Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका विधानसभा क्षेत्र में फ्लाई ऐश (Fly Ash) डंपिंग का मुद्दा अब गंभीर जनचिंता का विषय बनता जा रहा है। क्षेत्र के विधायक संजीव सरदार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका व्यापक दुष्प्रभाव पर्यावरण, कृषि और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। यह मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक संकट का रूप लेता दिख रहा है।
किसानों की जमीन व पर्यावरण को हो रहा नुकसान, अविलंब रोक लगाने की मांग
विधायक ने अपने पत्र में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि फ्लाई ऐश डंपिंग के कारण किसानों की उपजाऊ जमीन बंजर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि बिना उचित अनुमति और नियमों के पालन के, कंपनियों द्वारा खेतों में फ्लाई ऐश गिराया जा रहा है, जो पूरी तरह से गैरकानूनी है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और फसल उत्पादन में गिरावट आ रही है। उन्होंने बोर्ड से आग्रह किया कि इस पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
फ्लाई ऐश क्या है और क्यों बन रहा है खतरा
फ्लाई ऐश दरअसल कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स से निकलने वाला एक सूक्ष्म राख जैसा पदार्थ होता है। यह मुख्य रूप से कोयले के दहन के बाद उत्पन्न होता है और इसमें कई प्रकार के हानिकारक तत्व मौजूद होते हैं, जैसे सिलिका, एल्यूमिना और भारी धातुएं। यदि इसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान नहीं किया जाए, तो यह हवा, पानी और मिट्टी को प्रदूषित कर सकता है। यही कारण है कि इसके प्रबंधन के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन आवश्यक है।
जमीन की उर्वरता कम हो रहा, खेती करना भी मुश्किल
विधायक संजीव सरदार ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि कई ग्रामीण इलाकों में फ्लाई ऐश खुले तौर पर डंप किया जा रहा है। इससे आसपास की जमीन की उर्वरता कम हो रही है और खेती करना मुश्किल होता जा रहा है। इसके अलावा, जब यह राख हवा में उड़ती है तो वातावरण प्रदूषित होता है, जिससे पेड़-पौधों और जैव विविधता पर भी असर पड़ता है। जल स्रोतों के प्रदूषित होने की भी आशंका बढ़ जाती है, जिससे पीने के पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
स्वास्थ्य पर खतरे को लेकर जताई गंभीर चिंता
फ्लाई ऐश से निकलने वाली महीन धूल मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होती है। विधायक ने कहा कि इससे सांस संबंधी बीमारियां, अस्थमा, एलर्जी और फेफड़ों की गंभीर समस्याएं बढ़ सकती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर इसका अधिक असर पड़ता है। लगातार इस प्रदूषित वातावरण में रहने से लोगों की जीवन गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है।
खेत बर्बाद होने से ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
इस मुद्दे को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। कई जगहों पर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन भी किए हैं और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बिना उनकी सहमति के उनकी जमीनों पर फ्लाई ऐश डंप करना उनके अधिकारों का उल्लंघन है। यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह विरोध आंदोलन का रूप ले सकता है।
प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर उठाए सवाल
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी समस्या होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। विधायक ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी है कि वह नियमों का पालन सुनिश्चित कराए और पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्त कदम उठाए।
अवैध डंपिंग पर लगे रोक, किसानों के हितों की हो रक्षा: संजीव सरदार
विधायक संजीव सरदार ने स्पष्ट रूप से कहा कि फ्लाई ऐश की अवैध डंपिंग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने बोर्ड से मांग की है कि इस पर तुरंत रोक लगाई जाए और भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। साथ ही, प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने और उनकी जमीन को पुनः उपजाऊ बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की भी मांग की गई है।
समस्या का समाधान की दिशा में जरूरी कदम उठाया जाए
इस समस्या के समाधान के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लाई ऐश का वैज्ञानिक और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसका इस्तेमाल सीमेंट निर्माण, सड़क निर्माण और ईंट बनाने में किया जा सकता है, जिससे इसका पर्यावरण पर दुष्प्रभाव कम किया जा सके। साथ ही, कंपनियों को सख्त नियमों के तहत कार्य करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए। जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीणों को भी उनके अधिकारों के प्रति सजग करना जरूरी है।
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