Jamshedpur News: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों और 8 सितंबर को गुवा गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने की तैयारियों को लेकर जगन्नाथपुर इंटर कॉलेज परिसर में आदिवासी हो समाज महासभा एवं आदिवासी हो समाज युवा महासभा की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने छात्रों को विश्व आदिवासी दिवस के महत्व, आदिवासी समाज के अधिकारों, भाषा-संस्कृति के संरक्षण तथा गुवा गोलीकांड के ऐतिहासिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही युवाओं से सामाजिक विकास और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया गया।
विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर हुई विस्तृत चर्चा
बैठक को संबोधित करते हुए आदिवासी हो समाज महासभा के केंद्रीय महासचिव सोमा कोड़ा ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, अधिकार और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से सार्वजनिक स्थलों के साथ-साथ इंटर कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों में भी विश्व आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है ताकि नई पीढ़ी अपनी संस्कृति, परंपरा और इतिहास से जुड़ सके। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी समाज में एकजुटता बढ़ाने, संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने तथा भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। छात्रों को अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझते हुए समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की भी अपील की गई।
गुवा गोलीकांड के इतिहास से कराया गया अवगत
बैठक में सामाजिक संगठन के प्रतिनिधियों ने 8 सितंबर 1980 को हुए गुवा गोलीकांड की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर भी विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने बताया कि यह घटना झारखंड आंदोलन और आदिवासी अधिकारों के संघर्ष का महत्वपूर्ण अध्याय है। गुवा गोलीकांड में शहीद हुए लोगों के बलिदान ने आदिवासी समाज को अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी। छात्रों को बताया गया कि शहीदों का सम्मान करना केवल श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उनके संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा लेकर समाज के विकास तथा अधिकारों की रक्षा के लिए आगे बढ़ना भी है। वक्ताओं ने युवाओं से इतिहास को जानने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आग्रह किया।
छात्रों से सामाजिक जुड़ाव और सहभागिता की अपील
सोमा कोड़ा ने छात्रों से कहा कि शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक चेतना भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि युवा अपने समाज, भाषा और संस्कृति से जुड़े रहेंगे, तभी आदिवासी समाज की पहचान और विरासत सुरक्षित रह सकेगी। उन्होंने छात्रों से समाजहित के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने और सकारात्मक बदलाव के वाहक बनने का आह्वान किया। बैठक के दौरान छात्रों ने भी विभिन्न विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त कीं, जिनका सामाजिक संगठन के पदाधिकारियों ने विस्तार से उत्तर दिया। इस संवाद के माध्यम से छात्रों में आदिवासी इतिहास और सामाजिक मुद्दों के प्रति रुचि एवं जागरूकता देखने को मिली।
8 सितंबर को गुवा चलने का किया गया आह्वान
आदिवासी हो समाज महासभा एवं आदिवासी हो समाज युवा महासभा की ओर से छात्रों से अनुरोध किया गया कि वे आगामी 8 सितंबर को प्रखंड एवं अनुमंडल समिति के नेतृत्व में गुवा पहुंचकर गुवा गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करें। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त करना प्रत्येक जागरूक युवा का दायित्व है। छात्रों ने विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ 8 सितंबर को आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भी शामिल होने पर सहमति जताई। इससे आयोजन को लेकर छात्रों में उत्साह और सामाजिक चेतना का सकारात्मक संदेश देखने को मिला।
बैठक में कई पदाधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में आदिवासी हो समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम, प्रदेश कोषाध्यक्ष शंकर सिधु, अनुमंडल उपाध्यक्ष पुतकर लागुरी, कानुराम हेस्सा, जामदार गागराई, योगेश्वर लागुरी, कुशनु केराई, तुरी सिंकू, रामसिंह बाहंदा, अंजानी कायम, मंगलसिंह हेस्सा, पूजा हेस्सा, लाको तियु, किरन सिंकू, मोहिनी सिंकू, दिलीप कुमार गोप, अजय तामसोय, लादूरा सिंकू, संजय हेस्सा सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने विश्व आदिवासी दिवस और गुवा गोलीकांड के शहीदों की स्मृति में आयोजित कार्यक्रमों को सफल बनाने का संकल्प लिया।
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