Jamshedpur News: टाटानगर रेलवे स्टेशन से नई ट्रेनों की मांग लंबे समय से उठ रही है, लेकिन यात्रियों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। रेलवे ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि हल्दीपोखर में प्रस्तावित आधुनिक कोचिंग टर्मिनल तथा गोविंदपुर और बीरबांस में नए ब्लॉक स्टेशन बनने के बाद ही टाटानगर से नई ट्रेनों के परिचालन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। मौजूदा स्थिति को देखते हुए वर्ष 2028 से पहले किसी नई ट्रेन के शुरू होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।
टाटानगर स्टेशन पर ट्रेनों का बढ़ता दबाव बना बड़ी चुनौती
दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रमुख स्टेशनों में शामिल टाटानगर रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन हजारों यात्री सफर करते हैं। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के यात्रियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण जंक्शन है। पिछले कई वर्षों से यात्री संगठन, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संस्थाएं नई ट्रेनों की मांग कर रहे हैं। हाल ही में आयोजित दक्षिण पूर्व रेलवे जोनल सलाहकार समिति की बैठक में भी कई नई ट्रेनों और मौजूदा ट्रेनों के विस्तार की मांग रखी गई। हालांकि रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में टाटानगर स्टेशन की परिचालन क्षमता लगभग पूरी तरह भर चुकी है। ऐसे में नई ट्रेनें जोड़ना तकनीकी और परिचालन दोनों दृष्टि से संभव नहीं है। रेलवे का कहना है कि पहले स्टेशन के ट्रैफिक का दबाव कम करना जरूरी है। इसके लिए नई आधारभूत संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।
हल्दीपोखर में बनेगा आधुनिक कोचिंग टर्मिनल
रेलवे अधिकारियों के अनुसार हल्दीपोखर में अत्याधुनिक कोचिंग टर्मिनल का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य टाटानगर स्टेशन पर ट्रेनों की पार्किंग, रखरखाव और रैक प्रबंधन का दबाव कम करना है। फिलहाल कई ट्रेनों की रैक टाटानगर स्टेशन पर ही खड़ी रहती हैं, जिससे प्लेटफॉर्म और यार्ड की क्षमता प्रभावित होती है। कोचिंग टर्मिनल बनने के बाद ट्रेनों की सफाई, मेंटेनेंस और रैक की पार्किंग हल्दीपोखर में की जाएगी। इससे टाटानगर स्टेशन पर अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी और भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन का रास्ता खुलेगा।
गोविंदपुर और बीरबांस में बनेंगे नए ब्लॉक स्टेशन
रेलवे की योजना के तहत गोविंदपुर में दो नई लूप लाइन के साथ ब्लॉक स्टेशन बनाया जाएगा। इसके अलावा गम्हरिया के समीप स्थित बीरबांस हॉल्ट को भी विकसित कर ब्लॉक स्टेशन का स्वरूप दिया जाएगा। गोविंदपुर ब्लॉक स्टेशन का निर्माण मार्च 2028 तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। इन दोनों स्टेशनों के बनने से ट्रेनों की क्रॉसिंग व्यवस्था अधिक सुगम होगी और परिचालन में तेजी आएगी।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद ट्रेनों की रेक पार्किंग, रखरखाव और आपातकालीन संचालन की व्यवस्था पहले से बेहतर होगी। साथ ही टाटानगर स्टेशन पर ट्रैफिक का दबाव भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
यात्री संगठनों ने रखीं कई महत्वपूर्ण मांगें
दक्षिण पूर्व रेलवे जोनल सलाहकार समिति की बैठक में यात्री संगठनों ने कई नई ट्रेनों और ट्रेन विस्तार की मांग दोहराई। छोटानागपुर पैसेंजर एसोसिएशन के महासचिव डॉ. अरुण तिवारी ने टाटानगर से फारबिसगंज तक नई ट्रेन चलाने और आसनसोल–गोरखपुर एक्सप्रेस का विस्तार टाटानगर तक करने का प्रस्ताव रखा। वहीं समिति के सदस्य अरुण जोशी ने टाटानगर–मुंबई अंत्योदय एक्सप्रेस को दोबारा शुरू करने की मांग की। इसके अलावा सांसद विद्युतवरण महतो ने आनंद विहार–पुरुलिया एक्सप्रेस का विस्तार टाटानगर तक करने तथा टाटानगर से गया होते हुए पटना के लिए नई ट्रेन शुरू करने का सुझाव दिया।
रेलवे ने इन सभी मांगों पर जवाब देते हुए कहा कि वर्तमान में स्टेशन पर ट्रेनों का दबाव काफी अधिक है। इसलिए नई ट्रेनों के संचालन या विस्तार पर अंतिम निर्णय तभी लिया जा सकेगा, जब प्रस्तावित कोचिंग टर्मिनल और ब्लॉक स्टेशन का निर्माण पूरा हो जाएगा।
2028 के बाद बढ़ सकती हैं नई ट्रेनों की उम्मीदें
रेलवे की दीर्घकालिक योजना पूरी होने के बाद टाटानगर रेलवे स्टेशन की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोचिंग टर्मिनल और ब्लॉक स्टेशन बनने के बाद स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी, जिससे नई ट्रेनों के लिए स्लॉट उपलब्ध हो सकेंगे।फिलहाल यात्रियों को धैर्य रखना होगा, क्योंकि रेलवे पहले आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार परियोजनाएं पूरी हो जाती हैं, तो वर्ष 2028 के बाद टाटानगर से नई रेल सेवाएं शुरू होने की संभावनाएं काफी बढ़ जाएंगी। इससे झारखंड सहित पूर्वी भारत के लाखों यात्रियों को बेहतर और अधिक रेल सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
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