Jamshedpur News : मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की राशि बैंक खातों में ट्रांसफर न होने से नाराज सैकड़ों महिलाओं का गुस्सा सोमवार को फूट पड़ा। सही जानकारी के अभाव में परेशान महिलाएं बड़ी संख्या में सीधे जमशेदपुर अंचल कार्यालय (सीओ ऑफिस) पहुंच गईं, जिसके बाद वहां अचानक अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। अंचल कार्यालय परिसर में उमड़ी इस भारी भीड़ ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। महिलाओं का आरोप है कि इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर उन्हें जमीनी स्तर पर कोई सही और सटीक जानकारी नहीं दी जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हंगामा बढ़ता देख प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए तुरंत पुलिस बल को मोर्चा संभालना पड़ा।
खाते में राशि नहीं आने से बढ़ा महिलाओं का आक्रोश
मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत वित्तीय लाभ से वंचित महिलाओं का सब्र सोमवार को पूरी तरह टूट गया। जमशेदपुर और उसके आस-पास के इलाकों से आईं सैकड़ों महिलाओं ने अंचल कार्यालय का घेराव कर दिया। प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना था कि योजना की घोषणा और औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद महीनों से उनके बैंक खातों में सहायता राशि नहीं पहुंची है। शुरुआती किस्तों से वंचित रहने के कारण लाभार्थियों के बीच नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। अंचल कार्यालय पहुंची महिलाओं ने अपनी पासबुक और आवेदन की कॉपियां दिखाते हुए अधिकारियों से तुरंत जवाब देने और तकनीकी समस्याओं को दूर करने की मांग की।
सूचना के अभाव में लाभार्थियों में ऊहापोह की स्थिति, नाम कटने का सता रहा डर
संवाददाता सम्मेलन और कार्यालय परिसर में मौजूद महिलाओं से बातचीत में यह बात सामने आई कि इस पूरी अव्यवस्था की मुख्य वजह सूचना तंत्र का पूरी तरह ठप होना है। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें योजना के स्टेटस या राशि अटकने के कारणों के संबंध में कहीं भी सही और पारदर्शी जानकारी नहीं मिल पा रही है। प्रज्ञा केंद्रों और स्थानीय स्तर पर कोई स्पष्ट जवाब न मिलने के कारण उनके बीच ऊहापोह (असमंजस) की स्थिति बनी हुई है। इसी सूचना के अभाव में अब लाभार्थियों के बीच यह डर भी गहराने लगा है कि कहीं उनका नाम इस जनकल्याणकारी योजना की आधिकारिक सूची से हमेशा के लिए काट तो नहीं दिया गया है। इसी डर और आशंका के कारण महिलाएं घर का काम छोड़कर दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
भीड़ बेकाबू, अंचल कार्यालय का मेन गेट किया बंद
जैसे-जैसे दिन ढलता गया, अंचल कार्यालय परिसर में महिलाओं की तादाद लगातार बढ़ती चली गई। देखते ही देखते पूरा अंचल परिसर छावनी में तब्दील हो गया और महिलाओं के तीखे सवालों के सामने दफ्तर के कर्मचारी असहाय नजर आने लगे। भीड़ और हंगामे की स्थिति को बेकाबू होते देख अंचल प्रशासन ने तुरंत स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंचे पुलिस बल ने मुस्तैदी दिखाते हुए अंचल कार्यालय के भीतर मौजूद महिलाओं को धीरे-धीरे परिसर से बाहर निकाला। स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने अंचल कार्यालय के मुख्य गेट (मेन गेट) को पूरी तरह से बंद कर दिया।
मची अफरा-तफरी, घंटों गेट के बाहर डटी रहीं महिलाएं
पुलिस द्वारा मुख्य गेट बंद किए जाने और महिलाओं को बाहर खदेड़े जाने के दौरान अंचल कार्यालय के बाहर कुछ देर के लिए भारी अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल बन गया। प्रशासन की इस अचानक की गई कार्रवाई से महिलाओं में रोष और बढ़ गया। हालांकि, पुलिस की सख्त नाकेबंदी के बावजूद महिलाओं का हौसला नहीं डिगा। योजना से जुड़ी आवश्यक जानकारी पाने और अपनी शिकायत दर्ज कराने की उम्मीद में बड़ी संख्या में महिलाएं चिलचिलाती धूप के बावजूद घंटों अंचल कार्यालय के बंद गेट के बाहर डटी रहीं और अपनी बारी का इंतजार करती रहीं।
डोर-टू-डोर सत्यापन का कार्य जारी, फिर भी अंचल में जुट रही भीड़
सीओ मनोज कुमार ने बताया कि अंचल कार्यालय में इन दिनों अनावश्यक रूप से भारी भीड़ जुट रही है, जिससे विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है। हम लगातार महिलाओं को समझाने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें मना किया जा रहा है कि वे दफ्तरों के चक्कर न लगाएं। वर्तमान में योजना के तहत डोर-टू-डोर भौतिक सत्यापन का कार्य विभागीय स्तर पर किया जा रहा है। सीओ ने आगे स्वीकार किया कि इसके बावजूद कार्यालय में महिलाओं की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। हर दिन इतनी अत्यधिक संख्या में महिलाएं सीधे सवाल-जवाब करने आ जा रही हैं कि अंचल के सीमित कर्मचारियों के लिए उन सभी को व्यक्तिगत रूप से जवाब देना बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
मंईयां सम्मान योजना में पारदर्शिता व बेहतर सूचना तंत्र की आवश्यकता
जमशेदपुर अंचल कार्यालय में सोमवार को हुई यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकारी योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन के लिए एक मजबूत और पारदर्शी सूचना तंत्र का होना कितना अनिवार्य है। यदि प्रशासन डिजिटल माध्यमों, पंचायतों या स्थानीय स्तर पर कैंप लगाकर महिलाओं को उनके आवेदनों की वर्तमान स्थिति से अवगत करा देता, तो अंचल कार्यालय में ऐसी अप्रिय स्थिति और अफरा-तफरी से आसानी से बचा जा सकता था। अब देखना यह होगा कि इस घटना से सबक लेकर क्या स्थानीय प्रशासन भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया में तेजी लाता है और लाभार्थियों के लिए शिकायत निवारण की कोई सरल व सुलभ व्यवस्था तैयार करता है या नहीं।
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