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Bengal Election: ममता दीदी के समर्थन में हेमंत सोरेन व कल्पना सोरेन करेंगे चुनावी सभा

Bengal Election : झारखंड की राजनीति अब पश्चिम बंगाल के चुनावी मैदान में भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराने जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन 18, 19 और 20 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रत्याशियों के समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे। यह कदम न केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में गठबंधन की नई दिशा को भी दर्शाता है। झामुमो पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह इस चुनाव में टीएमसी के साथ खड़ा है और इसी कारण उसने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं।


दीदी ने एकला चलो रे की जगह साथ लेकर चलो नीति अपनाया 

हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन का बंगाल में प्रचार करना झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और टीएमसी के बीच मजबूत होते राजनीतिक रिश्तों का स्पष्ट संकेत है। यह गठबंधन केवल चुनावी सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की राजनीति में साझा रणनीति की ओर भी इशारा करता है। ममता बनर्जी के आग्रह पर हेमंत सोरेन का प्रचार के लिए जाना इस रिश्ते को और मजबूत करता है। इससे विपक्षी दलों के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाने की कोशिश भी साफ नजर आती है।

झारखंड से सीमावर्ती क्षेत्रों के आदिवासी वोट बैंक पर फोकस

पुरुलिया, काशीपुर और आसपास के इलाकों में आदिवासी मतदाताओं की अच्छी-खासी संख्या है। हेमंत सोरेन की पहचान एक आदिवासी नेता के रूप में है और इन क्षेत्रों में उनकी लोकप्रियता भी मानी जाती है। यही कारण है कि झामुमो ने अपने प्रभाव वाले इलाकों में प्रचार करने का निर्णय लिया है। इस कदम से टीएमसी को आदिवासी वोट बैंक को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है, जो चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है।


आदिवासी इलाकों में झामुमो की पकड़ है मजबूत 

बंगाल चुनाव में सक्रिय भागीदारी झामुमो के लिए अपने राजनीतिक दायरे को बढ़ाने का अवसर भी है। भले ही पार्टी ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है, लेकिन प्रचार के जरिए वह अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। इससे भविष्य में झामुमो को अन्य राज्यों में भी अपनी पकड़ मजबूत करने का रास्ता मिल सकता है। यह एक दीर्घकालिक राजनीतिक निवेश की तरह देखा जा रहा है। वैसे भी जबसे झामुमो ने असम में एंट्री मारी है तबसे पार्टी का धाक बढ़ा है। झामुमो के इस नई रूप को लेकर किसी को भी अंदाजा तक नहीं था। झामुमो ने जिस तरह से असम में चुनावी प्रचार प्रसार किया। उसको देख विरोधी पार्टी भी देखकर सन्न रह गए। वे इस सोच में पड़ गए कि इसमें इतना पावर आया कहां से। खैर चुनाव और जंग में सब जायज है।

क्षेत्रीय दलों की एकजुटता बन सकती है पावर बैंक 

हेमंत सोरेन का यह दौरा क्षेत्रीय दलों के बीच बढ़ती एकजुटता का भी संकेत है। राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हो रही बड़ी पार्टियों के मुकाबले क्षेत्रीय दल अब आपसी सहयोग के जरिए अपनी ताकत बढ़ाने की रणनीति अपना रहे हैं। टीएमसी और झामुमो का यह तालमेल उसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है, जहां साझा मुद्दों पर मिलकर चुनाव लड़ा जा रहा है। क्षेत्रीय पार्टी भी इस बात को मानते हैं कि बड़ी पार्टी से लोहा लेना इतना आसान नहीं है। क्योंकि वे हर तरह से सक्षम हैं। अब क्षेत्रीय दलों को अपना वजूद को बचाना है तो एक दूसरे को साथ लेकर बड़ा ताकत बनना ही होगा। 


हेमंत और कल्पना आज के समय में हैं प्रभावशाली चेहरे

हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन दोनों ही अपने-अपने क्षेत्रों में लोकप्रिय नेता हैं। खासकर हेमंत सोरेन की छवि एक जमीनी नेता की रही है, जो सीधे जनता से जुड़े रहते हैं। उनके चुनावी सभाओं में शामिल होने से टीएमसी उम्मीदवारों को प्रचार में बढ़त मिलने की उम्मीद है। जिन क्षेत्रों में प्रचार होना है, वहां पार्टी का अच्छा प्रभाव है, जिसका फायदा टीएमसी को मिलेगा। आज के समय में हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन का बहुत बड़ा राजनीतिक कद है। आदिवासी मूलवासी को इन दो चेहरों पर पूरा भरोसा है। हाल के दिनों में आदिवासी मूलवासी समाज को लेकर इन्होंने भी अपनी राजनीतिक गतिविधियों को बढ़ाया है।

प्रत्याशी नहीं देना, फिर भी साथ रहना देता है नया संकेत

यह पूरा घटनाक्रम केवल चुनाव प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी देता है। यह बतलाता है कि आने वाले समय में क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रहे हैं। झामुमो और टीएमसी का यह सहयोग भविष्य में और बड़े गठबंधनों का आधार बन सकता है। साथ ही, यह भी संकेत है कि राजनीतिक दल अब सीमाओं से बाहर जाकर अपने प्रभाव को विस्तार देने पर जोर दे रहे हैं। अब आने वाला समय ही बताएगा कौन किसके साथ है। क्योंकि चीज ही ऐसी है पल में जुड़ता है और अगले ही पल अलग हो जाता है।

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