खड़ियाकोचा गांव तक पहुंचने के लिए आज भी सहारा है पगडंडी

Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम जिले के भाटीन पंचायत अंतर्गत खड़ियाकोचा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जिंदगी गुजारने को मजबूर है। आजादी के 78 साल और झारखंड राज्य गठन के 26 साल बाद भी गांव तक पक्की सड़क नहीं बन सकी है। जंगल के बीच बसे इस गांव तक पहुंचने के लिए लोगों को करीब दो किलोमीटर तक पगडंडी के सहारे चलना पड़ता है। बरसात के दिनों में हालात और भयावह हो जाते हैं, जब गांव का संपर्क मुख्य सड़क से पूरी तरह कट जाता है। ऐसे में बीमार पड़ने वाले मरीजों को खटिया पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इलाज के अभाव में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच खड़ियाकोचा गांव की स्थिति आज भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

सबर परिवारों की समस्याओं को सुनने पहुंचे जेएलकेएम कार्यकर्ता

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के कार्यकर्ता सबर परिवारों की समस्याओं को जानने के लिए गांव पहुंचे। जिला उपाध्यक्ष बिमल कुमार महतो के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कठिन रास्तों और जंगल के पगडंडियों को पार कर गांव का दौरा किया। ग्रामीणों ने नेताओं के सामने अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं को रखा। गांव में रहने वाले सबर परिवारों ने बताया कि सड़क, पानी, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं आज भी उनके लिए सपना बनी हुई हैं। कार्यकर्ताओं ने गांव की स्थिति देखकर चिंता जताई और कहा कि सरकार एवं प्रशासन को इस दिशा में गंभीर पहल करनी चाहिए। जेएलकेएम नेताओं ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को संबंधित विभाग और अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा ताकि जल्द समाधान निकल सके।

यूसील कंपनी के पास रहने के बावजूद नहीं मिल रही सुविधाएं

जेएलकेएम जिला उपाध्यक्ष बिमल कुमार महतो ने कहा कि खड़ियाकोचा गांव यूसील जादूगोड़ा यूरेनियम कॉरपोरेशन क्षेत्र के समीप स्थित है, लेकिन इसके बावजूद गांव के लोगों को कंपनी की ओर से किसी प्रकार की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि आसपास उद्योग और खनन परियोजनाएं होने के बावजूद आदिवासी और सबर समुदाय आज भी बुनियादी जरूरतों से जूझ रहा है। गांव में न तो नियमित पेयजल व्यवस्था है और न ही बिजली की समुचित सुविधा। शौचालय के अभाव में ग्रामीण खुले में शौच करने को मजबूर हैं। करीब 150 की आबादी वाले इस गांव में सरकारी योजनाओं का लाभ भी सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है। नेताओं ने कहा कि विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए, लेकिन खड़ियाकोचा गांव की स्थिति यह साबित करती है कि आज भी कई गांव सरकारी नजरों से दूर हैं।

बरसात में बढ़ जाती है ग्रामीणों की परेशानी

ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में गांव की स्थिति बेहद दयनीय हो जाती है। रास्ता पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भारी परेशानी होती है। कई बार गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को घंटों तक खटिया के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के समय गांव मानो दुनिया से कट जाता है। सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती। इसके अलावा बिजली और पानी की समस्या भी बरसात में और गंभीर हो जाती है। ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है।

सबर समुदाय के विकास की जरूरत पर जोर

जेएलकेएम नेताओं ने कहा कि सबर समुदाय समाज का अत्यंत पिछड़ा और वंचित वर्ग है, जिसे विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे गांवों की पहचान कर विशेष योजनाओं के तहत विकास कार्य शुरू करना चाहिए। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं हर नागरिक का अधिकार हैं। नेताओं ने यह भी कहा कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीणों का जीवन और अधिक कठिन हो जाएगा। सबर परिवारों ने भी नेताओं से उम्मीद जताई कि उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंचेगी और गांव की तस्वीर बदलने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

कई जेएलकेएम नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद

खड़ियाकोचा गांव के दौरे के दौरान जेएलकेएम के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान जिला सचिव शंकर भक्त, जिला उपाध्यक्ष बिमल महतो, पोटका के पूर्व प्रत्याशी भागीरथी हांसदा, पूर्वी जमशेदपुर से आनंद पत्रलेख और युवा नेता संग्राम बेसरा ने ग्रामीणों से मुलाकात की। नेताओं ने गांव की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कहा कि वे इस मुद्दे को प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष मजबूती से उठाएंगे। ग्रामीणों ने भी नेताओं के गांव पहुंचने पर खुशी जताई और उम्मीद व्यक्त की कि अब उनकी समस्याओं की ओर सरकार और प्रशासन का ध्यान जाएगा।