टाटा विस्थापितों की जमीन के सर्वे का प्रस्ताव भेजे प्रशासन: हरमोहन महतो

Jamshedpur News : झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्य संयोजक हरमोहन महतो के नेतृत्व में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। मंच ने जमशेदपुर में टाटा कंपनी की स्थापना के दौरान विस्थापित हुए रैयतों और खातियानधारियों की जमीन का सर्वे कराने का प्रस्ताव तत्काल झारखंड सरकार को भेजने की पुरजोर मांग की है। प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन से मुलाकात कर राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के जनावेदन का हवाला दिया। मंच के नेताओं ने कहा कि विस्थापित रैयत लंबे समय से अपने हक और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में टाटा विस्थापितों की भूमि से जुड़े लंबित मामलों के समाधान के लिए राज्य सरकार के स्तर पर जमीन का सर्वे कराया जाना बेहद जरूरी है, ताकि प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सके।

पूर्व में भी जमा किए जा चुके हैं आवश्यक दस्तावेज
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि मंच की ओर से पूर्व में भी इस गंभीर मुद्दे पर जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया है। इसके समर्थन में 30 दिसंबर 2025, 10 फरवरी 2026, 24 मई 2026 और 17 जुलाई 2026 को आवश्यक कागजात व प्रस्ताव उपायुक्त कार्यालय में जमा कराए जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होना चिंताजनक है।

सरकार को जल्द प्रस्ताव भेजने का आग्रह
हरमोहन महतो ने उपायुक्त से आग्रह किया कि इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भू-राजस्व विभाग और झारखंड सरकार को टाटा विस्थापितों की जमीन के सर्वे से संबंधित प्रस्ताव अविलंब भेजा जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर सर्वे होने से दशकों से अपने अधिकारों से वंचित मूलवासियों और खातियानधारियों का अधिकार सुनिश्चित हो सकेगा और भूमि विवादों का स्थाई समाधान निकल सकेगा।

प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख लोग थे शामिल
इस दौरान मांग उठाने वाले प्रतिनिधिमंडल में मुख्य संयोजक हरमोहन महतो के अलावा रामचंद्र महतो, सानंद गौड़, उत्तम प्रधान, मधुसूदन माझी, निमाई गौड़, संजय मंडल, मनोज बोदरा, गौर हेम्ब्रम, समतुल सिंह भूमिज, राम सिंह, गया हो, गोपी बोदरा और टुनु लामाय समेत मंच के कई अन्य सदस्य उपस्थित थे।