सरजामदा में कुड़मी समाज का पर्यावरण संरक्षण अभियान, 11 सखुआ पौधों का रोपण कर दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

सरजामदा में पारंपरिक रीति से हुआ सखुआ पौधरोपण कार्यक्रम, एकजुटता का आह्वान किया 

Jamshedpur News: जमशेदपुर के परसुडीह क्षेत्र अंतर्गत सरजामदा पुराना बस्ती में दिसुआ आदिवासी कुड़मी समाज, झारखंड प्रदेश के आह्वान पर पर्यावरण संरक्षण को समर्पित पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व समाज के पारंपरिक पुजारी दिपेन महतो टिडूआर ने किया। इस दौरान समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से 11 सखुआ (साल) के पौधे लगाकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं था, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आने वाली पीढ़ियों को हरियाली के महत्व से परिचित कराना भी था। समाज के सदस्यों ने पौधरोपण के बाद पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का भी संकल्प लिया। सखुआ का पेड़ झारखंड की पहचान माना जाता है। यह केवल आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं का भी अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में सखुआ पौधरोपण को सांस्कृतिक और पर्यावरणीय संरक्षण का प्रतीक माना जा रहा है।


कुड़मी समाज ने प्रकृति को बताया अपनी संस्कृति का आधार

पौधरोपण कार्यक्रम में उपस्थित दिसुआ आदिवासी कुड़मी समाज, झारखंड प्रदेश के प्रदेश संयोजक प्रकाश महतो केटिआर ने कहा कि कुड़मी समाज आदिकाल से प्रकृति का उपासक रहा है। समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएँ जंगल, पहाड़, नदी और वृक्षों से जुड़ी रही हैं। आज भी समाज खुले आसमान के नीचे पेड़-पौधों के बीच अपने इष्ट देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का संबंध सदियों पुराना है। यदि जंगल और पर्यावरण सुरक्षित रहेंगे, तभी मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और जंगलों की कटाई के कारण पर्यावरण पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में समाज के हर वर्ग को पौधरोपण जैसे अभियानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए।

वन और पर्यावरण संरक्षण का दिया गया संदेश

प्रकाश महतो केटिआर ने कहा कि वन-पर्यावरण के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना संभव नहीं है। जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि मानव जीवन, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन का आधार हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल पौधे लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी न समझें, बल्कि उनकी नियमित देखभाल भी करें। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसे वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखे, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है। उन्होंने समाज के युवाओं को भी इस अभियान से जुड़ने और अधिक से अधिक लोगों को प्रेरित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने भी पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए भविष्य में बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाने की बात कही।

समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर निभाई भागीदारी

इस पौधरोपण कार्यक्रम में समाज के अनेक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अंकित महतो, जुन महतो, भगवत महतो, गणेश महतो, गोविंद महतो, प्रकाश महतो, श्याम महतो, सचिन महतो सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी प्रतिभागियों ने पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने यह संदेश भी दिया कि सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है। समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने युवाओं से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और हरित अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह प्रकृति संरक्षण और सामाजिक एकजुटता के संदेश से ओत-प्रोत रहा। लोगों ने पौधरोपण को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने पर जोर दिया।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायी पहल

सरजामदा में आयोजित यह पौधरोपण अभियान केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरण और संस्कृति को साथ लेकर चलने की एक प्रेरणादायी पहल है। कुड़मी समाज ने यह संदेश दिया कि प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज जब जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट पूरी दुनिया के सामने चुनौती बने हुए हैं, तब स्थानीय स्तर पर इस प्रकार के अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। सखुआ जैसे स्थानीय और पारिस्थितिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों का रोपण न केवल हरियाली बढ़ाएगा, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी योगदान देगा। समाज के प्रतिनिधियों ने सभी समुदायों से अपील की कि वे पौधरोपण को जनआंदोलन का स्वरूप दें और अपने आसपास अधिक से अधिक पेड़ लगाकर उनकी देखभाल करें। इसी सामूहिक प्रयास से आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और हरित पर्यावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।