Jamshedpur news: शिक्षा के अधिकार और बेहतर भविष्य की उम्मीद लिए 'मां तुझे सलाम' संस्था और खासमहल के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। शुक्रवार को संस्था के प्रतिनिधियों ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को एक 6 सूत्री मांग पत्र सौंपा। इस मांग पत्र के माध्यम से क्षेत्र की दशकों पुरानी शैक्षिक समस्याओं को उजागर किया गया और चेतावनी दी गई कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन और धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।
50 साल पुराना है प्राथमिक विद्यालय
खासमहल क्षेत्र में स्थित प्राथमिक विद्यालय पिछले 50 वर्षों से इस इलाके की शिक्षा का केंद्र बना हुआ है। खासमहल और उसके आसपास के क्षेत्रों में 10,000 से अधिक गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार निवास करते हैं। इन परिवारों की पूरी निर्भरता इसी एकमात्र प्राथमिक विद्यालय पर है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आधी सदी बीत जाने के बाद भी इस विद्यालय का स्वरूप नहीं बदलना प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है।
मिडिल स्कूल के अभाव में दूसरे पंचायतों में रुख कर रहे छात्र
प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को बताया कि खासमहल में प्राथमिक शिक्षा (कक्षा 1 से 5) की सुविधा तो है, लेकिन मिडिल स्कूल (कक्षा 6 से 8) न होने के कारण बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाता है। गरीब माता-पिता अपने बच्चों को आगे पढ़ाने के लिए मजबूरन दूसरे पंचायतों के स्कूलों में भेजते हैं। इससे न केवल बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, बल्कि गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि इसी प्राथमिक विद्यालय को उच्चीकृत (Upgrade) कर मिडिल स्कूल बनाया जाए।
बरसात में छत से टपकता पानी, बाधित होती है पढ़ाई
स्कूल की वर्तमान स्थिति काफी दयनीय और चिंताजनक है। 'मां तुझे सलाम' संस्था ने अपनी मांग में स्पष्ट किया है कि विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण कक्षाओं में बैठना नामुमकिन हो जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई अक्सर बाधित रहती है। ग्रामीणों ने स्कूल के लिए एक आधुनिक और मजबूत नई बिल्डिंग के निर्माण की मांग की है, ताकि बच्चे सुरक्षित वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सकें।
विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
शिक्षा केवल चारदीवारी का नाम नहीं है, बल्कि वहां मिलने वाली सुविधाएं भी मायने रखती हैं। मांग पत्र में उल्लेख किया गया है कि स्कूल के क्लासरूम में बेंच और डेस्क पूरी तरह टूट चुके हैं। बच्चे टूटे हुए फर्नीचर पर बैठने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें शारीरिक परेशानी तो होती ही है, साथ ही पढ़ाई में मन लगाना भी मुश्किल होता है। संस्था ने मांग की है कि पुराने और टूटे हुए फर्नीचर को हटाकर तत्काल नए बेंच-डेस्क की व्यवस्था की जाए।
स्थानीय लोगों की एकजुटता और 6 सूत्री मांगें
संस्था के साथ बड़ी संख्या में खासमहल वासी भी उपायुक्त कार्यालय पहुंचे थे। उनकी मांगों में प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- प्राथमिक विद्यालय को मिडिल स्कूल में अपग्रेड करना।
- स्कूल के लिए नए और भव्य भवन का निर्माण।
- सभी कक्षाओं में आधुनिक फर्नीचर और बेंच की उपलब्धता।
- बरसात के पानी से बचाव हेतु वाटरप्रूफिंग या नई छत।
- पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार।
- स्कूल परिसर की घेराबंदी सुनिश्चित करना।
मांगें न मानने पर होगा धरना-प्रदर्शन
प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से आग्रह किया है कि इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक और त्वरित कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि वे अपने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। यदि प्रशासन ने जल्द ही स्कूल को मिडिल स्कूल बनाने और बिल्डिंग की मरम्मत का कार्य शुरू नहीं किया, तो गांव वाले सामूहिक रूप से धरने पर बैठने के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों के अनुसार, यह उनके अधिकारों की लड़ाई है और वे इसे निर्णायक मोड़ तक लेकर जाएंगे।
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