Jamshedpur News:आदिवासी समाज के शैक्षणिक विकास और संताली भाषा के संरक्षण की दिशा में कार्यरत आदिवासी सोशियों एजुकेशनल एण्ड कल्चरल एसोसिएशन (ASECA), झारखंड द्वारा संचालित "बोर्ड ऑफ संताली एजुकेशन" की ग्रीष्मकालीन सत्र 2026 की परीक्षा 6 जून से प्रारंभ हो रही है। यह परीक्षा तीन दिनों तक आयोजित की जाएगी, जिसमें झारखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी भाग लेंगे। बोर्ड द्वारा परीक्षा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
NIOS की तर्ज पर संचालित होती है परीक्षा व्यवस्था
बोर्ड ऑफ संताली एजुकेशन एक स्वतंत्र शैक्षणिक इकाई के रूप में कार्य करता है और इसकी परीक्षा प्रणाली भारत सरकार के राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) की तर्ज पर संचालित की जाती है। विद्यार्थियों को शिक्षा का वैकल्पिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह बोर्ड प्रत्येक वर्ष दो बार परीक्षा आयोजित करता है। पहली परीक्षा जून माह में ग्रीष्मकालीन सत्र के तहत तथा दूसरी परीक्षा दिसंबर माह में शीतकालीन सत्र के रूप में आयोजित की जाती है।इस व्यवस्था से उन विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलता है जो किसी कारणवश नियमित विद्यालयी शिक्षा से जुड़ नहीं पाते हैं या अपनी मातृभाषा संताली में शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।
चार संकायों में आयोजित होती है परीक्षा
बोर्ड ऑफ संताली एजुकेशन के अंतर्गत वर्तमान में चार प्रमुख स्तरों की परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। इनमें लोअर, हायर, मैट्रिक तथा 10+2 (कला) शामिल हैं। लोअर परीक्षा को पांचवीं कक्षा के समकक्ष माना जाता है, जबकि हायर परीक्षा छठी कक्षा के समकक्ष है। इसके अलावा मैट्रिक और इंटरमीडिएट (कला) स्तर की परीक्षाएं भी आयोजित की जाती हैं। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को संताली भाषा और संस्कृति से जुड़े रहते हुए औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। वर्षों से यह बोर्ड आदिवासी समुदाय के बीच शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और दूर-दराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शैक्षणिक मंच प्रदान कर रहा है।
भीषण गर्मी का असर, फिर भी उत्साह बरकरार
इस वर्ष आयोजित हो रही ग्रीष्मकालीन परीक्षा पर भीषण गर्मी का असर देखने को मिला है। बोर्ड के अनुसार पिछले सत्रों की तुलना में इस बार परीक्षार्थियों की संख्या कुछ कम दर्ज की गई है। अत्यधिक तापमान और गर्म मौसम के कारण कई विद्यार्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सके हैं। इसके बावजूद विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच परीक्षा को लेकर उत्साह बना हुआ है। बोर्ड के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि आने वाले सत्रों में विद्यार्थियों की संख्या में और वृद्धि होगी। परीक्षा केंद्रों पर गर्मी को ध्यान में रखते हुए पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
महिला परीक्षार्थियों की भागीदारी बनी प्रेरणादायक
इस बार की परीक्षा का सबसे सकारात्मक पहलू महिला परीक्षार्थियों की उल्लेखनीय भागीदारी है। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार छात्राओं और महिलाओं ने बड़ी संख्या में परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया है, जो आदिवासी समाज में बढ़ती शैक्षणिक जागरूकता का संकेत है। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वर्षों से किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगा है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की महिलाएं शिक्षा के महत्व को समझते हुए आगे बढ़ रही हैं और विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं। यह बदलाव समाज के समग्र विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
झारखंड के तीन जिलों के 10 केंद्रों पर होगी परीक्षा
ग्रीष्मकालीन सत्र 2026 की परीक्षा झारखंड के विभिन्न जिलों में स्थापित 10 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से धनबाद, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम जिले शामिल हैं। इन केंद्रों पर करीब 2000 विद्यार्थी परीक्षा में भाग लेंगे। बोर्ड प्रशासन ने सभी परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र, उत्तरपुस्तिका, निरीक्षक और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है। परीक्षा को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष निगरानी की व्यवस्था भी की गई है। आसेका झारखंड के पदाधिकारियों ने सभी परीक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा ही समाज के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। संताली भाषा और संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में बोर्ड ऑफ संताली एजुकेशन निरंतर कार्य करता रहेगा।
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