मूल रैयतों ने भूमि अधिकार की उठाई मांग, मंत्री दीपक बिरुआ को सौंपा ज्ञापन

जमशेदपुर में टाटा लीज नवीनीकरण से पहले न्याय की मांग तेज

Jamshedpur News: जमशेदपुर में टाटा स्टील की प्रस्तावित लीज नवीनीकरण प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर मूल रैयतों और विस्थापित परिवारों की आवाज बुलंद हुई है। रविवार को झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के प्रतिनिधिमंडल ने मंच के मुख्य संयोजक हरमोहन महतो के नेतृत्व में राज्य के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरुआ से उनके चाईबासा स्थित आवास पर मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि टाटा स्टील की लीज का नवीनीकरण करने से पहले 18 मौजा के मूल रैयतों, खतियानधारियों, आदिवासी एवं मूलवासी विस्थापित परिवारों को न्याय दिलाया जाए। मंच का कहना है कि जिन लोगों ने अपनी जमीन देकर औद्योगिक विकास का मार्ग प्रशस्त किया, उन्हें आज तक उनका पूर्ण अधिकार और न्याय नहीं मिल सका है। ऐसे में बिना उनकी समस्याओं का समाधान किए लीज नवीनीकरण करना उचित नहीं होगा।

18 मौजा के मूल रैयतों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग

ज्ञापन में कहा गया है कि टाटा कंपनी की स्थापना के दौरान 18 मौजा के हजारों परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन से विस्थापित हुए थे। इन परिवारों के भूमि अधिकार, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े कई मुद्दे आज भी अधूरे हैं।प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से आग्रह किया कि लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले सभी मूल रैयत खतियानधारियों की पहचान सुनिश्चित की जाए और उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। मंच का मानना है कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ भूमि देने वाले परिवारों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

पुराने खतियानों के आधार पर सर्वे कराने की मांग

मूलवासी अधिकार मंच ने अपने ज्ञापन में वर्ष 1896, 1908 और 1937 के खतियानों के आधार पर नए सिरे से सर्वेक्षण कराने की मांग रखी है। उनका कहना है कि पुराने भूमि अभिलेखों के आधार पर वास्तविक रैयतों की पहचान की जाए ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति के अधिकारों की अनदेखी न हो। इसके अलावा वर्ष 2005 में हुए टाटा स्टील लीज नवीनीकरण की समीक्षा कराने की भी मांग की गई है। मंच का आरोप है कि उस समय कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी हुई थी, जिसके कारण अनेक मूल रैयत अपने अधिकारों से वंचित रह गए।

रैयती जमीन लौटाने और अवैध कब्जे हटाने की उठी मांग

प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से यह भी मांग की कि लीज प्रक्रिया से बाहर रह गई रैयती जमीनों को मूल रैयतों को वापस किया जाए। साथ ही ऐसी सभी जमीनों की पहचान कर उन पर हुए अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। मंच ने यह भी कहा कि ग्राम सभा की सहमति के बिना किसी भी प्रकार की भूमि संबंधी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि संविधान और कानून के अनुरूप ग्राम सभा की अनुमति आवश्यक है और इसका पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

लीज नवीनीकरण समिति में रैयत प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग

झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने मांग की कि टाटा स्टील लीज नवीनीकरण से संबंधित सभी समितियों में मूल रैयतों और विस्थापित परिवारों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। उनका तर्क है कि जिन लोगों की जमीन और भविष्य इस प्रक्रिया से जुड़ा है, उनकी भागीदारी सुनिश्चित किए बिना कोई भी निर्णय न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि जिला प्रशासन को सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद अब तक राज्य सरकार को समुचित प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। इससे लीज नवीनीकरण और भूमि अधिकार से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी हो रही है।

सरकार से पुनर्वास, रोजगार और न्यायपूर्ण निर्णय की अपील

मंच के मुख्य संयोजक हरमोहन महतो ने कहा कि टाटा स्टील की लीज नवीनीकरण प्रक्रिया से पहले सरकार को विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, रोजगार और भूमि अधिकारों पर ठोस एवं पारदर्शी निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि दशकों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे मूल रैयतों और विस्थापित परिवारों को उनका वैधानिक अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब उससे प्रभावित लोगों को सम्मानजनक पुनर्वास, रोजगार और भूमि अधिकार भी सुनिश्चित किए जाएं। प्रतिनिधिमंडल में हरमोहन महतो के अलावा प्रह्लाद गोप, सनोज प्रधान, अबोध सिंह, रामचंद्र महतो, मनोज बोदरा, बबलू गागराई, कार्तिक महतो, गौर हेंब्रम, मनिंद्र सिंह सरदार, मार्कंड गागराई सहित कई अन्य सदस्य शामिल थे। 

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