सरायकेला में उपायुक्त से मिला सेंगेल अभियान का प्रतिनिधिमंडल
Saraikela News: आदिवासी सेंगेल अभियान के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को सरायकेला-खरसावां जिला उपायुक्त से मुलाकात कर पी एम श्री उत्क्रमित उच्च विद्यालय भदुरुडीह की कक्षा 10वीं की नाबालिग छात्रा ज्योतिका मुर्मू के मामले में हस्तक्षेप की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि छात्रा की मांग में जबरन सिंदूर लगाने की घटना को गंभीरता से नहीं लिया गया और स्थानीय थाना स्तर पर इसे सामाजिक मामला बताकर टालने का प्रयास किया गया। संगठन ने मामले को मानवाधिकार और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर अपराध बताया है।
स्कूल से लौटने के दौरान हुई घटना
ज्ञापन के अनुसार ज्योतिका मुर्मू, उम्र लगभग 15-16 वर्ष, ग्राम बैष्टमसाई निवासी है और पी एम श्री उत्क्रमित उच्च विद्यालय भदुरुडीह में अध्ययनरत है। बताया गया कि 11 नवंबर 2025 को विद्यालय की छुट्टी के बाद वह अपनी दो सहेलियों और एक छात्र के साथ साइकिल से घर लौट रही थी। इसी दौरान सिरयापोस गांव के पास विपरीत दिशा से मोटरसाइकिल पर सवार होकर तीन युवक पहुंचे। आरोप है कि दो युवकों ने साथ चल रहे छात्र को डरा-धमकाकर वहां से भगा दिया, जबकि आशीष मार्डी नामक युवक ने छात्रा की मांग में जबरन सिंदूर लगा दिया और इसके बाद तीनों युवक मोटरसाइकिल से फरार हो गए।
सेंगेल अभियान ने बताया मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
सेंगेल अभियान के नेताओं ने कहा कि संताल समाज में पूर्व समय में ऐसी रूढ़ि प्रथा प्रचलित थी, जिसमें किसी अविवाहित महिला की मांग में सिंदूर भर देने पर उसे पत्नी के रूप में स्वीकार करने का दबाव बनाया जाता था। हालांकि स्वतंत्र भारत में संविधान लागू होने के बाद ऐसी परंपराओं को अमान्य माना गया है। संगठन का कहना है कि किसी नाबालिग छात्रा की मांग में जबरन सिंदूर लगाना केवल सामाजिक मुद्दा नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना से छात्रा के सम्मान, स्वतंत्रता और मर्यादा के साथ जीने के अधिकार पर सीधा हमला हुआ है।
थाना पर लापरवाही का आरोप, सामाजिक समझौते पर उठे सवाल
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि जब पीड़िता और उसके परिवार ने मामले की लिखित शिकायत सरायकेला थाना में की तो थाना प्रभारी ने इसे सामाजिक मामला बताते हुए समाज के स्तर पर समाधान करने की सलाह दी। संगठन का आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता के कारण बाद में बैष्टामसाई ग्राम माझी सुनाराम मुर्मू और आम्लाटोला ग्राम माझी दसमत टुडू द्वारा सामाजिक दंड के नाम पर आरोपी पक्ष से खस्सी, 40 किलो चावल, सरसों तेल, मसाला और अन्य सामान लेकर समझौता कर लिया गया। सेंगेल अभियान ने इसे संविधान, कानून और मानवाधिकारों के विरुद्ध बताया है।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। संगठन का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो समाज में गलत परंपराओं और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को बढ़ावा मिलेगा। सेंगेल अभियान ने प्रशासन से मांग की कि नाबालिग छात्रा को न्याय दिलाने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
समाज में जागरूकता और शिक्षा की जरूरत
आज का समाज शिक्षा, जागरूकता और आधुनिक सोच की ओर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद जबरन किसी लड़की की मांग में सिंदूर डालने जैसी घटनाएं सामने आना बेहद चिंताजनक है। यह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं बल्कि महिला सम्मान और व्यक्तिगत अधिकारों पर सीधा हमला है। किसी भी लड़की की इच्छा के विरुद्ध इस तरह का कृत्य मानसिक प्रताड़ना और सामाजिक दबाव पैदा करता है। शिक्षित समाज में ऐसी मानसिकता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। समाज के सभी वर्गों को मिलकर महिलाओं के सम्मान, स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।
स्वशासन व्यवस्था अगुआ को ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना चाहिए
ग्राम प्रधान, माझी बाबा, परगना और स्वशासन व्यवस्था से जुड़े सामाजिक नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि वे समाज में फैली ऐसी कुप्रथाओं पर सख्ती से रोक लगाने का प्रयास करें। सामाजिक मामलों के नाम पर अपराधों को नजरअंदाज करना भविष्य में और गंभीर घटनाओं को जन्म दे सकता है। समाज के पारंपरिक नेतृत्व को चाहिए कि वे लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाएं और यह संदेश दें कि किसी भी महिला या लड़की की इच्छा सर्वोपरि है। बदलते समय के साथ सामाजिक सोच में भी बदलाव जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ी सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अधिकारों वाले वातावरण में जीवन जी सके।
ज्ञापन सौंपने वालों में कई पदाधिकारी रहे शामिल
जिला उपायुक्त एवं जिला पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में सेंगेल दिशोम परगना सोनाराम सोरेन, सेंगेल झारखंड पोनोत परगना जूनियर मुर्मू, सेंगेल महिला मोर्चा अध्यक्ष श्रीमती हेम्ब्रोम, धानो सोरेन, छोटा दावना पंचायत सेंगेल परगना बागुन टुडू तथा सरायकेला प्रखंड परगना हाडिया सोरेन समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।
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