आठ वर्षों तक डायन बताकर किया गया मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न
Jamshedpur News: जमशेदपुर के परसुडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत उत्तरी सरजामदा पंचायत के निदिर टोला में एक महिला को पिछले आठ वर्षों से डायन बताकर लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता पेंड्री सांडिल को गांव के कुछ लोगों द्वारा अंधविश्वास के आधार पर निशाना बनाया जाता था। आरोप है कि महिला के साथ कई बार मारपीट की गई, उसे अपमानित किया गया और जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। लंबे समय तक भय और सामाजिक दबाव में रहने के बावजूद महिला ने हार नहीं मानी और आखिरकार न्याय की उम्मीद में सामाजिक नेतृत्व से मदद मांगी। इस मामले ने एक बार फिर समाज में अब भी मौजूद डायन प्रथा जैसी कुप्रथा और अंधविश्वास पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
माझी, मुखिया और जिला परिषद सदस्य की पहल पर बुलाई गई बैठक
पीड़िता की शिकायत मिलने के बाद माझी बाबा बाघराय किस्कू, उत्तरी सरजामदा पंचायत की मुखिया सुमी केराई तथा जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति ने मामले को गंभीरता से लिया। गांव में बढ़ते विवाद को देखते हुए दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर समाधान निकालने की पहल की गई। बैठक में गांव के गणमान्य लोग और सामाजिक प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस दौरान पीड़िता ने अपने साथ हुए आठ वर्षों के उत्पीड़न की पूरी जानकारी दी। दूसरी ओर आरोपित परिवारों को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। सामाजिक स्तर पर विवाद सुलझाने की इस पहल का उद्देश्य गांव में शांति और सौहार्द बनाए रखना था, साथ ही पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता रही।
आरोपी परिवारों ने स्वीकार की गलती, भविष्य में प्रताड़ना नहीं देने का दिया भरोसा
बैठक के दौरान जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति ने आरोपित परिवारों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि किसी भी महिला को डायन बताकर प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है। उन्होंने कहा कि किसी के साथ अंधविश्वास के आधार पर हिंसा या सामाजिक बहिष्कार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सामाजिक दबाव और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी के बाद आरोपित परिवारों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। उन्होंने लिखित और मौखिक रूप से आश्वासन दिया कि भविष्य में पीड़िता के साथ किसी भी प्रकार की मारपीट, धमकी या दुर्व्यवहार नहीं किया जाएगा। इस समझौते के बाद गांव में फिलहाल तनाव कम हुआ और पीड़िता ने भी राहत की सांस ली।
कुसुम पूर्ति ने कहा- डायन प्रताड़ना कानूनन अपराध, दोषियों को होगी जेल
जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति ने बैठक के बाद कहा कि झारखंड में डायन प्रथा के नाम पर महिलाओं को प्रताड़ित करना पूरी तरह गैरकानूनी है। यदि भविष्य में पीड़िता के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा या प्रताड़ना की घटना दोबारा सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि किसी भी महिला के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। उन्होंने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि कानून अपने हाथ में लेने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे मामलों में सीधे जेल भेजने की अनुशंसा की जाएगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अंधविश्वास समाज के लिए अभिशाप, जागरूकता ही सबसे बड़ा समाधान
कुसुम पूर्ति ने कहा कि आज विज्ञान और तकनीक के युग में भी समाज के कुछ हिस्सों में डायन प्रथा जैसी कुप्रथाएं जीवित हैं, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बीमारी, पारिवारिक विवाद या अन्य घटनाओं का दोष किसी महिला पर मढ़कर उसे डायन घोषित करना अमानवीय और असंवैधानिक है। इस तरह की सोच समाज को पीछे धकेलती है और कई निर्दोष महिलाओं का जीवन बर्बाद कर देती है। उन्होंने कहा कि अंधविश्वास के कारण कई बार हत्या जैसी घटनाएं भी हो जाती हैं। इसलिए समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं को आगे आकर ऐसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही समाज को इस बुराई से मुक्त कराया जा सकता है।
समाज को मिला सकारात्मक संदेश, महिला सुरक्षा पर दिया गया जोर
निदिर टोला में हुई यह बैठक केवल एक विवाद का समाधान नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश भी है। सामाजिक नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों की पहल से वर्षों पुराना विवाद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा और पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी महिला को अंधविश्वास के आधार पर प्रताड़ित करना स्वीकार्य नहीं होगा। गांव के लोगों ने भी भविष्य में ऐसे मामलों को बढ़ावा नहीं देने और आपसी भाईचारे के साथ रहने का संकल्प लिया। इस पहल से यह संदेश गया कि यदि समाज जागरूक हो और कानून का सम्मान करे, तो डायन प्रथा जैसी कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान अधिकार सुनिश्चित करना ही एक सभ्य और प्रगतिशील समाज की पहचान है।
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