Jamshedpur news : जमशेदपुर के आनंद मार्ग से जुड़े सुनील आनंद ने आयुष्मान भारत योजना की महत्ता को रेखांकित करते हुए झारखंड में मोतियाबिंद की फेको सर्जरी पर लगी रोक पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, आयुष्मान योजना गरीबों के लिए एक सुरक्षा कवच है, जिसे राजनीतिक ईगो या प्रशासनिक जांच के नाम पर रोकना अनुचित है। उन्होंने इस विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसे तत्काल चालू करने की आवश्यकता पर बल दिया है।



आयुष्मान योजना गरीबों के लिए है एक वरदान
सुनील आनंद का कहना है कि आयुष्मान योजना वास्तव में एक कल्याणकारी कदम है, जिससे समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी निजी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल पाता है। शिक्षा और चिकित्सा आज के दौर में सबसे महंगे संसाधन हैं। ऐसे में जो गरीब अपनी आर्थिक स्थिति के कारण अच्छी चिकित्सा सुविधा नहीं जुटा सकते, उनके लिए यह योजना जीवनदान के समान है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो सरकारें गरीबों के हितों की अनदेखी करती हैं, उन्हें जनता भी नकार देती है।


केंद्र की इस योजना को न अपनाना गरीबों के साथ छल है
रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल, दिल्ली और ओडिशा जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि राजनीतिक मतभेदों या 'अहम' के कारण केंद्र की इस योजना को न अपनाना गरीबों के साथ छल है। सुनील आनंद ने बताया कि झारखंड के पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में आयुष्मान को मान्यता नहीं होने के कारण वहां जाने वाले झारखंडी मरीज परेशान होते हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल का 'दीदी कार्ड' केवल उसी राज्य तक सीमित है, जिससे मरीजों को अंतर-राज्यीय चिकित्सा लाभ नहीं मिल पाता। इसे गरीबों के साथ एक बड़ा पाप और राजनीतिक धोखाधड़ी करार दिया गया है।

फेको सर्जरी पर रोक लगाने से गरीबों को हो रही परेशानी
वर्तमान में झारखंड में आयुष्मान योजना के तहत मोतियाबिंद के 'फेको सर्जरी' (Phaco Surgery) पर रोक लगी हुई है। फेको सर्जरी मोतियाबिंद के इलाज की एक आधुनिक और बेहतर तकनीक है, जिससे मरीज जल्द स्वस्थ होता है। सुनील आनंद का कहना है कि कुछ समय पहले ही इस पर रोक लगाई गई है, जिसका सीधा नुकसान गरीबों को हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार को किसी प्रकार की जांच या ऑडिट करना है, तो वह अवश्य करे, लेकिन जांच के बहाने गरीबों की चल रही स्वास्थ्य सेवाओं को बंद करना न्यायसंगत नहीं है।


इलाज के अभाव में भटक रहे लोग, नेता राजनीति में व्यस्त
आनंद मार्ग की ओर से यह दुख व्यक्त किया गया कि इन गंभीर मुद्दों से किसी भी राजनीतिक दल को वास्तव में कोई सरोकार नहीं है। नेता और दल अपनी राजनीति में व्यस्त हैं, जबकि गरीब जनता इलाज के अभाव में भटक रही है। मोतियाबिंद जैसी समस्या, जिसे आसानी से ठीक किया जा सकता है, वह भी अब जटिल होती जा रही है क्योंकि सरकारी फाइलों में इसकी सर्जरी रुकी हुई है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन को मानवीय आधार पर इस सुविधा को तुरंत बहाल करना चाहिए।

आनंद मार्ग ने अपनी सेवा भावना का परिचय दिया
एक ओर जहाँ व्यवस्था पर सवाल उठाए गए, वहीं दूसरी ओर 'आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम ग्लोबल' ने अपनी सेवा भावना का परिचय दिया। पूर्णिमा नेत्रालय में पूर्व में हुए मोतियाबिंद ऑपरेशनों (फेको सर्जरी) के फॉलोअप के दौरान लगभग 20 मरीजों के बीच छाता का वितरण किया गया, ताकि वे धूप और बारिश से बच सकें। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए लगभग 50 फलदार पौधे भी वितरित किए गए। यह कार्यक्रम उन मरीजों के लिए आयोजित किया गया था जिनका सफल ऑपरेशन पहले ही हो चुका था।