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नई दिल्ली में जुवान ओनोलिया का भव्य संताली साहित्य सम्मेलन आयोजित

Jamshedpur News: 30 एवं 31 मार्च 2026 को देश की राजधानी नई दिल्ली में जुवान ओनोलिया की ओर से दो दिवसीय संताली साहित्य सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। यह सम्मेलन कई मायनों में ऐतिहासिक रहा, क्योंकि पहली बार नई दिल्ली में इस स्तर पर संताली साहित्यकारों का एकजुट मंच तैयार हुआ। इस आयोजन में नई दिल्ली तथा उसके आसपास के क्षेत्रों से पंद्रह से अधिक संताली साहित्यकारों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम ने न केवल साहित्यकारों को एक मंच प्रदान किया, बल्कि संताली भाषा और संस्कृति के प्रचार-प्रसार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
   


साहित्य के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर गंभीर विमर्श

सम्मेलन के दौरान संताली साहित्य की वर्तमान स्थिति, उसके ऐतिहासिक विकास और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि संताली भाषा और साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक पहचान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। साहित्यकारों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आधुनिक समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर संताली साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। साथ ही यह भी चर्चा हुई कि पारंपरिक साहित्यिक विधाओं को संरक्षित रखते हुए नए प्रयोगों को भी अपनाया जाना चाहिए।

कहानी, कविता और गीतों की प्रस्तुति से सजी संध्या

सम्मेलन का सांस्कृतिक पक्ष भी काफी समृद्ध रहा। साहित्यकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ कर कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। कहानी, कविता, बाल साहित्य और गीतों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खासकर संताली लोकधुनों पर आधारित गीतों ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया। बाल कहानियों की प्रस्तुति ने यह संकेत दिया कि नई पीढ़ी को भी संताली साहित्य से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रस्तुतियों ने यह साबित किया कि संताली साहित्य में विविधता और गहराई दोनों मौजूद हैं।

जुवान ओनोलिया के इतिहास और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश

सम्मेलन में जमशेदपुर से आए श्याम सी टुडू ने जुवान ओनोलिया के इतिहास, उद्देश्य और आगामी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह संगठन लंबे समय से संताली भाषा और साहित्य के विकास के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने भविष्य में और बड़े स्तर पर साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना साझा की, जिसमें देशभर के संताली साहित्यकारों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। उनके संबोधन ने युवा साहित्यकारों को विशेष रूप से प्रेरित किया।


आयोजन का सफल संचालन और समापन

कार्यक्रम का संचालन काशुनाथ सोरेन ने प्रभावी ढंग से किया, जिससे पूरे आयोजन में अनुशासन और प्रवाह बना रहा। उन्होंने सभी सत्रों को सुव्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया और वक्ताओं को उचित समय प्रदान किया। सम्मेलन के समापन अवसर पर प्रेम सोरेन ने भावपूर्ण भाषण दिया। उन्होंने आयोजन की सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए सभी प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आयोजन भविष्य में और अधिक संख्या में होने चाहिए, ताकि संताली साहित्य को नई दिशा मिल सके।

साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों का हुआ जुटान 


सम्मेलन में कई प्रमुख संताली साहित्यकारों की उपस्थिति रही, जिनमें मंगल हांसदा, प्रेम सोरेन, स्नेहा मंडी, अर्पिता हांसदा, छीता सोरेन, प्रणव किस्कु, लक्ष्मण हांसदा, खेला हांसदा, छोटा मार्डी, सुनील हांसदा, सिंगराई मुर्मू, वासुदेव टुडू, अर्जुन सोरेन और तिलका सोरेन शामिल थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर इसे सफल बनाया। उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना की और भविष्य में ऐसे आयोजनों की निरंतरता की अपेक्षा जताई।

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