Jamshedpur News: अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर संयुक्त श्रमिक संगठनों द्वारा इस वर्ष 1 मई को ‘क्रांति दिवस’ के रूप में बड़े पैमाने पर मनाया गया। झारखंड असंगठित मजदूर यूनियन के आह्वान पर चार प्रमुख श्रमिक संगठनों ने एकजुट होकर इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इस संयुक्त मंच में झारखंड असंगठित मजदूर यूनियन (एटक), झारखंड श्रमिक संघ (झामुमो), सिंहभूम ठेकेदार कामगार यूनियन (सीटू) एवं झारखंड वर्कर्स यूनियन शामिल रहे। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों मजदूरों ने भाग लेकर अपनी एकता और अधिकारों के प्रति जागरूकता का परिचय दिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि मजदूर वर्ग अपनी एकता और संघर्ष के बल पर अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है और आने वाले समय में एक मजबूत आंदोलन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि से शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत आमबगान मैदान में स्थापित Subhas Chandra Bose की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। इसके बाद मजदूरों का एक विशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें श्रमिकों ने अपने अधिकारों से जुड़े नारों के साथ शहर के विभिन्न हिस्सों में अपनी आवाज बुलंद की। इस दौरान मजदूरों में उत्साह और एकजुटता का माहौल देखने को मिला, जो उनके अधिकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।

वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की
कार्यक्रम की अध्यक्षता कामरेड सपन कुमार घोषाल ने की, जबकि संचालन का दायित्व कामरेड रमेश मुखी ने निभाया। स्वागत भाषण झारखंड श्रमिक संघ के महासचिव शैलेन्द्र मैती द्वारा दिया गया। इस अवसर पर कई प्रमुख श्रमिक नेताओं ने मंच से मजदूरों को संबोधित किया और उनके अधिकारों, संघर्षों तथा वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की।

मजदूर आंदोलन और वर्तमान चुनौतियों पर चर्चा
कार्यक्रम में कामरेड नागराजू, ओमप्रकाश और गौतम कुमार बोष ने मजदूर आंदोलन के इतिहास और वर्तमान समय में मजदूरों के सामने खड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि किस प्रकार बदलते आर्थिक परिवेश में मजदूरों के अधिकारों पर दबाव बढ़ रहा है और उन्हें संगठित होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है। उन्होंने मजदूरों को जागरूक रहने और अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया।

श्रम कानूनों और मजदूरों की मांगों पर जोर
अध्यक्ष सपन कुमार घोषाल ने अपने संबोधन में वर्तमान समय में मजदूरों के साथ हो रहे शोषण और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष को तेज करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने केंद्र की सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए श्रम कोड कानूनों की आलोचना करते हुए मजदूरों को इसके प्रभावों के बारे में जानकारी दी। सभा में सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं, जिनमें स्थायी प्रकृति के कार्यों को ठेका के माध्यम से कराना दंडनीय अपराध घोषित करना, ठेका मजदूरों को स्थायी करना, न्यूनतम मजदूरी 783 रुपये तत्काल लागू करना और चार श्रम संहिताओं को रद्द करना शामिल है। इन मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की गई और बड़े आंदोलन की तैयारी का संकल्प लिया गया।

ठेका मजदूरों ने बड़ी संख्या में भाग लिया
इस मजदूर दिवस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के ठेका मजदूरों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में भरत बहादुर, गंगा बहादुर, नरसिंह राव, सुनीता मुर्मू, चुड़ा हांसदा, संतोष मुखी, शांति, निराला, अनील बाल्मीकि, रामदास करूवा, नीरज, विष्णु, लाल मुखी, संजीत घोषाल, अमित ठाकुर, सुमंत मुखी, जोलेश मुखी, रवि मुखी, करण हेंब्रम, दुखनी पाड़या, सरिता दिग्गी, पिंटू मुखी, संतोष सेठ सहित अनेक श्रमिकों का विशेष योगदान रहा।