Adityapur News : रापचा पंचायत भवन में रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास के मुद्दों पर बनी रणनीति

Adityapur News: रापचा पंचायत भवन में रविवार को विस्थापित परिवारों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में बादूबाद, सिधाड़ीह, कालिकापुर, उपरबेड़ा के विस्थापित परिवारों के साथ-साथ सीतारामपुर डैम विस्थापित काउण्डेशन समिति तथा टाटा-कांड्रा रोड से प्रभावित विस्थापितों ने सामूहिक रूप से भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य विस्थापितों की वर्षों से लंबित समस्याओं, रोजगार, मुआवजा, पुनर्वास और क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय करना था। बैठक के दौरान वक्ताओं ने कहा कि जब तक विस्थापित परिवार एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज़ नहीं उठाएंगे, तब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसलिए संगठन को मजबूत करने और हर गांव तक आंदोलन को पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।

विस्थापितों के अधिकारों और समस्याओं पर हुई विस्तृत चर्चा

बैठक में उपस्थित लोगों ने रोजगार, उचित मुआवजा, पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। ग्रामीणों का कहना था कि विकास परियोजनाओं के कारण अपनी जमीन और आजीविका खोने वाले अनेक परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं और रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।प्रतिभागियों ने कहा कि कई मामलों में विस्थापित परिवारों को अब तक न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही रोजगार एवं पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की गई है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित कंपनियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए तथा विस्थापितों के अधिकारों का सम्मान करते हुए लंबित मामलों का जल्द समाधान करना चाहिए।

अध्यक्ष बोकेशवर महतो की अगुवाई में संगठन को मजबूत करने पर जोर

बैठक की अध्यक्षता बोकेशवर महतो ने की। उन्होंने कहा कि विस्थापितों की लड़ाई केवल किसी एक गांव या क्षेत्र की नहीं, बल्कि उन सभी परिवारों की है जो विकास परियोजनाओं से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने संगठन को मजबूत करने, आपसी समन्वय बढ़ाने और प्रत्येक गांव में सक्रिय समिति बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि यदि सभी विस्थापित परिवार एक मंच पर आकर अपनी मांगों को संगठित तरीके से प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के समक्ष रखेंगे तो समस्याओं के समाधान की संभावना अधिक होगी। उन्होंने युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को भी संगठन की ताकत बताया।

एकजुट होकर अधिकारों की लड़ाई लड़ने का किया आह्वान

बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड आंदोलनकारी हरमोहन महतो उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकार दिलाने के लिए संगठित प्रयास सबसे आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अधिकार मांगने से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और संगठित संघर्ष से प्राप्त होते हैं। उन्होंने सभी ग्रामीणों और विस्थापित परिवारों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के मतभेद को भुलाकर एकजुट रहें और आगामी कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि संगठन जितना मजबूत होगा, उतनी ही प्रभावी तरीके से विस्थापितों की आवाज़ प्रशासन और संबंधित कंपनियों तक पहुंचेगी।

प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के समक्ष उठेंगी लंबित समस्याएं

बैठक में सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। तय किया गया कि विस्थापितों की लंबित समस्याओं को संबंधित प्रशासन एवं कंपनी प्रबंधन के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक विस्थापित गांव में जनजागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक प्रभावित परिवारों को संगठन से जोड़ने का निर्णय लिया गया। बैठक में यह भी तय हुआ कि आने वाले दिनों में विभिन्न गांवों में लगातार बैठकें आयोजित कर लोगों को उनके अधिकारों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। संगठन का उद्देश्य सभी विस्थापित परिवारों को एक साझा मंच पर लाकर उनकी आवाज़ को मजबूत करना है।
बैठक में प्रमुख रूप से संजय मंडल, मनोज महाली, लखन महाली, सबिता महतो, वीणा महतो, भरत मंडल, अजय मार्डी, बाबूलाल मार्डी, आशीष हांसदा, शिशिर मंडल, महादेव महतो, राकेश महाली सहित बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने संगठन को मजबूत बनाने और विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।