RASCA CINE AWARD : जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित माइकल जॉन प्रेक्षागृह में शनिवार की शाम कला, संस्कृति और सिनेमा के एक अद्भुत संगम की गवाह बनी। अवसर था 'रास्का सिने अवॉर्ड समारोह' का, जहाँ संताली और क्षेत्रीय फिल्मों के सितारों ने अपनी उपस्थिति से न केवल मंच की शोभा बढ़ाई, बल्कि अपनी कला का लोहा भी मनवाया। इस गरिमामयी समारोह में संताली सिनेमा के विकास और उसकी समृद्ध विरासत का जश्न मनाया गया। सतरंगी रोशनी और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच, क्षेत्रीय सिनेमा के उन तमाम हुनरमंदों को सम्मानित किया गया जिन्होंने अपनी कहानियों और अभिनय से समाज पर गहरा प्रभाव छोड़ा है।
पंडित रघुनाथ मुर्मू को नमन: परंपरा और आधुनिकता का मिलन
समारोह का विधिवत शुभारंभ 'ओलचिकी' लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू की तस्वीर पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया गया। यह क्षण भावुक और गर्व से भरा था, जिसने सिनेमाई उत्सव को वैचारिक गहराई प्रदान की। इसके बाद शुरू हुआ रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला। झारखंड और पश्चिम बंगाल से आई डांस टीमों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर ऐसी प्रस्तुतियां दीं कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। अत्याधुनिक लाइट शो और पारंपरिक नृत्य के इस अनूठे मिश्रण ने यह साबित कर दिया कि संताली संस्कृति अपनी जड़ों से जुड़ी रहकर भी आधुनिकता को अपनाने में सक्षम है। गायक पालु और गायिका रूपाली के गीतों ने शाम को और भी खुशनुमा बना दिया।
'किषांण बोंगा' बनी बेस्ट फिल्म, रघुनाथ और सोनी को मिला श्रेष्ठ सम्मान
अवॉर्ड्स की श्रेणी में फिल्म 'किषांण बोंगा' (आदिम खेलोंड अखड़ा) ने बाजी मारते हुए 'बेस्ट फिल्म' का खिताब अपने नाम किया। वहीं, फिल्म 'बारया मोने' के लिए रघुनाथ टुडू को बेस्ट एक्टर और 'सुंतू गुतूज' के लिए सोनी मुर्मू को बेस्ट एक्ट्रेस के पुरस्कार से नवाजा गया। निर्देशन के क्षेत्र में मसांग मुर्मू ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए फिल्म 'बारया मोने' के लिए बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड जीता। इन पुरस्कारों ने न केवल कलाकारों के परिश्रम को सराहा, बल्कि संताली कहानियों की व्यापकता को भी रेखांकित किया।
सिनेमा: समाज और संस्कृति को संरक्षित करने का सशक्त माध्यम
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जुगसलाई तोरोप परगना दशमत हांसदा ने जनजातीय पहचान और सिनेमा के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि फिल्में केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे समाज का दर्पण हैं और अपनी संस्कृति को संरक्षित करने का एक सशक्त माध्यम भी हैं। हांसदा ने जोर देकर कहा कि झारखंड का क्षेत्रीय सिनेमा अब परिपक्वता की ओर बढ़ रहा है। स्थानीय कहानियों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर जिस तरह वैश्विक पटल पर पेश किया जा रहा है, वह समाज और फिल्म जगत दोनों के भविष्य के लिए एक अत्यंत शुभ संकेत है।
14 वर्षों का सफर: प्रतिभाओं को मंच देने का संकल्प
रास्का के निदेशक शंकर हेंब्रम ने अपनी बात रखते हुए कहा कि रास्का पिछले 14 वर्षों से संताली सिनेमा के माध्यम से भाषा और संस्कृति की सेवा कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रास्का का मुख्य उद्देश्य उन कलाकारों और व्यक्तियों को सम्मानित करना है जो अपनी मातृभाषा संताली को समृद्ध और विकसित बनाने में योगदान दे रहे हैं। हेंब्रम ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद संताली कलाकारों ने यह साबित कर दिया है कि उनकी कहानियों में वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने का दम है। यह मंच नई प्रतिभाओं के स्वागत और पुराने दिग्गजों के सम्मान का प्रतीक बन चुका है।
नई पीढ़ी और तकनीक: संताली सिनेमा की मार्केटिंग का नया दौर
फिल्म निर्माता-निर्देशक दशरथ हांसदा ने वर्तमान परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि नई पीढ़ी के फिल्म निर्माता अब निर्माण की बारीकियों को बहुत गहराई से समझ रहे हैं। वे न केवल बेहतरीन फिल्में बना रहे हैं, बल्कि उन्हें मार्केटिंग करने के हुनर में भी माहिर हैं। आजकल संताली फिल्मों को अन्य भाषाओं में डब कर उनकी पहुंच का विस्तार किया जा रहा है। यही कारण है कि अब संताल समाज के अलावा अन्य समुदायों के लोग भी इन फिल्मों की पटकथा और निर्माण शैली को पसंद कर रहे हैं। आने वाले दिनों में संताली सिनेमा आर्थिक और रचनात्मक दोनों स्तरों पर और अधिक समृद्ध होगा।
मुख्य विजेताओं की पूरी सूची: एक नजर में
समारोह में विभिन्न श्रेणियों में तकनीकी और रचनात्मक कौशल के लिए निम्नलिखित पुरस्कार दिए गए:
- बेस्ट फिल्म: किषांण बोंगा (आदिम खेलोंड अखड़ा)
- बेस्ट डायरेक्टर: मसांग मुर्मू (बारया मोने)
- बेस्ट एक्टर: रघुनाथ टुडू (बारया मोने)
- बेस्ट एक्ट्रेस: सोनी मुर्मू (सुंतू गुतूज)
- बेस्ट स्टोरी राइटर: जागरण टुडू (किषांण बोंगा)
- बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर: दशमत हेंब्रम (किषांण बोंगा)
- बेस्ट डीओपी: अंकित अग्रवाल (आते-आते)
- बेस्ट एडिटर: पौशेरू (आते-आते)
- बेस्ट मेल/फीमेल सिंगर: लक्ष्मण मार्डी एवं सुषमा हेंब्रम (किषांण बोंगा)
- नेगेटिव रोल: रवींद्र नाथ टुडू (बारया मोने)
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