असुंता लकड़ा के आरोपों पर खेल मंत्रालय सख्त, हॉकी इंडिया से मांगी रिपोर्ट; यौन उत्पीड़न मामले की होगी जांच

Sports News: खेल मंत्रालय ने हॉकी इंडिया को दिए जांच के निर्देश

नई दिल्ली: भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान असुंता लकड़ा द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर अब केंद्र सरकार ने संज्ञान लिया है। युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने हॉकी इंडिया प्रबंधन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने कहा है कि असुंता लकड़ा की शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और इसे हॉकी इंडिया की इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (आईसीसी) के समक्ष रखा जाए, ताकि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। मंत्रालय ने हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की को भेजे गए निर्देश में कहा है कि जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट भी मंत्रालय को उपलब्ध कराई जाए। इससे स्पष्ट है कि सरकार इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही चाहती है।

असुंता लकड़ा ने लगाए यौन उत्पीड़न और धमकी के आरोप


पूर्व कप्तान असुंता लकड़ा ने झारखंड में कार्यरत एक हॉकी कोच पर महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया है कि शिकायतों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया और जिन लोगों ने खिलाड़ियों की सुरक्षा और हितों को लेकर आवाज उठाई, उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। असुंता लकड़ा का कहना है कि उन्होंने पहले भी इस मामले को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया था, लेकिन समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि शिकायत करने वालों और सूचना देने वालों (व्हिसलब्लोअर) के खिलाफ प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई की गई। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से भी की थी स्वतंत्र जांच की मांग


असुंता लकड़ा ने केवल हॉकी इंडिया ही नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) से भी इस मामले में स्वतंत्र जांच कराने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच होती तो खिलाड़ियों का विश्वास खेल व्यवस्था पर बना रहता। उनका आरोप है कि राज्य स्तर पर भी संबंधित कोच के खिलाफ मिली शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों के पास शिकायतें पहुंचीं, उन्होंने समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की। यही कारण है कि मामला अब खेल मंत्रालय तक पहुंच गया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी खिलाड़ी या अधिकारी द्वारा इस तरह की शिकायत की जाती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। इससे खेल संस्थानों में पारदर्शिता और खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर विश्वास मजबूत होता है।

कोच की पहचान और आरोपों का पूरा मामला


असुंता लकड़ा ने अपने आरोपों में कोच की पहचान सुधीर गोला के रूप में की है। उनके अनुसार, उन्हें झारखंड के एक प्रशिक्षण केंद्र की जिम्मेदारी दी गई थी और वे पिछले एक-दो वर्षों से टीम के साथ काम कर रहे थे। इस दौरान असुंता लकड़ा और उनके पति भी उसी व्यवस्था में कार्यरत थे। पूर्व कप्तान का कहना है कि पहले भी कई लोगों ने संबंधित कोच के व्यवहार को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन उन शिकायतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन महिला खिलाड़ियों ने अपनी बात रखने की कोशिश की, वे सामने आने से डरती रहीं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल मामला जांच प्रक्रिया के अधीन है और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

आईसीसी करेगी जांच, मंत्रालय को सौंपी जाएगी रिपोर्ट


खेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि हॉकी इंडिया की इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी पूरे मामले की जांच करेगी। यह समिति कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों की जांच के लिए गठित की जाती है। समिति शिकायतों, उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद हॉकी इंडिया उस रिपोर्ट को खेल मंत्रालय को भेजेगा। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। मंत्रालय का कहना है कि खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना सभी खेल संस्थाओं की जिम्मेदारी है। इसलिए किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेना आवश्यक है।

खिलाड़ियों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर बढ़ी चर्चा


इस मामले के सामने आने के बाद खेल जगत में खिलाड़ियों की सुरक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था और खेल संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि खिलाड़ियों, विशेषकर महिला खिलाड़ियों, को ऐसा माहौल मिलना चाहिए जहां वे बिना किसी डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। साथ ही, शिकायत करने वाले व्यक्ति या व्हिसलब्लोअर के खिलाफ किसी प्रकार की प्रताड़ना या दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। खेल संस्थानों में पारदर्शी जांच प्रणाली और समयबद्ध कार्रवाई से खिलाड़ियों का भरोसा मजबूत होगा। फिलहाल सभी की नजर हॉकी इंडिया की जांच प्रक्रिया पर है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। तब तक यह मामला भारतीय खेल जगत के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है, जिसमें निष्पक्ष जांच और खिलाड़ियों की सुरक्षा सबसे अहम मुद्दे बने हुए हैं।

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