पूर्व अध्यक्ष से लंबी पूछताछ, कई अहम दस्तावेज खंगाल रही CBI
Jamshedpur News: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं और भर्ती घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष हरि राम रियांगते से करीब आठ घंटे तक मैराथन पूछताछ की। इस दौरान जांच एजेंसी ने भर्ती प्रक्रिया, चयन सूची तैयार करने, अभ्यर्थियों के मूल्यांकन तथा अन्य प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने पूछताछ के दौरान केवल मौखिक जवाबों पर ही भरोसा नहीं किया, बल्कि उपलब्ध दस्तावेजों, फाइलों और रिकॉर्ड के आधार पर भी तथ्यों का मिलान किया। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के पीछे किन अधिकारियों और व्यक्तियों की भूमिका रही तथा किस स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई। यह मामला लंबे समय से विवादों में रहा है और झारखंड में सरकारी नौकरियों की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब सीबीआई की सक्रियता से उम्मीद जताई जा रही है कि पूरे मामले की परतें खुल सकती हैं।
पासपोर्ट जब्त, वित्तीय रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
सीबीआई की जांच केवल पूछताछ तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी ने पूर्व अध्यक्ष का पासपोर्ट जब्त कर लिया है ताकि जांच पूरी होने तक विदेश यात्रा की संभावना को रोका जा सके। इसके साथ ही उनके वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और अन्य आर्थिक दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का आर्थिक लाभ, संदिग्ध लेन-देन या अवैध भुगतान तो नहीं हुआ। यदि वित्तीय दस्तावेजों में कोई असामान्यता सामने आती है तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है। सीबीआई यह भी जांच रही है कि भर्ती से जुड़े निर्णयों के दौरान किन-किन अधिकारियों की भूमिका थी और क्या किसी बाहरी व्यक्ति या प्रभावशाली समूह का दबाव आयोग पर था। वित्तीय जांच के आधार पर भविष्य में नए लोगों से भी पूछताछ की संभावना जताई जा रही है।
उत्तर पुस्तिकाओं और मेरिट सूची की दोबारा हो रही पड़ताल
जांच एजेंसी भर्ती प्रक्रिया के तकनीकी पहलुओं की भी गहन समीक्षा कर रही है। इसमें उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया तथा चयन मानकों की दोबारा जांच शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई कई अभ्यर्थियों के प्राप्त अंकों, मूल्यांकन प्रक्रिया और अंतिम चयन सूची का मिलान कर रही है। यदि कहीं अंक बढ़ाने, घटाने या नियमों के विरुद्ध चयन करने के प्रमाण मिलते हैं, तो यह जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू साबित हो सकता है।
जांच के दौरान उन अधिकारियों और कर्मचारियों के बयानों का भी मिलान किया जा रहा है, जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भूमिका निभाई थी। सीबीआई का मानना है कि दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के बयान कई अहम तथ्यों को उजागर कर सकते हैं।
13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट, गंभीर धाराओं में दर्ज है मामला
इस भर्ती घोटाले में सीबीआई पहले ही 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। एजेंसी ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। चार्जशीट में भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन का विस्तृत उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कई लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पूछताछ और दस्तावेजी जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं, तो चार्जशीट में नए नाम भी जोड़े जा सकते हैं। इसके अलावा, जांच पूरी होने के बाद अदालत में साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
झारखंड में पारदर्शी भर्ती प्रणाली की मांग फिर हुई तेज
JPSC भर्ती घोटाले की जांच ने एक बार फिर झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बहस तेज कर दी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारी नौकरियों में चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सुरक्षित होनी चाहिए ताकि योग्य उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से सरकारी संस्थाओं पर लोगों का विश्वास मजबूत होगा। साथ ही भविष्य की भर्तियों में तकनीकी निगरानी, डिजिटल मूल्यांकन और जवाबदेही बढ़ाने की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है।
फिलहाल सीबीआई की जांच जारी है और पूर्व अध्यक्ष हरि राम रियांगते से हुई आठ घंटे की पूछताछ को इस पूरे मामले का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसी द्वारा और भी लोगों से पूछताछ किए जाने तथा नए दस्तावेजों की जांच होने की संभावना है। पूरे मामले पर झारखंड के अभ्यर्थियों, राजनीतिक दलों और आम जनता की नजर बनी हुई है।
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