Jamshedpur News: हिमालय की बर्फीली चोटियों और दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर को करीब से देखने का सपना हर पर्वतारोही का होता है। इस सपने को हकीकत में बदलते हुए टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन (TSAF) के नेतृत्व में 8 प्रतिभागियों के एक दल ने अप्रैल 2026 में सफलतापूर्वक एवरेस्ट बेस कैंप (EBC) की चढ़ाई पूरी की। यह यात्रा केवल शारीरिक क्षमता का परीक्षण नहीं थी, बल्कि यह मानसिक दृढ़ता और टीम वर्क का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी।


8 प्रतिभागियों ने चुनौती को स्वीकार किया
यह साहसिक अभियान 11 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ और 26 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस विशेष दल का नेतृत्व TSAF के अनुभवी और वरिष्ठ प्रशिक्षक राथू महतो ने किया। उनके विशेषज्ञ मार्गदर्शन में 8 प्रतिभागियों ने इस चुनौती को स्वीकार किया, जिनमें 1 महिला और 7 पुरुष शामिल थे। दल की सबसे खास बात इसकी विविधता थी; प्रतिभागियों की आयु 35 से 63 वर्ष के बीच थी, जो यह साबित करता है कि अगर संकल्प मजबूत हो तो उम्र महज एक संख्या है।



एवरेस्ट बेस कैंप की राह आसान नहीं थी
एवरेस्ट बेस कैंप की राह आसान नहीं थी। दल ने 17,598 फीट की ऊँचाई तक पहुँचने के लिए प्रकृति के सबसे कठोर रूपों का सामना किया। ट्रेक के दौरान तापमान -25°C तक गिर गया, जिससे हड्डियों को कपा देने वाली ठंड और तेज़ बर्फीली हवाओं ने रास्ते को और कठिन बना दिया। भारी बर्फबारी और ऑक्सीजन की कमी के बावजूद, प्रतिभागियों ने हर दिन लंबी दूरी तय की। लगातार बढ़ती ऊँचाई और गिरते दबाव ने उनके धैर्य की परीक्षा ली, लेकिन टीम का उत्साह कभी कम नहीं हुआ।


हिमालय की अनूठी संस्कृति को करीब से देखा
यात्रा के दौरान प्रतिभागियों को हिमालय की अनूठी संस्कृति को करीब से देखने का मौका मिला। दुध कोशी नदी के किनारे-किनारे चलते हुए यह दल नामचे बाज़ार पहुँचा, जिसे शेरपाओं की राजधानी कहा जाता है। यहाँ प्रतिभागियों ने शेरपा समुदाय की मेहनती और साहसी जीवनशैली को समझा। तेंगबोचे जैसे खूबसूरत गांवों में प्रवास के दौरान उन्हें स्थानीय परंपराओं और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हुआ, जिसने उनकी शारीरिक थकान को कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में मदद की।


मिशन सफलता: 17,598 फीट पर विजय
वह ऐतिहासिक पल तब आया जब सभी 8 प्रतिभागियों ने एक साथ 17,598 फीट की ऊँचाई पर स्थित एवरेस्ट बेस कैंप पर कदम रखा। इस दल में डोनाल्ड मेनेज़ेस, नीरज निद्रे, डॉ. विजय निद्रे, डॉ. कुमार राहुल, अवंतिका सिंह, अभय कुमार सिंह, मुकेश कठाई और शशिकांत गुप्ता शामिल थे। बेस कैंप पर तिरंगा लहराते समय हर प्रतिभागी की आँखों में गर्व और कृतज्ञता के आँसू थे। यह उनके महीनों के कड़े प्रशिक्षण और अटूट जुनून की जीत थी।

प्रतिभागियों ने अनुभव को साझा किया
ट्रेक की सफलता के बाद प्रतिभागियों ने अपने भावुक अनुभव साझा किए। अभय सिंह ने इसे एक 'अविस्मरणीय यात्रा' बताया जिसने उनके धैर्य को परखा। उन्होंने कहा कि TSAF के मार्गदर्शन और समूह की सकारात्मक ऊर्जा ने इस असंभव लगने वाले लक्ष्य को सार्थक बना दिया। वहीं, दल की एकमात्र महिला प्रतिभागी अवंतिका सिंह ने इसे 'आत्मचिंतन का अवसर' बताया। उनके अनुसार, हिमालय की वादियों ने उन्हें न केवल मंत्रमुग्ध किया, बल्कि चुनौतियों ने उन्हें अधिक मजबूत और स्पष्ट सोच वाला इंसान बनाया।


राथू महतो के नेतृत्व में दल ने हर सुरक्षा मानक का पालन किया
इस पूरे अभियान की सफलता का एक बड़ा श्रेय टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन (TSAF) के पेशेवर प्रबंधन को जाता है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। राथू महतो के नेतृत्व में दल ने हर सुरक्षा मानक का पालन किया, जिससे कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सभी प्रतिभागी सुरक्षित रहे। TSAF ने एक बार फिर साबित किया कि वे न केवल एडवेंचर को बढ़ावा देते हैं, बल्कि लोगों के भीतर छिपे साहस और नेतृत्व क्षमता को भी निखारते हैं।