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हुल दिवस 2026: गोड़गोड़ा आदिवासी हाट बाजार में शहीदों को श्रद्धांजलि, जल-जंगल-जमीन बचाने का लिया संकल्प

Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम के गोड़गोड़ा (बालीगुमा) स्थित आदिवासी हाट बाजार में मंगलवार को आदिवासी बाजार समिति की ओर से हुल दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान संताल हुल के महानायक सिदो-कान्हू, चाँद-भैरो, फूलो-झानो और अन्य शहीदों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत श्रद्धांजलि सभा से हुई। उपस्थित लोगों ने हुल आंदोलन के वीरों के संघर्ष और बलिदान को याद किया। लोगों ने कहा कि यह दिन केवल इतिहास याद करने का नहीं बल्कि अपने अधिकारों और पहचान को समझने का भी दिन है।

संताल हुल को बताया जन आंदोलन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यावरण कार्यकर्ता मदन मोहन सोरेन ने कहा कि संताल हुल केवल एक विद्रोह नहीं था बल्कि यह शोषण और अन्याय के खिलाफ बड़ा जन आंदोलन था। उस समय लोगों ने अंग्रेजी शासन और अन्य अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने कहा कि हुल के वीरों ने कभी गुलामी स्वीकार नहीं की। अपने समाज, संस्कृति और जमीन को बचाने के लिए लोगों ने संघर्ष किया और जरूरत पड़ने पर अपने प्राण भी दिए। आज भी यह आंदोलन लोगों को अपने अधिकारों के लिए जागरूक करता है।

जल, जंगल और जमीन की रक्षा पर दिया जोर

अपने संबोधन में मदन मोहन सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज का जीवन जल, जंगल और जमीन से जुड़ा हुआ है। इसलिए इनकी सुरक्षा सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी), संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी) और वन अधिकार अधिनियम 2006 को सही तरीके से लागू करने की जरूरत है। इससे स्थानीय लोगों के अधिकार मजबूत होंगे और उनकी जमीन सुरक्षित रहेगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए ग्राम सभाओं को मजबूत करना जरूरी है।

ग्राम सभा और पारंपरिक व्यवस्था को मजबूत करने की मांग

मदन मोहन सोरेन ने कहा कि पाँचवीं अनुसूची, समता फैसला और पारंपरिक आदिवासी व्यवस्था को आधार बनाकर जन-अधिकार की मजबूत नीति बनाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर फैसले लेने की ताकत बढ़े तो लोगों को अपने संसाधनों की रक्षा करने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास और लोगों के अधिकार साथ-साथ चलने चाहिए।

सरकारी नीतियों पर उठाए सवाल

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि अब तक कई सरकारी नीतियों में आम लोगों की अपेक्षा बड़े उद्योगों और कॉरपोरेट हितों को अधिक महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि जरूरत इस बात की है कि ऐसी नीतियाँ बनाई जाएँ जिनसे स्थानीय लोगों का हित सुरक्षित हो। लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए आगे आना चाहिए और संगठित रहना चाहिए।

बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल

कार्यक्रम में सनातन टुडू, राखल सोरेन, पप्पू सोरेन, सुशांत सोरेन, सोनाराम टुडू, लोखीन नाथ, लुथु हो, नकुल टुडू, सूरज पूर्ति, सुमन हेम्ब्रम, नवीन हेम्ब्रम, संतोष कर्माकर, सुमित कर्माकर, लालमोहन हेम्ब्रम, दुबराज हेम्ब्रम सहित कई लोग मौजूद रहे। अंत में सभी ने संताल हुल के शहीदों को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने और समाज, संस्कृति तथा अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूक रहने का संकल्प लिया।

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