कल्पना सोरेन ने अपने कार्यकाल में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभाई है।
हाशिये पर खड़ी महिलाओं की बनी आवाज
कल्पना सोरेन लंबे समय से समाज के वंचित और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कई अभियान चलाए हैं।
उनके नेतृत्व में कई स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) को बढ़ावा मिला है, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर मिला। इसके अलावा, उन्होंने घरेलू हिंसा, बाल विवाह और लैंगिक भेदभाव जैसे मुद्दों पर भी खुलकर आवाज उठाई है।
उनकी इन पहलों ने न केवल महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार किया है, बल्कि समाज में समानता और सम्मान की भावना को भी मजबूत किया है।
सम्मान से बढ़ा जिम्मेदारी का दायरा
‘ट्रेलब्लेज़र अवॉर्ड’ प्राप्त करने के बाद कल्पना सोरेन ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं का है, जो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने इस उपलब्धि को एक नई जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करते हुए आगे भी समाज के कमजोर वर्गों के लिए काम जारी रखने का संकल्प लिया।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।
इस सम्मान से न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश में महिलाओं के सशक्तिकरण को नई प्रेरणा मिली है, और उम्मीद की जा रही है कि ऐसे प्रयास आगे भी समाज में सकारात्मक बदलाव लाते रहेंगे।
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