Potka Malaria News: पोटका में बुखार से बच्ची की मौत, छोटे भाई में ब्रेन मलेरिया की पुष्टि

Malaria News: पोटका के नारदा गांव में 12 वर्षीय बच्ची की मौत से दहशत

Malaria News: पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में मलेरिया का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। बुधवार को कोवाली थाना क्षेत्र के नारदा पंचायत अंतर्गत नारदा गांव में 12 वर्षीय अनीता सरदार की बुखार के बाद मौत हो गई। प्राथमिक जानकारी के अनुसार बच्ची कई दिनों से तेज बुखार से पीड़ित थी। परिजनों ने समय पर अस्पताल में भर्ती नहीं कराया और न ही स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी। आशंका जताई जा रही है कि उसकी मौत मलेरिया के कारण हुई है। हालांकि अंतिम पुष्टि रक्त जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। घटना के बाद गांव में भय और चिंता का माहौल है। लगातार हो रही मौतों ने ग्रामीणों को डरा दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

छोटे भाई में ब्रेन मलेरिया की पुष्टि, एमजीएम अस्पताल किया गया रेफर


बच्ची की मौत की सूचना मिलने के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पोटका की टीम गांव पहुंची। जांच के दौरान मृतका का पांच वर्षीय छोटा भाई अजय सरदार भी तेज बुखार से पीड़ित मिला। उसकी जांच में ब्रेन मलेरिया (सेरेब्रल मलेरिया) की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे एमजीएम अस्पताल, जमशेदपुर रेफर कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार बच्चे का हीमोग्लोबिन स्तर भी काफी कम पाया गया, जिससे उसकी हालत और गंभीर हो गई थी। फिलहाल अस्पताल में उसका इलाज जारी है और डॉक्टर लगातार निगरानी कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने परिवार के अन्य सदस्यों की भी जांच की है ताकि संक्रमण के फैलाव को समय रहते रोका जा सके।

स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच, परिजनों की लापरवाही भी आई सामने


सीएचसी पोटका के प्रभारी डॉ. सुकांत सीट के अनुसार बच्ची के बीमार होने की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को पहले नहीं दी गई थी। यदि समय रहते सूचना मिल जाती तो मेडिकल टीम पहले ही गांव पहुंचकर इलाज शुरू कर सकती थी। डॉक्टरों ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम गांव पहुंची और बीमार बच्चे को तत्काल अस्पताल भेजा गया। मृत बच्ची का रक्त नमूना भी जांच के लिए भेजा गया है ताकि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि हो सके। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ग्रामीणों को बुखार होने पर तुरंत सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए। देरी होने पर मलेरिया तेजी से गंभीर रूप ले सकता है, विशेषकर बच्चों में।

पूर्वी सिंहभूम में बढ़ रहा मलेरिया का प्रकोप, अब तक नौ लोगों की मौत


पूर्वी सिंहभूम जिले में इस वर्ष मलेरिया का संक्रमण तेजी से बढ़ा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक जिले में नौ लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में पोटका प्रखंड शामिल है, जहां लगातार नए मरीज सामने आ रहे हैं। जिले में अब तक 13,143 लोगों की मलेरिया जांच की गई है। इनमें 86 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। सबसे अधिक 29 मरीज पोटका प्रखंड में मिले हैं। इसके अलावा अन्य प्रखंडों में भी संक्रमित मरीजों की पहचान हुई है। एमजीएम अस्पताल में मलेरिया के कई मरीज भर्ती हैं। इनमें कुछ बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज मिलने से अधिकांश मरीज ठीक हो सकते हैं, लेकिन देर होने पर जान का खतरा बढ़ जाता है।

गांव-गांव चल रहा जांच और जागरूकता अभियान


मलेरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में विशेष अभियान शुरू किया है। मेडिकल टीम घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही है। बुखार से पीड़ित लोगों के रक्त नमूने लिए जा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत दवा दी जा रही है। इसके साथ ही ग्रामीणों को मच्छरदानी के उपयोग, घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देने और बुखार आने पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी जा रही है। आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मी लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को लगातार बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या कमजोरी महसूस हो तो इसे सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज न करें।

समय पर इलाज ही बचा सकता है जान


नारदा गांव की यह घटना एक बार फिर बताती है कि मलेरिया को हल्के में लेना कितना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती जांच और सही इलाज से मलेरिया पूरी तरह ठीक किया जा सकता है, लेकिन लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को बुखार होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार काम कर रही है, लेकिन इसके साथ लोगों की जागरूकता और सहयोग भी उतना ही जरूरी है। पूर्वी सिंहभूम में बढ़ते मलेरिया संक्रमण को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों सतर्क हैं। यदि समय पर जांच, उपचार और बचाव के उपाय अपनाए जाएं तो इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

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