गोपाल मैदान में विश्व आदिवासी दिवस पर जुटेंगे आदिवासी समाज के प्रतिनिधि
VISHWA ADIVASI DIVAS: विश्व आदिवासी दिवस 2026 के अवसर पर रिगल मैदान में भव्य जनसभा का आयोजन किया जाएगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी आयोजित होने वाली जनसभा का मुख्य संदेश “अपनी पहचान को पहचानें” रखा गया है। कार्यक्रम में संथाल, हो, मुंडा, भूमिज, उरांव, माहली सहित विभिन्न आदिवासी समाज के विद्वान, छात्र, सामाजिक नेता और बुद्धिजीवी शामिल होंगे। जनसभा के मंच से आदिवासी समाज की वर्तमान स्थिति, दिशा, पहचान, अधिकार और भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।
आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज को अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूक करना तथा समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सामूहिक संवाद को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 11 बजे होगा। वहीं शाम 4:30 बजे से 5 बजे तक प्रेस एवं मीडिया के साथ साक्षात्कार का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
SIR और परिसीमन जैसे मुद्दों पर होगी चर्चा
विश्व आदिवासी दिवस की जनसभा में झारखंड के साथ-साथ असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से आने वाले विद्वान, छात्र, सामाजिक नेता और बुद्धिजीवी शामिल होंगे। जनसभा में आदिवासी समाज के समक्ष मौजूद गंभीर एवं ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इनमें SIR (Special Intensive Revision) और Delimitation (परिसीमन) जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल हैं। आयोजकों का कहना है कि बदलते राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में आदिवासी समाज के अधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों को लेकर जागरूकता जरूरी है। इसलिए जनसभा में विभिन्न राज्यों से आने वाले प्रतिनिधियों के अनुभव और विचार साझा किए जाएंगे। इसके माध्यम से आदिवासी समाज के बीच संवाद, जागरूकता और एकजुटता को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
महिलाओं की अगुवाई में तैयारियां, बड़ी भागीदारी पर जोर
इस वर्ष विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन में महिलाओं की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। कार्यक्रम की तैयारियों और विभिन्न व्यवस्थाओं में महिला नेतृत्वकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। महिला टीम द्वारा आयोजन स्थल की व्यवस्था, समन्वय और कार्यक्रम से जुड़ी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पार्वती हांसदा, सरिता हांसदा, सिंगो मुर्मू, सुजाता मुर्मू, बबीता सोरेन, सुकुरमुनी मुर्मू, बिनीता मुर्मू, सुरूजमनी मुर्मू, बसंती हांसदा, सालगे हांसदा, खुशी हेंब्रम, जस्मी किस्कू, काजल हेंब्रम, अंजली टुडू, बांगी किस्कू, लखिमीनी बेसरा, प्रियंका टुडू, अंजली बास्की टुडू एवं श्रीमती मुर्मू सहित महिला नेतृत्वकर्ता तैयारियों में जुटी हैं। महिला टीम का विशेष जोर कार्यक्रम में अधिक से अधिक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर है। आयोजकों के अनुसार महिलाओं की मजबूत भागीदारी आदिवासी समाज में महिला नेतृत्व, सामाजिक एकता और जागरूकता का महत्वपूर्ण संदेश देगी।
पहचान, संस्कृति और अधिकार की आवाज मजबूत करने की तैयारी
आयोजकों का कहना है कि “अपनी पहचान को पहचानें” इस वर्ष के आयोजन का केंद्रीय संदेश है। आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, परंपरा, सामाजिक व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों को लेकर नई पीढ़ी को जागरूक करना कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है। इसके साथ ही युवाओं और छात्रों को सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार आदिवासी समाज की एकजुटता केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज के अधिकारों, शिक्षा, रोजगार, प्रतिनिधित्व और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर भी सामूहिक विमर्श होना चाहिए। जनसभा में विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले प्रतिनिधियों के विचारों के माध्यम से इन विषयों को व्यापक मंच देने का प्रयास किया जाएगा।
इदार हेंब्रम सहित आयोजन समिति जुटी, लोगों से शामिल होने की अपील
कार्यक्रम की तैयारियों में मुख्य संयोजक इदार हेंब्रम, अध्यक्ष हेमंद्र हांसदा, समाजसेवी सलमान बास्के और सुरेश मुर्मू सहित अन्य लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। आयोजन समिति की ओर से कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर तैयारी की जा रही है। आयोजकों ने आदिवासी समाज के सभी लोगों से विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रिगल मैदान पहुंचने की अपील की है। विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आग्रह किया गया है। आयोजकों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी से आदिवासी एकता, पहचान, संस्कृति और अधिकारों की आवाज को और मजबूती मिलेगी। विश्व आदिवासी दिवस के इस आयोजन को सामाजिक जागरूकता और सामूहिक संवाद के मंच के रूप में देखा जा रहा है।
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