Jamshedpur News: Tata Steel Foundation और Standard Chartered India ने झारखंड और ओडिशा के ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा जलवायु अनुकूलन को मजबूत करने के उद्देश्य से अपनी साझेदारी के दायरे का विस्तार किया है। दोनों संस्थाओं ने एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन एवं जलवायु अनुकूलन परियोजना के नए चरण की घोषणा की है, जो दिसंबर 2028 तक संचालित होगी। इस परियोजना का उद्देश्य जल संकट से जूझ रहे ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा देना तथा स्थानीय समुदायों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के प्रति अधिक सक्षम बनाना है।

झारखंड और ओडिशा के ग्रामीण क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
यह तीन वर्षीय परियोजना झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले और ओडिशा के क्योंझर जिले में लागू की जाएगी। ये दोनों क्षेत्र मुख्य रूप से वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर हैं, जहां जल संकट और अनियमित मौसम की समस्या लगातार बढ़ रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण खेती और ग्रामीण आजीविका पर गहरा असर पड़ रहा है। ऐसे में यह परियोजना किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए राहत और स्थिरता लेकर आने की उम्मीद जगाती है। परियोजना के माध्यम से जल संरक्षण और कृषि सुधार के ऐसे मॉडल विकसित किए जाएंगे, जो लंबे समय तक समुदायों को लाभ पहुंचा सकें।


जल संरक्षण और सिंचाई क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर
परियोजना के तहत जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के पुनर्स्थापन के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे। इनमें छोटे बांधों का निर्माण, कंटूर ट्रेंच, खेतों में मेड़बंदी, गली संरचनाएं, फार्म पॉन्ड, भूजल पुनर्भरण संरचनाएं तथा सिंचाई सुविधाओं का विस्तार शामिल है। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल को संरक्षित करना, भूजल स्तर में सुधार लाना तथा खेती योग्य भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।
परियोजना के तहत जल भंडारण क्षमता को बढ़ाकर 37.74 मिलियन क्यूबिक फीट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही अतिरिक्त 1,545 एकड़ भूमि को सिंचाई के दायरे में लाने की योजना है। इससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों को वर्ष भर कृषि कार्य करने में सहायता मिलेगी। मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और जल उपलब्धता बढ़ने से फसल उत्पादन में भी सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है।

12,500 से अधिक ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ
इस विस्तारित परियोजना से लगभग 12,500 ग्रामीणों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें बड़ी संख्या आदिवासी समुदायों की होगी, जो प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं। परियोजना का उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका को सशक्त बनाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है।
जल उपलब्धता बढ़ने से किसानों को खेती के अतिरिक्त पशुपालन, बागवानी और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों में भी अवसर मिलेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और पलायन जैसी समस्याओं में कमी आने की संभावना है। समुदाय आधारित सुशासन व्यवस्था के माध्यम से ग्रामीणों को परियोजना की निगरानी और संचालन में भी भागीदारी दी जाएगी, जिससे उनमें स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।


वर्ष 2024 से जारी है साझेदारी का सकारात्मक प्रभाव
टाटा स्टील फाउंडेशन और स्टैंडर्ड चार्टर्ड वर्ष 2024 से इन क्षेत्रों में मिलकर कार्य कर रहे हैं। अब तक इस साझेदारी के तहत 15 गांवों के 7,500 से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाया जा चुका है। इस दौरान 50 से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया, जिनसे लगभग 14.8 मिलियन क्यूबिक फीट जल भंडारण क्षमता विकसित हुई है।
इसके अलावा करीब 300 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन प्रयासों का ग्रामीण जीवन पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। खेती की स्थिति में सुधार हुआ है और जल संकट से जूझ रहे गांवों में राहत मिली है। यही सफलता अब परियोजना के नए और विस्तारित चरण की आधारशिला बनी है।

अधिकारियों ने बताया जलवायु अनुकूल भविष्य की दिशा में अहम कदम
स्टैंडर्ड चार्टर्ड इंडिया की हेड ऑफ सस्टेनेबिलिटी करुणा भाटिया ने कहा कि वर्ष 2024 से शुरू हुई साझेदारी की सफलता ने इस पहल को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक नेतृत्व आधारित सुशासन और एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन के जरिए जल भंडारण क्षमता बढ़ाने तथा सतत कृषि को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे। उन्होंने इसे जलवायु अनुकूल भविष्य के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता बताया।
वहीं सौरव रॉय ने कहा कि जलवायु संबंधी कार्रवाई का केंद्र उन संवेदनशील समुदायों को होना चाहिए, जो पर्यावरणीय बदलावों का सबसे अधिक प्रभाव झेलते हैं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन के साथ-साथ आदिवासी समुदायों के लिए जल सुरक्षा और सतत आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


पारिस्थितिकीय स्थिरता और सामुदायिक रेसिलियंस को मिलेगा बढ़ावा
यह परियोजना केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पारिस्थितिकीय स्थिरता और सामुदायिक रेसिलियंस को मजबूत करना भी है। मिट्टी एवं जल संरक्षण आधारित कार्यों के जरिए प्राकृतिक संसाधनों को पुनर्जीवित किया जाएगा, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
भूजल पुनर्भरण, जल संचयन और सतत कृषि पद्धतियों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक तैयार बनाया जाएगा। इससे आने वाले वर्षों में गांवों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। टाटा स्टील फाउंडेशन और स्टैंडर्ड चार्टर्ड की यह पहल ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूलन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में उभर रही है।