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Birsa Munda Shahadat Diwas: बिरसा नगर में वीर बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि, समाज की एकता और अधिकारों की रक्षा का लिया संकल्प

Jamshedpur News: जमशेदपुर के बिरसानगर में सोमवार को बिरसा सेवा दल पंचायत समिति एवं विकास स्वावलंबी समिति के संयुक्त तत्वावधान में महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी जननायक बिरसा मुंडा का शहादत दिवस श्रद्धा, सम्मान और संकल्प के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, ग्राम सभा प्रतिनिधियों तथा आदिवासी समाज के लोगों ने एकत्रित होकर वीर बिरसा मुंडा के संघर्षों और बलिदान को याद किया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को बिरसा मुंडा के विचारों, संघर्षों और सामाजिक चेतना से परिचित कराना था, ताकि उनके आदर्शों को समाज में आगे बढ़ाया जा सके।

माल्यार्पण कर दी गई श्रद्धांजलि

कार्यक्रम की शुरुआत वीर बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा ने अपने अल्प जीवनकाल में आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए जो संघर्ष किया, वह भारतीय इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। उन्होंने अंग्रेजी शासन, जमींदारी शोषण और सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की तथा समाज को आत्मसम्मान और स्वाभिमान के साथ जीने की प्रेरणा दी। उनके बलिदान और संघर्ष की गाथा आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती है।

प्रकाश कोया ने युवाओं को दिया जागरूकता का संदेश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रकाश कोया ने कहा कि वीर बिरसा मुंडा केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने जिस साहस और दृढ़ता के साथ अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया, वह आज के युवाओं के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा को प्राथमिकता देने, अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने तथा सामाजिक एकता को मजबूत करने का आह्वान किया। प्रकाश कोया ने कहा कि समाज तभी मजबूत होगा जब युवा जागरूक होकर अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझेंगे। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

अमूल्यो कर्मकार ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा पर दिया जोर

अमूल्यो कर्मकार ने अपने संबोधन में कहा कि वीर बिरसा मुंडा का जीवन संघर्ष, त्याग और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका आंदोलन केवल आदिवासी समाज तक सीमित नहीं था, बल्कि समाज के सभी शोषित और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई भी था। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बिरसा मुंडा के विचारों की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। समाज को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर सामाजिक न्याय, समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने लोगों से समाज के विकास, युवाओं के उत्थान और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

विभिन्न समाजों और संगठनों की रही सक्रिय भागीदारी

शहादत दिवस कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों और समुदायों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। इस अवसर पर अमूल्यो कर्मकार, प्रकाश कोया, संतोष सांड़िल, रोनाल्ड, मोहन कर्मकार, शीतल दास, जय सिंह मुंडा, दशरथ मुंडा, उपेन्द्र बांद्रा, राजू कर्मकार, बी.एन. पातर, लेम्बू गोस्वामी, डेविड नाथन, रंजीत गोप, मनोज मुखी, शंकर कर्मकार और रुपेश मुखी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। इसके अलावा उरांव समाज, मुंडा समाज, संथाल समाज, मुखी समाज, हो समाज तथा ग्राम सभा बिरसा नगर के प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में शामिल होकर वीर बिरसा मुंडा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उपस्थित लोगों ने समाज में एकता, सहयोग और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प भी लिया।

बिरसा मुंडा के आदर्श आज भी हैं प्रासंगिक

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब वीर बिरसा मुंडा के विचार और संघर्ष पहले से अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने लोगों से उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन हमें सिखाता है कि संगठित होकर और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ किसी भी अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया जा सकता है। उनके बलिदान और योगदान को याद रखना तथा उनकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज का नैतिक दायित्व है। कार्यक्रम राष्ट्रगान और सामूहिक संकल्प के साथ संपन्न हुआ, जिसमें उपस्थित लोगों ने समाज के विकास और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।

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