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दुमका से प्रेरणादायक पहल: गांव में जली शिक्षा की नई रोशनी

दुमका : उपराजधानी दुमका के सुदूरवर्ती नावाडीह गांव से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां शिक्षा के क्षेत्र में सामुदायिक प्रयासों की एक अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है। डिजिटल लाइब्रेरी ग्रुप एवं स्थानीय ग्रामीणों के संयुक्त सहयोग से संचालित “पंडित रघुनाथ मुर्मू पुस्तकालय सह अध्ययन केंद्र” आज क्षेत्र में ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। इस पुस्तकालय का हाल ही में दुमका के उपायुक्त श्री अभिजीत सिन्हा एवं उप विकास आयुक्त द्वारा भ्रमण किया गया, जिसने इस पहल को और अधिक पहचान दिलाई है।


पुस्तकालय का उद्देश्य और स्थापना

नावाडीह गांव में स्थापित यह पुस्तकालय ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों और युवाओं को बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। डिजिटल लाइब्रेरी ग्रुप और स्थानीय समुदाय के लोगों ने मिलकर इसे विकसित किया है, ताकि गांव में भी शहर जैसी पढ़ाई का माहौल तैयार हो सके। यह केंद्र केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां विद्यार्थियों के लिए एक शांत और प्रेरणादायक अध्ययन वातावरण भी उपलब्ध कराया गया है।

अधिकारियों का दौरा और सराहना

पुस्तकालय के कार्यों को देखने के लिए दुमका के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा और उप विकास आयुक्त ने यहां का दौरा किया। उन्होंने पुस्तकालय की व्यवस्था, बच्चों की पढ़ाई के प्रति लगन और सामुदायिक सहयोग की खुले दिल से सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार की पहलें ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं।

बच्चों और युवाओं में बढ़ती रुचि

पुस्तकालय के शुरू होने के बाद गांव के बच्चों और युवाओं में पढ़ाई के प्रति उत्साह में काफी वृद्धि हुई है। पहले जहां संसाधनों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित होती थी, वहीं अब विद्यार्थी नियमित रूप से पुस्तकालय आकर पढ़ाई कर रहे हैं। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उन्हें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने में मदद मिल रही है।

सामुदायिक सहभागिता की मिसाल

इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह से सामुदायिक सहयोग से संचालित किया जा रहा है। गांव के लोग न केवल आर्थिक रूप से बल्कि श्रमदान और प्रबंधन में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि यदि समाज एकजुट होकर प्रयास करे, तो सीमित संसाधनों में भी बड़े बदलाव संभव हैं।

ग्रामीण शिक्षा के लिए मॉडल पहल

अधिकारियों ने इस पुस्तकालय को ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल बताया है। उनका मानना है कि यदि इस तरह के पुस्तकालय हर गांव में स्थापित किए जाएं, तो शिक्षा के स्तर में व्यापक सुधार किया जा सकता है। उन्होंने इस पहल के विस्तार और इसे और अधिक सुदृढ़ बनाने पर भी जोर दिया, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें।

गांव के भविष्य को मिल रही नई दिशा

पंडित रघुनाथ मुर्मू पुस्तकालय सह अध्ययन केंद्र केवल एक पुस्तकालय नहीं, बल्कि गांव के उज्ज्वल भविष्य की नींव बन चुका है। यह पहल बच्चों और युवाओं को सही दिशा देने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी दे रही है। गांव में शिक्षा का यह दीपक न केवल ज्ञान का प्रकाश फैला रहा है, बल्कि एक नई पहचान और उम्मीद भी जगा रहा है।

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