Jamshedpur news : ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। गुरुवार, 7 मई 2026 को केरूआडूंगरी पंचायत के तालसा गांव में सोरा एवं सोहराय प्रिंटिंग ट्रेनिंग सेंटर का भव्य उद्घाटन हुआ। यह केंद्र न केवल आदिवासी कला को जीवित रखने का माध्यम बनेगा, बल्कि स्थानीय महिलाओं और युवाओं के लिए आर्थिक स्वावलंबन के नए द्वार भी खोलेगा। यह केंद्र केरूआडूंगरी पंचायत के मुखिया कान्हू मुर्मू की विशेष पहल और 'अबीरा' संस्था के तकनीकी सहयोग से स्थापित किया गया है।




पारंपरिक कला को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल
आदिवासी समाज की सोरा और सोहराय कला सदियों से दीवारों और कपड़ों पर अपनी सुंदरता बिखेरती आई है। अब इस कला को व्यावसायिक रूप देने के लिए तालसा गांव में प्रशिक्षण केंद्र खोला गया है। उद्घाटन समारोह के दौरान मुखिया कान्हू मुर्मू ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं और महिलाओं के हुनर को निखारना है। इस ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से ग्रामीण अब आधुनिक प्रिंटिंग तकनीकों को सीखेंगे, जिससे उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की मांग बाजारों में बढ़ेगी और उन्हें घर बैठे रोजगार प्राप्त हो सकेगा।


'अबीरा' संस्था की अहम भूमिका
इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने में 'अबीरा' संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उद्घाटन के अवसर पर संस्था की अध्यक्ष स्वेता विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने प्रशिक्षण की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि कैसे पारंपरिक डिजाइनों को बाजार की जरूरतों के अनुसार ढाला जा सकता है। कार्यक्रम में मुखिया सुनील किस्कू और ग्राम नायके हबीराम मुर्मू ने भी अपने विचार रखे और इस पहल को सामाजिक और आर्थिक बदलाव का वाहक बताया।

कौशल विकास से आत्मनिर्भर बनेंगे ग्रामीण
मुखिया कान्हू मुर्मू ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि पंचायत स्तर पर कौशल विकास कार्यक्रमों का संचालन उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जब तक हमारी महिलाएं और युवा आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं होंगे, तब तक समाज का पूर्ण विकास संभव नहीं है। सोरा-सोहराय प्रिंटिंग को केवल एक कला के रूप में नहीं, बल्कि एक 'ब्रांड' के रूप में विकसित करने की योजना है। भविष्य में यहां तैयार होने वाले कपड़ों और कलाकृतियों को बड़े शहरों के बाजारों और प्रदर्शनियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।


सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिक तकनीक का संगम
ट्रेनर सोनाराम सोरेन के मार्गदर्शन में युवाओं को प्रिंटिंग की बारीकियां सिखाई जाएंगी। यह केंद्र इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे अपनी जड़ों और संस्कृति को बचाते हुए भी आधुनिक दौर में प्रगति की जा सकती है। आदिवासी नव युवक क्लब के अध्यक्ष साहेबराम मुर्मू और वार्ड सदस्यों ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि अब गाँव की कला दीवारों से निकलकर कपड़ों के माध्यम से दुनिया के सामने आएगी। यह प्रयास लुप्त होती कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का भी एक सशक्त जरिया बनेगा।

समुदाय की उत्साहजनक भागीदारी
उद्घाटन समारोह में टीसीएफ फेलो सिदलाल टुडू, वार्ड सदस्य सरोती हेंब्रम, लक्ष्मी हेंब्रम, और पानोसोती मार्डी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष उपस्थित थे। ग्रामीणों में इस केंद्र को लेकर भारी उत्साह देखा गया। महिलाओं ने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण के बाद वे अपने परिवार की आय में योगदान दे सकेंगी। कार्यक्रम के अंत में यह संकल्प लिया गया कि पंचायत स्तर पर ऐसे और भी स्वरोजगार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि पलायन जैसी समस्याओं पर लगाम लगाई जा सके और गांव को समृद्ध बनाया जा सके।