जमशेदपुर/नई दिल्ली: साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के तत्वावधान में इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट में 'संताली राइटर्स मीट' (संताली लेखक सम्मेलन) का गरिमामय आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में संताली भाषा के नामचीन साहित्यकारों, शोधकर्ताओं और भाषा प्रेमियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संताली साहित्य के विकास, लोक परंपराओं के संरक्षण और समकालीन संताली कविता एवं शोध को प्रोत्साहन देना था। सम्मेलन के दौरान संताली भाषा के एक प्रमुख साहित्यकार की नई पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
स्वागत भाषण में साहित्य अकादमी की योजनाओं और पुरस्कारों की मिली जानकारी
कार्यक्रम की शुरुआत श्याम सी टुडू के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने देश भर से आए साहित्यकारों और संताली भाषा-प्रेमियों का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। अपने संबोधन में उन्होंने साहित्य अकादमी, नई दिल्ली की कार्यप्रणाली, इसके मुख्य उद्देश्यों, आगामी कार्यक्रमों और संताली भाषा में दिए जाने वाले विभिन्न साहित्य अकादमी पुरस्कारों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि मंगल मांडी ने संताली लेखकों की रचनात्मकता और उनकी साहित्य साधना की भूरी-भूरी सराहना की।
संताली साहित्य के प्रमुख साहित्यकार की पुस्तक का हुआ भव्य विमोचन
उद्घाटन सत्र का सबसे मुख्य आकर्षण एक विशेष पुस्तक विमोचन समारोह रहा। कार्यक्रम के दौरान संताली साहित्य के प्रमुख साहित्यकार द्वारा रचित नई पुस्तक का आधिकारिक विमोचन किया गया। उपस्थित विद्वानों ने कहा कि यह कृति संताली भाषा और साहित्य की समृद्धि में एक नया अध्याय जोड़ेगी। इस पुस्तक विमोचन ने संताली लेखन के क्षेत्र में नए लेखकों और विचारकों को और अधिक गुणवत्तापूर्ण साहित्य सृजन के लिए प्रेरित किया।
द्वितीय सत्र: समकालीन चेतना और आधुनिकता के संगम पर काव्य पाठ
कार्यक्रम के दूसरे सत्र का विषय 'समकालीन चेतना और आधुनिकता का संगम' रखा गया था, जिसकी अध्यक्षता सरोजनी बेसरा ने की। इस सत्र में संताली भाषा की आधुनिक संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों पर आधारित कविताओं का पाठ किया गया। प्रसिद्ध कवयित्री स्नेहा मांडी, सुप्रिया हांसदा और कासुनाथ सोरेन ने अपनी सशक्त कविताओं के माध्यम से आधुनिक संताली कविता के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने काफी सराहा।
अंतिम सत्र: लोक परंपराओं, आधुनिक कविता और शोध पत्रों पर गहन मंथन
सम्मेलन का अंतिम सत्र संताली लोक परंपराओं और शोध पत्रों के वाचन पर केंद्रित था, जिसकी अध्यक्षता प्रेम सोरेन ने की। इस सत्र में हाजाम बास्के ने अपनी आधुनिक संताली कविताओं से पूरे माहौल में समां बांध दिया, जबकि गुरुबारी हेंब्रम ने अपनी मर्मस्पर्शी रचनाओं से सभी का दिल जीत लिया। सत्र के दौरान विद्वानों ने संताली संस्कृति की गहरी जड़ों पर विचार-विमर्श किया और साहित्य में लोक जीवन के महत्व को रेखांकित किया।
संताल स्वशासन व्यवस्था और जीवन संस्कारों पर विस्तृत शोध प्रस्तुत
अंतिम सत्र में डॉ. सोरेन ने 'संताल स्वशासन व्यवस्था' पर अपना गहन और ऐतिहासिक शोध पत्र प्रस्तुत किया। इसके बाद अध्यक्षीय भाषण देते हुए प्रेम सोरेन ने संताली लोक साहित्य के अंतर्गत मानव जीवन के तीन सबसे प्रमुख पड़ावों—जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कारों—पर विस्तार से प्रकाश डाला और इनके सांस्कृतिक महत्व को समझाया। कार्यक्रम के समापन पर वंदना सोरेन ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और आयोजकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
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