झाड़ग्राम सीट से मंगल सोरेन को TMC का टिकट, मंत्री बीरबाहा हांसदा का कटा नाम

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच All India Trinamool Congress (टीएमसी) ने अपनी उम्मीदवारों की सूची में बड़ा बदलाव करते हुए झाड़ग्राम विधानसभा सीट से नया चेहरा सामने लाया है। पार्टी ने साधु रामचंद मुर्मू विश्वविद्यालय, झाड़ग्राम के सीनियर लॉ ऑफिसर मंगल सोरेन को उम्मीदवार बनाया है। इसके साथ ही वर्तमान विधायक और मंत्री Birbaha Hansda का टिकट काट दिया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि मंगल सोरेन ने मंगलवार (17 मार्च) को ही टीएमसी का दामन थामा और पार्टी में शामिल होने के कुछ ही घंटों बाद उन्हें झाड़ग्राम सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आदिवासी बहुल झाड़ग्राम क्षेत्र में पार्टी की रणनीति को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।
मंगल सोरेन साधु रामचंद मुर्मू विश्वविद्यालय में सीनियर लॉ ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं और संथाल समुदाय से आते हैं। क्षेत्र में उनकी सामाजिक पकड़ को देखते हुए टीएमसी ने उन्हें चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि उनकी उम्मीदवारी से आदिवासी मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ और मजबूत हो सकती है।
झाड़ग्राम विधानसभा सीट आदिवासी बहुल क्षेत्र मानी जाती है और राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी की उम्मीदवार बीरबाहा हांसदा ने इस सीट पर लगभग 30 हजार मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। हालांकि इस बार पार्टी ने नई रणनीति के तहत उम्मीदवार बदलने का निर्णय लिया है।
टीएमसी ने पश्चिम बंगाल की कुल 294 विधानसभा सीटों में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री Mamata Banerjee भबानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी। झाड़ग्राम सीट के लिए भी जारी आधिकारिक सूची में मंगल सोरेन का नाम शामिल किया गया है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि झाड़ग्राम सीट पर टीएमसी का मजबूत आधार रहा है, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी समेत अन्य दल भी कड़ी चुनौती देने की तैयारी में हैं। ऐसे में मंगल सोरेन को उम्मीदवार बनाकर टीएमसी ने आदिवासी वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति अपनाई है।
मंगल सोरेन की उम्मीदवारी से क्षेत्र में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि टीएमसी की यह नई रणनीति आगामी चुनाव में कितनी सफल साबित होती है, खासकर झाड़ग्राम जैसे संवेदनशील आदिवासी क्षेत्र में।

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