकि, इस पूरे मामले में जिन लोगों पर जमीन कब्जाने के आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। अब इस मामले में जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर सबर परिवारों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भी नजर बनी हुई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आदिम जनजाति परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की भी गंभीर परीक्षा होगा।
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