Ghatshila News: कृषि कार्यों में महिलाओं की भागीदारी को और अधिक प्रभावी, सुरक्षित तथा लाभकारी बनाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), पूर्वी सिंहभूम द्वारा घाटशिला स्थित परिसर में महिला किसान गोष्ठी एवं महिला अनुकूल कृषि यंत्र जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के उपायुक्त राजीव रंजन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, महिला अनुकूल कृषि यंत्रों के उपयोग, प्राकृतिक खेती तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आई महिला किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
महिला किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विज्ञान केन्द्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. सीमा सिंह के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र जिले के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने केन्द्र द्वारा संचालित प्राकृतिक खेती, मशरूम उत्पादन, पोषण वाटिका, उद्यानिकी, मिलेट्स (श्री अन्न) की खेती तथा महिला सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिला किसानों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाकर कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।
महिला अनुकूल कृषि यंत्रों से घटेगा श्रम, बढ़ेगी आय : उपायुक्त
मुख्य अतिथि उपायुक्त राजीव रंजन ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि उन्हें आधुनिक एवं महिला अनुकूल कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएं तो उनका शारीरिक श्रम कम होगा, कार्य की गति और गुणवत्ता बढ़ेगी तथा उनकी आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि आज बदलते समय में कृषि को तकनीक से जोड़ना आवश्यक है ताकि कम समय और कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके। उपायुक्त ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए किसानों से धान के साथ-साथ श्री अन्न (मिलेट्स) और अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक महिला किसानों तक पहुंचाया जाना चाहिए ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके।
एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों से बढ़ेगी आमदनी
उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान ने महिला किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं से स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से जुड़कर मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्यम शुरू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से बाजार तक बेहतर पहुंच बनेगी और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से परिवार के साथ-साथ गांवों का भी समग्र विकास संभव होगा। इसलिए प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए।
कृषि यंत्रों का हुआ प्रदर्शन, बीज और उपकरण भी बांटे गए
कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने महिला अनुकूल कृषि यंत्रों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। महिला किसानों को निराई-गुड़ाई, बुवाई, कटाई और अन्य कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले आधुनिक उपकरणों की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने इन यंत्रों के सुरक्षित संचालन, रखरखाव और उपयोग की विधि भी विस्तार से समझाई। इसके अलावा महिला किसानों के बीच उन्नत किस्म के बीज और कृषि यंत्रों का वितरण भी किया गया। किसानों ने इन उपकरणों के बारे में वैज्ञानिकों से कई सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने सरल और व्यावहारिक तरीके से समाधान किया। इस दौरान प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, जलवायु अनुकूल खेती, पोषण सुरक्षा और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
बड़ी संख्या में शामिल हुईं महिला किसान
इस कार्यक्रम में अपर उपायुक्त अनुराग तिवारी, अनुमंडल पदाधिकारी घाटशिला सहित कई प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद रहे। कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों, विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों और जिले के अलग-अलग प्रखंडों से आई बड़ी संख्या में महिला किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कृषि यंत्रों की जानकारी देना नहीं था, बल्कि महिलाओं को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और सरकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महिला किसानों तक आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण नियमित रूप से पहुंचता रहा, तो पूर्वी सिंहभूम में कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं की आय और आत्मनिर्भरता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
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