Jamshedpur News: 8 मई को मनाए जाने वाले विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर समाज में ऐसे लोगों की चर्चा जरूरी हो जाती है, जो दूसरों के जीवन को बचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। जमशेदपुर के राजेश मार्डी ऐसे ही प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं, जिन्हें लोग “ट्राइबल ब्लड मैन” के नाम से जानते हैं। आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में उनका योगदान अत्यंत सराहनीय रहा है। राजेश मार्डी अब तक अपने जीवन में 80वीं बार रक्तदान कर चुके हैं। वे न केवल स्वयं रक्तदान करते हैं, बल्कि लगातार युवाओं को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करते रहते हैं। कोल्हान प्रमंडल के पहले आदिवासी युवा के रूप में उन्होंने सबसे अधिक बार रक्तदान कर एक अलग पहचान बनाई है।


थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए बने सहारा
थैलेसीमिया एक गंभीर बीमारी है, जिसमें मरीजों को नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए हर महीने रक्त की व्यवस्था करना काफी कठिन होता है। ऐसे समय में राजेश मार्डी इन बच्चों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आए हैं। वर्ष 2019 में उन्होंने पहली बार पोटका प्रखंड के रासुनचोपा गांव निवासी मंगल सोरेन की थैलेसीमिया पीड़ित बच्ची आरोही सोरेन को गोद लिया। तभी से वे हर महीने उसके लिए रक्त उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे हैं। इस पहल के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अन्य जरूरतमंद बच्चों की भी जिम्मेदारी उठानी शुरू की।


दस बच्चों की जिम्मेदारी निभा रहे राजेश
आज राजेश मार्डी कुल दस थैलेसीमिया पीड़ित आदिवासी बच्चों की देखभाल और रक्त व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनके प्रयासों से इन बच्चों को हर महीने जमशेदपुर ब्लड सेंटर से नि:शुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता है। राजेश मार्डी द्वारा गोद लिए गए बच्चों में आरोही सोरेन (रासुनचोपा, पोटका), सुमन टुडू (महेशडूबा, घाटशिला), सचिन मुर्मू (चिरुगोड़ा, घाटशिला), अरुण तापे (नादुंप, सुंदरनगर), आर्यन मुर्मू (कुईलीसूता, मुसाबनी), प्रिया टुडू (मोड़दा, डुमरिया), निशा कंसारी (राजदोहा, नरवा), बिमला सोरेन (रुगड़ीडीह, ओड़िशा), लिजा मुर्मू (कुमीरमुडी, ओड़िशा) और सुमन टुडू (सीनी सिदमा, सरायकेला) शामिल हैं।


ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान अभियान
राजेश मार्डी का कार्य केवल रक्तदान तक सीमित नहीं है। वे आदिवासी ग्रामीण इलाकों में लगातार रक्तदान शिविर आयोजित करते रहते हैं। उनका उद्देश्य लोगों में यह जागरूकता फैलाना है कि रक्तदान महादान है और इससे कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। उनके नेतृत्व में कई युवा पहली बार रक्तदान करने के लिए आगे आए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता की कमी के बीच उनका यह अभियान समाज के लिए मिसाल बन चुका है। विशेष रूप से थैलेसीमिया मरीजों के लिए नियमित रक्तदान कितना आवश्यक है, इसकी जानकारी भी वे लोगों तक पहुंचाते रहते हैं।

समाज और संस्थाओं ने किया सम्मानित
राजेश मार्डी के इस मानवसेवा कार्य को देखते हुए कई सामाजिक संगठनों और संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। रक्तदान और थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों की हर ओर सराहना होती है।
समाज के लोग मानते हैं कि राजेश मार्डी जैसे युवा दूसरों के लिए प्रेरणा हैं। वे यह साबित करते हैं कि यदि इंसान के भीतर सेवा भावना हो, तो वह सीमित संसाधनों में भी कई लोगों के जीवन में खुशियां ला सकता है।


बच्चों की मुस्कान ही सबसे बड़ा सम्मान
राजेश मार्डी का कहना है कि उन्हें अपने कार्य पर गर्व महसूस होता है। उनके अनुसार जब किसी बच्चे को समय पर रक्त मिल जाता है और उसके चेहरे पर मुस्कान लौटती है, तो वही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान होता है।
विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर राजेश मार्डी जैसे लोगों की कहानी समाज को यह संदेश देती है कि रक्तदान केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। यदि अधिक लोग आगे आएं, तो थैलेसीमिया जैसे गंभीर रोग से जूझ रहे बच्चों का जीवन काफी आसान बनाया जा सकता है।